Pawan Jury BhilwaraRj
30 नवम्बर 2010, भिलाई, छत्तीसगढ़ में महात्मा राजीव दीक्षित की रहस्यमयी परिस्थितियों में हत्या कर दी गयी। उनकी हत्या के लिए जिम्मेदार लोगो को चिन्हित करने और दोषियों को सजा दिलवाने के सम्बन्ध में :
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यदि मौजूदा व्यवस्था के तहत नियुक्त अधिकारी जांच करेंगे तो वे प्राप्त सबूतों को दबा देंगे और आरोपियों से घूस खाकर मामला कमजोर बना देंगे। इसीलिए निष्पक्ष जांच के लिए यह जरुरी है कि ऐसे जाँच अधिकारी को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के पास रहे। इससे वह ईमानदारी से जांच करेगा या अपनी नौकरी गवाँयेगा। राईट टू रिकॉल पुलिस अधिकारी का क़ानून लागू करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि जांच अधिकारी निष्पक्ष रूप से कार्य करेगा।
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यदि जांच अधिकारी ईमानदार पाया जाता है और सबूत इकट्ठे करके अदालत में प्रस्तुत करता है तो, जज आरोपियों से पैसे खाकर मुकदमे को वर्षो तक लटकाये रखेगा और अंत में मामले को रफा दफा कर देगा।
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समाधान :
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१) छत्तीसगढ़ राज्य की मतदाता सूचियों में से रेंडमली 500 नागरिको की ज्यूरी का गठन किया जाए, तथा इस ज्यूरी को संदिग्ध व्यक्तियों का नार्को टेस्ट लेने का अधिकार हो।
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२) इस मामले की तहकीकात के लिए राईट टू रिकॉल जांच अधिकारी की नियुक्ति की जाए।
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चूंकि मामला 6 पुराना है, अतः भौतिक सबूतों को प्राप्त करने की संभावनाएं लगभग शून्य है। सबूत बरामद करने के लिए यह निहायत ही जरुरी है कि संदिग्धों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया जाए।
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पब्लिक में नार्को टेस्ट के लिए कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/812341812217390
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राईट टू रिकाल जिला पुलिस प्रमुख के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/668820996629431
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल और उनके सभी अंध भगत राजीव भाई की हत्या के संदिग्धों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने का विरोध कर रहे है।
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विडम्बना है कि, राजिव भाई का चित्र अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल पर चस्पां करने वाले उनके ढेर सारे समर्थक भी राजिव भाई के हत्यारो का नार्को टेस्ट लेने का विरोध कर रहे है !!! आखिर वे ऐसा क्यों कर रहे है ? क्योंकि वे अब मोदी साहेब के अंध भगत और बीजेपी के वोटर है। और चूंकि मोदी साहेब नार्को टेस्ट के क़ानून का विरोध करते है, इसीलिए इनके पास नार्को टेस्ट का विरोध करने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा है।
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यदि आप राजिव भाई के हत्यारो को सजा दिलवाना चाहते है तो अपने सांसद को निर्देश भेजे कि इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित किया जाए।
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