Pawan Jury BhilwaraRj

प्रश्न : "कभी आप अखबार को पेड कहते हो और कभी अखबार का ही लिंक दे देते हो। मेरा मतलब ये है कि खबर भी तो झुठी हो सकती है। जैसे की पेड मीडिया की अन्य खबरे" ?
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स्पष्टीकरण : सरकार जो बयान या प्रेस रिलीज जारी करती है, वह अधिकृत सूचना है। इसे नागिरको तक पहुँचाना मिडिया का काम है। मिडिया सरकार के अधिकृत बयान में हेरफेर नहीं करता। कर भी नहीं सकता। लेकिन किसी फैसले या बयान का "अर्थ" निकालने का मिडिया पैसा लेता है। जो भी पेड मिडिया को पेमेंट करेगा पेड मिडिया उसके मन मुताबिक़ "अर्थ" निकाल कर जनता को बताएगा।
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उदाहरण के लिए सेना ने कहा कि, "भारत ने सीमा से सटे आतंकी केम्पस पर सर्जिकल स्ट्राइक की, जिसमे कई आतंकी हताहत हुए"। यह अधिकृत बयान है।
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यदि पेड मिडिया को पेमेंट की जाए तो वे इस बयान का यह अर्थ निकाल सकते है कि, "भारत के 100-125 जवान पाकिस्तान की सीमा में घुसकर 40-50 आतंकियों को मार कर लौट आये"। यह "अर्थ निकालना" पेड न्यूज है। उन्होंने यह अर्थ निकाला और पूरे देश को दिखाया भी। किसी पक्ष के वक्तव्य को जस का तस रखना सूचना देना है। अधिकृत सूचना दूध है, मिडिया पेमेंट मिलने पर इसमें बादाम, बर्फ, शक्कर, काली मिर्च, और विशेष तौर पर भांग व धतूरे के बीज आदि मिलाकर ठंडाई तैयार करके जनता को परोसता है। जनता इसे पीकर नशे में झूमती है।
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तो विवेकी नागरिको को चाहिए कि वे, इस नशीले पेय का सेवन करने से बचे।
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जब हम कोई लिंक देते है तो आप उस लिंक में दर्ज सिर्फ अधिकृत बयान को ही देखें। जो कि एक सूचना है। अन्य विवरणों की अवहेलना करे, क्योंकि वे उनके द्वारा निकाले गए अर्थ है।
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