Pawan Jury BhilwaraRj

मेरे पास सिर्फ एक वजह है कि मैं विमुद्रीकरण का समर्थन करता हूँ --- "यह प्रक्रिया भारत के करोडो नागरिको को ऐसे दर्जनों सबक सिखाएगी, जो सबक वे सिर्फ सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अभक्तो को सुन कर ही सीख सकते थे।
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वरना, यह फैसला घरेलू उत्पादन के ठप होने के कारण देश के लिए विनाशकारी साबित होगा। इस पूरी कवायद से हमें कुछ भी हासिल नहीं होगा। न तो रिजर्व बैंक को न ही आयकर विभाग को। असल में इस फैसले ने हमें गहरे गड्ढे में धकेल दिया है।
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अन एकाउंटेड कैश को कम करने का सर्वश्रेष्ठ और निरापद तरीका यह है कि :
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(a) "जमीनों की क्रमिक रूप से नीलामी" के कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाए । उदहारण के लिए यदि X, A से कोई जमीन खरीदता है और इसके लिए आधिकारिक रूप से P राशि का भुगतान करता है, और यदि 30 दिनों के भीतर Y इसी भूमि के लिए 15% ज्यादा राशि देने का प्रस्ताव करता है तो भारत सरकार यह भूमि Y को हस्तांतरित कर देगी और X को 1.5 * P राशि का भुगतान करेगी।
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(b) इसके अलावा देश के सभी भू स्वामियों के नाम सार्वजनिक वेबसाईट पर रखे जाए तथा इनकी डीवीडी बिक्री के लिए उपलब्ध कराई जाए।
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(c) सभी प्रकार के अप्रत्यक्ष कर जैसे एक्साईज, जीएसटी, वैट, सेवा आदि करो को हटाकर संपत्ति कर (संपत्ति कर में से आयकर को घटाते हुए ) लगाया जाए, व आयकर का पुनर्गठन किया जाए।
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इन उपायों को लागू करने से वास्तविक अर्थो में काले धन में कमी आएगी।
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लेकिन इन कानूनों को लागू करने की जगह मोदी साहेब और उनके अंध भगतो का सुझाव है कि, काले धन को ख़त्म करने के लिए 1000/500 के नोटों को एकदम से बंद करके नए 2000 के नोट ले आने चाहिए !!!
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देश के 65% ट्रको के पहिये रुक गए है, खाद्य व दवाइयों जैसी आवश्यक जिंसो को छोड़कर शेष फुटकर कारोबार सुन्न हो गया है, कारखानों में उत्पादन सबसे निचले स्तर पर है, और कई उत्पादन इकाईयो को उत्पादन के नए ऑर्डर नहीं मिल रहे है।
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सोने का कारोबार उफान पर है, और देश का कामगार तबका धनिको के रुपयों को कुछ अतिरिक्त कमीशन पर बदलवाने के लिए कतार बाँध कर खड़ा है !!! यह उत्पादकता है !!!
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कई काले धन जमा करने वाले जैसे डॉक्टर्स, कारखाना मालिक, दुकानदार आदि समाज में उत्पादक योगदान देते है, जबकि सेज धारक और ट्रस्ट्स जिन्होंने भारी मात्रा में जमीने रोक कर रखी है, अर्थव्यवस्था पर बोझ बढाते है। मोदी साहेब के फैसले से उत्पादक वर्ग को गंभीर क्षति हुई है, जबकि भू माफियाओ को इस फैसले ने कोई नुकसान नहीं पहुँचाया, और ये भू माफिया हानि उठाने वाले उत्पादक वर्ग पर हंस रहे है।
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इस फैसले के दीर्घकालिक नुकसान
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(a) भ्रष्ट, अपराधी और कर चोर अब अपने काले धन का निवेश नकद की जगह सोने में करेंगे। इससे सोने का आयात व तस्करी बढ़ेगी और नतीजे में हम पर विदेशी मुद्रा का बोझ पड़ेगा। काफी विश्वसनीय अफवाह है कि, 2000 के नोट अप्रेल-2017 में फिर से बंद कर दिए जायेंगे, और इसीलिए जमाखोर 2000 के नोटों को जमा नहीं कर रहे है !!!
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(b) भ्रष्टाचार में 1% की भी कमी नहीं आएगी। अगर मोदी साहेब के अंध भगत यह सोचते है कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार में कमी आएगी, तो इसमें कोई संदेह ही नहीं है कि वे बहुत भारी मात्रा में कोकीन का सेवन कर रहे है।
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(c) जनवरी-2017 में जमीनों की कीमते गिरने से विदेशी वर्ग बड़े पैमाने पर जमीन खरीद सकेगा और जनवरी-2018 में वे इन्हें बेचकर भारी कर मुक्त मुनाफा कमाएंगे ( मोरिशस की कम्पनियों के मुनाफे पर कर की दर 7% जबकि फिजी की कम्पनियों पर कर 0% है )।
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इस तरह से नोटबंदी देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर दूरगामी नुकसान पहुंचाएगी !!!
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तो क्या मुझे नोटबंदी का समर्थन/विरोध करना चाहिए ?
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नुकसान हो चुका है। फैसले को वापिस लेने से अब सोने की जमाखोरी को रोका नहीं जा सकेगा।
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