Pawan Jury BhilwaraRj

मोहन भागवत उवाच
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संघ प्रमुख भागवत ने अपने अंध सेवकों से एक "नयी" चीज़ कही है -- "यदि देश में अच्छे क़ानून लागू नही हो रहे तो, इसका दोषारोपण मोदी साहेब पर करना उचित नही है । क्योंकि क़ानून तो संसद बनाती है" !!!
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१) राईट टू रिकॉल ग्रुप पिछले १० वर्षों से नागरिकों को समझा रहा है कि, आप जिन भी कानूनो का समर्थन करते है उनको गेजेट में प्रकाशित करने के आदेश सीधे अपने सांसदों को भेजे, न कि प्रधानमंत्री को । लेकिन संघ के अंध सेवकों ने हमेशा सांसदों को आदेश भेजने का विरोध किया । इसके उलट वे नागरिकों में यह भ्रम फैलाते रहे कि, कोई क़ानून, सांसद, संसद आदि के चक्कर में जाने की ज़रूरत नही है । सिर्फ़ मोदी साहेब के पी एम बनते ही सब ठीक हो जाएगा !! तो इस तरह पहले संघ ने नागरिकों के वोट खींचने के लिए इस बात का प्रचार किया कि, "बस तुम एक दफ़ा मोदी साहेब को पी एम बनाओ, फिर देखो वे सब समस्याओं का निपटारा कैसे चुटकी बजाकर कर देते है", और अब सत्ता में आने के बाद मोदी साहेब को बचाने के लिए वे संसद का बहाना बना रहे है ।
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२) भागवत ने अपने अंध सेवकों को यह भी नही बताया कि, देश की विभिन्न समस्याओं जैसे -- अशिक्षा, ग़रीबी, महँगाई, बेरोज़गारी, काला धन, राम मंदिर निर्माण, गौ रक्षा आदि के समाधान के लिए आवश्यक क़ानूनी ड्राफ़्ट्स को प्रधानमंत्री सीधे गेजेट में प्रकाशित करके देश में लागू कर सकते है । इसके लिए इन्हें संसद से पास करने की कोई आवश्यकता नही है ।
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लेकिन संघ के अंध सेवक तब तक इस बात को मानेंगे नही जब तक कि ये शब्द स्वयं मोहन भागवत के श्री मुख से न निकले !!
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