Pawan Jury BhilwaraRj
बोल
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(A) यदि आप आरक्षण के विरोधी है तो बीजेपी को वोट करने के लिए ये वाले बयान सुने :
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१) 20 जनवरी, 2017
आरक्षण से समाज में अलगाव पैदा होने का खतरा है। अतः सबको समान अवसर देने के लिए आरक्षण को खत्म किया जाना चाहिए -- मनमोहन वैद्य ( संघ के प्रचार प्रमुख )
http://www.ndtv.com/india-news/just-like-bihar-rss-leaders-take-on-reservation-could-stress-bjp-1651037
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२) 20 सितम्बर, 2015
आरक्षण की नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता है ---- मोहन भागवत ( संघ प्रमुख )
http://www.hindustantimes.com/india/review-reservation-policy-rss-chief-mohan-bhagwat/story-YnAKRgT9zUBXvJCTXsbzdO.html;jsessionid=1A3C8A3E7718BC1CD1CFB42B1E9AB2C5
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३) 8 जून, 2006
"आरक्षण दिए जाने की वर्तमान नीति अनुचित है। आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए" ---- के एस सुदर्शन ( संघ प्रमुख )
http://www.oneindia.com/2006/06/08/rss-chief-flays-caste-based-reservation-1149707017.html
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(B) लेकिन यदि आप आरक्षण के समर्थक है तो ऊपर लिखे गए बयानों को भूल जाए और बीजेपी को वोट करने के लिए निम्नलिखित बयानों को पढ़े :
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१) 7 सितम्बर, 2014
सामाजिक समरसता की प्राप्ति तक आरक्षण जारी रहना चाहिए --- मोहन भागवत ( संघ प्रमुख )
http://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/reservation-is-needed-till-inequality-in-society-rss-chief-mohan-bhagwat/articleshow/41950956.cms?intenttarget=no
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२) 17 दिसंबर, 2015
आरक्षण को समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता --- मोहन भागवत ( संघ प्रमुख )
http://timesofindia.indiatimes.com/india/Mohan-Bhagwat-RSS-feels-theres-no-question-of-scrapping-quota/articleshow/50217490.cms
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३) 30 अक्टूबर, 2015
संघ संविधान के अनुसार दिए जा रहे आरक्षण का समर्थन करता है -- दत्तात्रेय होसबोले ( संघ के महासचिव )
http://timesofindia.indiatimes.com/india/RSS-for-reservation-as-mandated-by-Constitution/articleshow/49598856.cms
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बीजेपी के नेता अधिकृत रूप से "पूछे जाने पर" हमेशा आरक्षण का समर्थन करते है। पर वे चलाकर इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहते, वे तब ही इस पर मुँह खोलेंगे जब आप उन्हें झिंझोड़ोगे।
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मोदी साहेब ने लोकसभा चुनाव जीत जाने से पहले कभी भी इस मुद्दे पर अपना एकनिष्ठ रूख नहीं रखा। वे हमेशा अपनी भाव भंगिमाओ और भाषणों से इस तरह के संकेत देते रहे जिससे यह सन्देश जाए कि वे आरक्षण को पसंद नहीं करते। लेकिन चुनाव जीतने के साथ ही उन्होंने आरक्षण का समर्थन करने का कठोर रूख अख्तियार कर लिया।
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नीति यह है कि संघ आरक्षण का विरोध प्रतीत करने वाला बयान देंगे और आरक्षण विरोधी अगड़ी जाति के युवाओ को अपने साथ चिपका लेंगे। तब बीजेपी का कोई नेता सामने आएगा और आरक्षण को जारी रखने की वकालत कर देगा। वक्त निकलने पर संघ फिर से पल्टी खा जाएगा और आरक्षण समर्थक हो जाएगा। यह सर्कस ये लोग पिछले 25 सालो से चला रहे है। इस तरह समर्थन और विरोध का धुँवा फैलाकर ये समर्थको और विरोधियो दोनों के वोट बटोरते रहते है। इस तरह ये धूर्त नेता अपने फायदे के लिए सालो सालो तक समस्याओ पर तब्सरा करके इन्हें विकराल बनाते रहते है।
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बीजेपी और संघ के कार्यकर्ता भी कम मक्कार नहीं है। वे अपने नेताओ के बयानों को कॉपी-पेस्ट करके अपने पास रखते है, ताकि वक़्त जरुरत काम आ सके। जब वे आरक्षण समर्थको से बात करते है तो अपने झोले में से बीजेपी नेताओ के बयान निकाल कर दिखाते है, और आरक्षण समर्थको को संघ के नेताओ के बयानो से खुश कर देते है।
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बीजेपी और संघ के शीर्ष नेताओ द्वारा आरक्षण का यह निकाला गया बेहतरीन समाधान है। हर कोई खुश !!!
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आरक्षण के मामले में सपा, बसपा, आपा, भाकपा, माकपा, कोंग्रेस आदि पार्टियों की नीति में कपट नहीं है। उनका इस मामले में रूख साफ़ है। ये सभी मौजूद व्यवस्था का समर्थन करते है। और ये लोग अपने रूख को छुपाते भी नहीं। लेकिन संघ/बीजेपी पहले यह भुलावा देती है कि वह मौजूद व्यवस्था के खिलाफ है, लेकिन वे कभी भी इसे बदलने की जहमत नहीं उठाते।
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वैसे कायदा यह है कि हमें नेताओ के बयान सुनने ही नहीं चाहिए। वोट लेने के लिए इनके मुहँ में जब जो आता है वक्त देखकर बकते रहते है। इनकी इस बकैती से वास्तविक बदलाव नहीं आ सकता। बदलाव कानूनों के बदलने से ही आता है। वीपी सिंह ने जब आरक्षण लागू किया तो उन्होंने कोई बयान नहीं दिया था। चुप से क़ानून बनाकर गेजेट में छपवा दिया और गेजेट में छपने से देश में आरक्षण लागू हो गया।
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समाधान ?
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आरक्षण के समाधान हेतु मैं निम्न लिखित कानूनी ड्राफ्ट्स का समर्थन करता हूँ। मेरा मानना है कि अमुक कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करके आरक्षण की समस्या को लगभग पूरी तरह से हल किया जा सकता है।
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1. आरक्षित वर्ग के लिए आर्थिक विकल्प चुनने की प्रक्रिया होने से दलितों की सहमति से आरक्षण को ५०% से घटकर ५% तक किया जा सकता है। इसकी प्रक्रिया का प्रस्तावित ड्राफ्ट यहां देखा जा सकता है :
https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/760514727400099
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2. प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट उन उप जातियों को दिए जा रहे आरक्षण लाभो पर रोक लगाने से सम्बंधित है, जिन उप जातियों को सरकारी नौकरियों में उनकी जनसँख्या अनुपात से अधिक प्रतिनिधित्व मिल चुका है :
https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/805624222889149
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3. आरक्षण के वर्तमान प्रावधानों से दलित वर्ग के अति पिछड़े वर्ग को प्रयाप्त लाभ नही मिल पा रहा है, जबकि संपन्न वर्ग (क्रीमीलेयर) आरक्षण के लाभों का ज्यादा उपयोग कर रहा है। अत: SC/ST/OBC वर्ग में जो व्यक्ति संपन्न हो चुके है, उनके लाभों को घटाकर उसी वर्ग के शेष पिछड़े हुए व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए।
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उदाहरण के लिए ST वर्ग में 10 उप जातियां जैसे भील तथा मीणा शामिल है । यदि ST वर्ग में भीलो की आबादी 50% तथा मीणा की आबादी 30% है तो भीलो को भी इसी अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए । किन्तु यदि ST वर्ग में आरक्षण का लाभ लेकर मीणा जाति ने 60% प्रतिनिधित्व प्राप्त कर लिया है तो इसका दुष्प्रभाव यह होगा कि ST वर्ग की अन्य जातियां पिछड़ी हुयी ही रहेगी, जबकि पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त कर चुकी जातियों का प्रतिनिधित्व बढ़ता जाएगा। इसका दुष्परिणाम यह होगा कि दशको तक आरक्षण लागू रखने पर भी अधिकतम दलित जातियां पिछड़ी हुयी ही रहेगी, और आरक्षण को जारी रखने की मांग निरंतर बनी रहेगी।
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प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट यहां देखा जा सकता है :
https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/761243917327180
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