Pawan Jury BhilwaraRj
चिंटू - मास्टर जी, हमारी अदालते शशिकला को जेल पहुँचाने और सलमान को रिहा करने में 25 साल क्यों ले लेती है ?
मास्टर जी - अफ्रीकन देशो में काले जादू की एक कला के बारे में सुना जाता है -- वू डू। माना जाता है कि जादूगर एक पुतला बनाता है और उस पुतले में सुई चुभाने से दर्द उस मनुष्य को होता है जिसके नाम से पुतले को अभिमंत्रित किया गया था !!! मैं जादू वगेरह में नहीं मानता लेकिन भारत का अदालती सिस्टम वू डू की तर्ज पर ही रचा गया है। जो भी नेता, अभिनेता, अधिकारी, कारोबारी उभरता है, सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जज उस पर दर्ज मुकदमो की फ़ाइल बना कर अपनी दराज में रख लेते है। दर्द देने की लिए जज इन फाइलों को दराजों से निकाल देते है। वे इन रसूखदार लोगो की फाइले निपटाना नहीं चाहते, लटकाये रखते है। क्योंकि फैसला आने से अमुक व्यक्ति उनके नियंत्रण से बाहर हो जाएगा। इस तरह से मुकदमो की संख्या बढती जाती है।
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चिंटू - तो इन जजो को चाहिए क्या इनसे ?
मास्टर जी - इन्हें नहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों को चाहिए। जब बहुराष्ट्रीय कंपनियां किसी रसूखदार व्यक्ति को ब्लैकमेल करना चाहती है तो वे इसके लिए जजो का इस्तेमाल करती है। इस तरह जितने भी नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, अभिनेता, कारोबारी आदि पर कोई न कोई मुकदमा दर्ज है वे सुप्रीम कोर्ट के 25 जजो के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मालिको के पंजे में पड़े हुए है। मोदी, सोनिया, वाड्रा, मुलायम से लेकर औवेसी और आडवाणी तक सभी की नालें अदालतों में गड़ी हुयी है। जज धनिको से घूस खाते है और इन नेताओ के मुहँ में लगाम डाल कर रखते है। जब जरुरी होता है तब सुई चुभा देते है।
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चिंटू - लेकिन मास्टर जी भारत में जो 3 करोड़ मुकदमे लटके हुए है उन्हें तो निपटाना चाहिए। ऊँचे लोगो को तलने के चक्कर में इन लोगो ने भारत के करोडो नागरिको को क्यों अदालतों में फसाँ कर रखा है ?
मास्टर जी - वो तो फसाँ कर रखना पड़ेगा। अपना नियंत्रण बनाये रखने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों और जजो को भारत की अदालतो का ढांचा इस तरह चाहिए जिससे वे जब चाहे मामले को दशको तक लटका सके और जब चाहे किसी भी दिन किसी भी व्यक्ति के मुकदमे में तेजी ला सके। आम आदमियों के मुकदमे जल्दी निपटाएंगे और रसूखदार के लटकाएंगे तो एक्सपोज हो जाएंगे। इसीलिए इन्होंने सबको ही फँसा कर रखने की व्यवस्था बना कर रख छोड़ी है। समाधान के लिए हमें ज्यूरी सिस्टम ....
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चिंटू - हाँ वो मुझे पहले से मालूम है कि यदि भारत में ज्यूरी सिस्टम लागू हो जाता है तो सभी मुकदमो का फैसला 15-20 दिन में आने लगेगा और अदालतों से भ्रष्टाचार गायब हो जाएगा। ड्राफ्ट भी है मेरे पास। ये रहा -- https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/548841788627353
लेकिन मास्टर जी, ज्यूरी सिस्टम आएगा कैसे ? मोदी साहेब, केजरीवाल और सोनिया तो ज्यूरी सिस्टम के भयंकर वाले विरोधी है। और उनके चक्कर में आकर इनके करोड़ो अंध भगत भी ज्यूरी सिस्टम का विरोध कर रहे है !!
मास्टर जी - चिंटू, ये लोग अपनी इच्छा से ज्यूरी सिस्टम लागू नहीं करेंगे। जब लाखों कार्यकर्ता मांग करेंगे तब जाकर इन पर दबाव बनेगा और ये ज्यूरी सिस्टम लाने के लिए बाध्य होंगे।
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चिंटू - मास्टर जी , दबाव बनेगा कैसे ? ज्यूरी सिस्टम तो दूर की बात है, आज ही मैंने एक कार्यकर्ता से कहा कि भारत में 3 करोड़ मुकदमे लटके हुए है और सिर्फ 18,000 जज है। इसीलिए कम से कम सरकार को जजों की संख्या बढ़ाकर 2 लाख तो करनी ही चाहिए, इसीलिए तुम सरकार से ऐसी मांग करो। तो उन्होंने पलटकर कहा कि -- तुम 60 सालो से क्या कर रहे थे ? तब क्यों नहीं बोले ? पहले पिछले 60 साल का हिसाब दो !!!
मास्टर जी - पर चिंटू तुम तो अभी तक सिर्फ 12 साल के हो।
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चिंटू - अरे वोई तो मैंने उन्हें बोला। तो कहने लगे कि ठीक है तो पिछले दो साल का हिसाब छोड़ते हुए शेष 10 साल का हिसाब दे दो !! तो आप खुद ही बताओ कि अदालतों को सुधारने के लिए ऐसे कैसे मांग खड़ी होगी। इनको जब भी क़ानून सुधारने पर ध्यान देने की बात कहो, तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल की भक्ति के गीत गाने लगते है।
मास्टर जी - जो भी है, अगर देश की अदालते सुधारनी है तो नागरिको को यह बात तो समझनी ही पड़ेगी कि नेता भक्ति से अदालते नहीं सुधरने वाली है। अदालते तब सुधरेगी जब हम इन्हें सुधारने के लिए नेताओं पर आवश्यक कानूनों को पास करने का दबाव बनायेंगे। अन्य कोई उपाय नहीं।
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चिंटू - हाँ वो तो है। मैं तो मेरी तरफ से बताते ही रहता हूँ।
मास्टर जी - हाँ, वैसे ही होगा।
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