Pawan Jury BhilwaraRj

Rakesh Suri Ghaziabad UpActivist:

Welcome to cover pix of .Rakesh Suri, voterid = XPD2092674 .

भारतीय संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह संविधानिक अधिकार तथा कर्तव्य है कि, वह देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक आदेश अपने सांसद को भेजे।
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नीचे उन आदेशो की सूची दी गयी है, जो आदेश मैंने SMS द्वारा अपने सांसद को भेजे है। आदेशो का विवरण जानने के लिए लिंक को क्लिक करे।
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यदि आप भी इन कानूनो का समर्थन करते है, तो अपने सांसद को SMS भेज कर इन्हे गैजेट में प्रकाशित करने का आदेश दे, तथा अपने सांविधानिक कर्तव्य को पूरा करे।

1. पारदर्शी शिकायत प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://www.fb.com/notes/1081372645258229

2 राईट टू रिकाल जिला पुलिस प्रमुख के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://www.facebook.com/notes/1081541455241348

3 राईट टू रिकाल जिला जज के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://www.fb.com/notes/1081548011907359

4 राईट टू रिकाल जिला शिक्षा अधिकारी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://fb.com/notes/1082230508505776

5 राईट टू रिकाल दूरदर्शन अध्यक्ष के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://www.facebook.com/notes/1082818918446935

6.6 राईट टू रिकाल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://facebook.com/1082244645171029

6.10 राईट टू रिकाल मुख्‍यमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://www.facebook.com/notes/1084532274942266

6 मॉरिशस रुट और सेज को दी जा रही कर राहतो की समाप्ति के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट
https://www.facebook.com/notes/1082238098505017

7 Rtr jury draft
https://mobile.facebook.com/notes/rakesh-suri/rtrjurydraft/1158606390868187

8 WOIC draft
https://mobile.facebook.com/notes/rakesh-suri/woic/1158641510864675/

9 चुनाव यंत्र (EVM) पर बैन लगाया
http://tiny.cc/banevm
https://www.facebook.com/notes/1163643720364454

10 राईट टू रिकॉल सांसद का ड्राफट
http://tiny.cc/rtrmp
https://www.facebook.com/notes/1171146519614174

My Name is Rakesh Suri, i live in District:Ghaziabad, State:Uttar Pradesh
My Facebok ID is not fake. i am indian voter. My Voter ID Number is XPD2092674.
I Support TCP Draft, Positive Right to Recall, Jury Draft.
Please read this link www.righttorecall.info/001.h.pdf

मेरी फेसबुक फर्जी नही हैं बल्कि प्रमाणिक हें आप जांच कर सकते हैं

मेरा नाम राकेश सूरी हैं और मैं गाजियाबाद वैशाली मे रहता हूं आप चाहे तो सरकारी वेबसाइड मे मेरा नाम चेक कर सकते हैं यह मेरे Polling Booth की लिस्टै का लिंक http://164.100.180.82/Rollpdf/AC055/S24A055P459.pdf हैं Sr. No. 100 देखें और मेरी फोटो देखे मैने वोटर आई डी कापी पकड़ रखी हैं

(2.6) अपने सांसद को जरुरी आदेश भेजने के लिए सांसदों के मोबाईल नंबर इस लिंक पर देखें जा सकते है :
http://164.100.47.132/LssNew/Members/membercontactdetail.aspx

(2.7) राईट टू रिकॉल और ज्यूरी सिस्टम आदि क़ानून प्रक्रियाओ से सम्बंधित वीडियो यहां देखें :
https://www.youtube.com/user/RightToRecallGroup/videos

मैं यह मानता हूँ कि सभी राजनेतिक व्यवस्थाओं में लोकतंत्र एक मात्र ज्ञात सबसे बेहतरीन राजनेतिक व्यवस्था है, किन्तु लोकतंत्र के अभाव में हम बदतरीन भविष्य की और बढ़ रहे है ।
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लोकतंत्र की वास्तविक अवधारणा :

लोकतंत्र के चार स्तम्भ, जो कि लोकतंत्र को धारण करते है ।

1. विधायिका : मतदाताओं के पास अपने राजनेतिक प्रतिनिधियों जैसे सांसद, विधायक, पीएम, सीएम तथा मंत्रियो को चुनने के साथ ही किसी भी समय नौकरी से निकालने का अधिकार भी होना चाहिए ।
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2. प्रशासनिक कार्यपालिका : मतदाताओं के पास क़ानून व्यवस्था बनाए रखने वाले प्रशानिक अधिकारियों जैसे पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, सीबीआई प्रमुख, रिजर्व बेंक गवर्नर आदि को नौकरी से निकालने का अधिकार होना चाहिए ।
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3. न्यायपालिका : न्याय करने और दंड देने की शक्ति नागरिको के पास होनी चाहिए ।
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4. मिडिया : शासन और जनता के बीच संवाद का कार्य करने वाले मिडिया को मतदाताओं के अधीन होना चाहिए ।
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उपरोक्त चार में से तीन प्रक्रियाएं राईट टू रिकाल कानूनों से और एक प्रक्रिया ज्यूरी प्रथा लागू करके लायी जा सकती है । जूरी प्रथा और राईट टू रिकाल प्रक्रियाओं से युक्त राजनेतिक व्यवस्था ही लोकतंत्र है, तथा इनका अभाव ही लोकतंत्र का अभाव है ।
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व्यावहारिक तौर पर इसे समझने के लिए हम अमेरिका और ब्रिटेन का उदाहरण ले सकते है । अमेरिका में पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी और गवर्नर को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया वहां के आम नागरिको के पास है, तथा मुकदमो की सुनवाई तथा फैसले नागरिको की ज्यूरी द्वारा दिए जाते है । इन कानूनों ने अमेरिका में लोकतंत्र स्थापित किया जिससे उनकी शिक्षा व्यवस्था सुधरी, तकनीक और औद्योगिक विकास हुआ फलस्वरूप वे आर्थिक और सैन्य दृष्टी से सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरे ।
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भारत की स्थिति :
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भारत में नेताओं को जनता चुनती है तथा प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायधिशो की नियुक्ति नेता करते है । अधिकारी और न्यायधीश नेताओं की चापलूसी करते है क्योंकि उनके ट्रांसफर, निलम्बन और पदोन्नति का अधिकार नेताओं के पास है । चूंकि भारत के नागरिको के पास अगले पांच वर्ष तक नेताओं को नौकरी से निकालने का अधिकार नही है अत: ये तीनो वर्ग अपने हितो की पूर्ती के लिये आपस में गठजोड़ बना लेते है और करोड़ो नागरिको की स्थिति मूक दर्शक की हो जाती है । जहाँ तक मिडिया का प्रश्न है भारतीय मिडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कंपनियों और मिशनरीज़ द्वारा संचालित है अत: उनके हितो की रक्षा के लिए कार्य करता है ।
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इस प्रकार यह चारो शक्ति पुंज एक दुसरे से गठजोड़ बनाकर अपना हित साधन करते है । ऐसा एक भी कारण मौजूद नही है, जिससे ये वर्ग प्रजा हित के लिए कार्य करने को प्रेरित हो ।भारत में लोकतंत्र के अभाव का दुष्परिणाम यह हुआ कि भारत के सभी क्षेत्रो को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है फलस्वरूप हमारी सेना लगातार कमजोर हो रही है, डॉलर के कर्ज़ में हम गहरे धंस चुके है, गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शोषण लगातार बढ़ रहा है, तकनीक के क्षेत्र में पिछड़ते जा रहे है और समर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता खो चुके है ।
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भारत की तीन मुख्य समस्याएं जो हमारे लिए सबसे अधिक चिंता का विषय होनी चाहिए :
1. भारत की सेना कमजोर है ।
2. भारत की सेना कमजोर है ।
3. भारत की सेना कमजोर है ।
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ज्यादातर को यह लग सकता है कि भारत में भुखमरी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार अधिक गंभीर समस्याएं है, किन्तु वास्तविकता यह है कि ये समस्याएं सेना के मजबूत होने से जुड़ी हुयी है । एक भूखा, भ्रष्ट और क़र्ज़ में डूबा देश अपनी सेना मजबूत नही बना सकता तथा सैन्य रूप से कमजोर देश कभी भी अपनी समृद्धि को कायम नही रख सकता ।
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किसी समय भारत सोने की चिड़िया था लेकिन चूंकि हम उन्नत किस्म के हथियार नही बना पाए नतीजतन गजनी से लेकर ब्रिटिश तक उन सभी ताकतवर सेनाओं ने भारत को लूटा और ग़ुलाम बनाया जिनके पास अपेक्षाकृत आधुनिक हथियार थे । करीब दो हज़ार वर्ष पुरानी यह कमजोरी आज भी ज्यों की त्यों है ।
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ज्यादातर नागरिको की तरह मैं भी इस भ्रम में पड़ा हुआ था कि भारत यदि स्वयं के हथियार नहीं बनाता तो इससे कोई ख़ास फर्क नही आता, क्योंकि युद्ध के दौरान हम अन्य हथियार उत्पादक देशो से इन्हें खरीद/आयात कर सकते है । किन्तु कारगिल युद्ध की सच्चाई और हथियारों में किल स्विच के बारे में जानकारी मिलने से मुझे यह स्पष्ट हो गया कि हम एक सेना विहीन देश चला रहे है, और किसी भी समय गुलाम बनाए जा सकते है ।
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जूरी प्रथा और राईट टू रिकाल की प्रक्रियाओं से परिचय :
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राईट टू रिकाल की अवधारणा से मैं परिचित था किन्तु राईट टू रिकाल ग्रुप के संपर्क में आने से मुझे यह महत्त्वपूर्ण जानकारी मिली कि, राईट टू रिकाल क़ानून भी दो कौड़ी के साबित हो सकते है, यदि रिकाल की प्रक्रिया को कमजोर बना दिया जाए । अत: प्रक्रिया की ड्राफ्टिंग सबसे महत्त्वपूर्ण है ।
रिकालिस्ट राहुल चिमन भाई मेहता लिखित 550 पेज की पुस्तक 'मेनिफेस्टो ऑफ़ रिकालिस्ट्स' पढ़ने पर मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि देश में व्याप्त सभी समस्याओं का समाधान कानूनों में परिवर्तन करके ही किया जा सकता है । यह पुस्तक righttorecall.com/info पर उपलब्ध है । पुस्तक में 120 से अधिक कानूनी ड्राफ्ट्स संकलित है जो कि भारत में व्याप्त सभी समस्याओं जैसे आर्थिक एवं सैन्य पिछड़ेपन, भुखमरी, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा आदि के समाधान प्रस्तुत करते है । 2013 में मैंने देश में व्याप्त समस्याओं के समाधान के लिए नागरिको में इन कानूनों का प्रचार करना शुरू कर दिया था तथापि मुझे एक निर्बल आशा थी कि नरेन्द्र मोदी साहेब जब देश की कमान संभालेंगे तो इन सभी समस्याओं को ख़त्म करने वाले क़ानून अवश्य पास कर देंगे । आखिर पूरा देश उनसे उम्मीद पाले बैठा था ।
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प्रथम ग्रासे...
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शपथ लेने के दो सप्ताह के भीतर ही यह बात खुल गयी की मोदी साहेब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और मिशनरीज के उसी एजेंडे पर और भी तेजी से कार्य कर रहे है, जिस एजेंडे पर राव, वाजपेयी और मनमोहन कर रहे थे । हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान जिस प्रकार बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने अपनी टीवी चेनल्स की फ़ौज को उनके प्रचार में उतारा था उससे यह लगने लगा था कि पर्दे के पीछे समझौता हो चुका है ।
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इतने राष्ट्रवादी व्यक्ति के पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आने के बावजूद बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के सामने इतनी जल्दी समर्पण कर देना यह साफ़ सन्देश देता है कि हमारे सत्ता प्रतिष्ठान में विदेशी धनिक इतनी गहरी पैठ बना चुके है कि किसी भी राजनेतिक दल या नेता से व्यवस्था परिवर्तन की उम्मीद करके हम अपने नेताओं के साथ ज्यादती कर रहे है । बकौल श्री राजिव भाई दीक्षित 'हम सिर्फ अपना ड्राइवर बदल रहे है, जबकि हमे अपनी कार बदलने की आवश्यकता है' ।
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जहाँ तक वर्तमान राजनेतिक दलों के सम्बन्ध में मेरा अभिमत है, मैं इस नतीजे पर हूँ कि, देश की सभी राजनेतिक पार्टियाँ और नेता एक समान है, तथा जूरी प्रथा/राईट टू रिकाल प्रक्रियाओं के अभाव में नवागुंतक राजनेतिक दल और अन्य नेता भी इन्ही की तरह उद्दंड, भ्रष्ट, सत्ता लोलुप और स्वार्थी होंगे ।

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समाधान : कानूनी ड्राफ्ट्स के नेतृत्व में, कार्यकर्ता निर्देशित जनांदोलन ही एक मात्र समाधान ।