Pawan Jury BhilwaraRj
संदर्भ - फिल्म पद्मिनी के निर्देशक भंसाली की धुनाई
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ऐतिहासिक घटनाओ को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की हरकतों पर रोक लगाने का उपाय यह है कि "सेंसर बोर्ड चेयरमेन" को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया गेजेट में प्रकाशित की जाए। हाथापाई से एक बार को सनसनी फैलाई जा सकती है, इसे रोका नहीं जा सकता। वे राजस्थान छोड़कर अन्य किसी राज्य में शूटिंग कर लेंगे और वहां ऐसी गड़बड़ न हो इसके लिए सरकार उन्हें सुरक्षा दे देगी।
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शीर्ष नेता कार्यकर्ताओ का समय और उनकी ऊर्जा बर्बाद करने के लिए उन्हें सड़क पर उतरकर इस तरह की स्टंटबाजी करने के लिए उकसाने है।
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होना यह चाहिए कि, उन्हें 100-50 करोड़ रूपये फूंककर पिक्चर बनाने दी जाए और फिर सेंसर बोर्ड या तो इसे साल दो साल के लिए अटका दे और इसमें इतने कट लगाए कि फिल्म चूं चूं का मुरब्बा बन कर रह जाए। निर्माता को इससे भारी आर्थिक क्षति होगी और आइंदा के लिए कोई भी निर्माता इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने वाली ऐसी पटकथा पर अपने पैसे लगाने का जोखिम नहीं उठाएगा। लेकिन सेंसर बोर्ड चेयरमेन ऐसा सिर्फ तब ही करेगा जब उसे नौकरी से निकालने का अधिकार आम नागरिको के पास होगा। वरना चेयरमेन निर्माता से घूस खायेगा और पिक्चर पास कर देगा।
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डीडी चेयरमेन और सेंसर बोर्ड चेयरमेन को बदलने की प्रक्रिया एक जैसी है। अतः राईट टू रिकॉल सेंसर बोर्ड के लिए प्रस्तावित क़ानून का ड्राफ्ट देखने के लिए राईट टू रिकॉल दूरदर्शन चेयरमेन का ड्राफ्ट देंखे।
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राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/546885878822944
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