Pawan Jury BhilwaraRj
किस वजह से अक्षय कुमार ने इस तथ्य को "छिपाया" या यूँ कहे कि उन्होंने इस बात तो स्पष्ट रूप से जाहिर नहीं किया कि, वे कनाड़ा की नागरिकता ले चुके है ?
.
कोई व्यक्ति इतनी आसानी से अपनी नागरिकता में परिवर्तन की सूचना को छिपा नहीं सकता। इसीलिए यह बात "सार्वजनिक" जानकारी में थी कि अक्षय कुमार कई वर्षो पहले ही भारत की नागरिकता छोड़ कर कनाड़ा की नागरिकता ग्रहण कर चुके है। खबरों के कुछ लिंक कहते है कि अक्षय कुमार ने कनाडा की नागरिकता 2009 में ही ले ली थी। हालांकि मुझे अब तक यह जानकारी नहीं हो सकी है कि उन्होंने किस वर्ष में कनाड़ा की नागरिकता ली थी। तो तकनिकी रूप से अक्षय कुमार ने इस तथ्य को छुपाया नहीं है। लेकिन यह भी सच है कि अक्षय कुमार ने कभी भी इस आशय की कोई जानकारी अपने प्रशंसको को नहीं दी, जिससे यह साफ़ हो सके कि वे कनाडा के नागरिक है। उदाहरण के लिए जब भी वे दान देते है तो इस दान की 5 गुना राशि का भुगतान पेड मिडिया कर्मियों को करते है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके द्वारा दिए गए दान को ख़ासा प्रचार मिले। लेकिन इस तरह से उन्होंने कभी अपनी नागरिकता के बारे में सूचना देने के लिए लोड नहीं लिया।
.
क्यों ?
.
क्योंकि यदि यह जानकारी 7 वर्ष पहले ही सार्वजनिक हो जाती तो कई राष्ट्रवादी अक्षय कुमार के प्रशंसक या अंध भगत बनने से परहेज करने लगते थे।
.
.लेकिन अब तो भैंसे खेत चर चुकी है !! तो अब ये अंध भगत यह तर्क देने के लिए विवश है कि, "अरे यार आप भी हद करते है। इससे क्या फर्क पड़ता है कि, अक्षय भाईसाब ने कनाड़ा की नागरिकता ले ली है या भारत की छोड़ दी है ? और इसी तरह की ढेर सारी समझदारी की बातें।
.
.
शराब बोतल में रखी हुयी नशा नहीं चढ़ाती। इसके लिए इसे हलक से नीचे उड़ेलना होता है। तो यदि ये राष्ट्रवादी यह बात पहले से जानते होते कि ये आदमी प्रवासी है और भारत में अपने धंधे के लिए टिका हुआ है तो वे अक्षय की भक्ति के लपेट में कभी नहीं आते थे।
.
दुसरे शब्दों में, इस जानकारी के पहले जाहिर हो जाने से अक्षय द्वारा नये "प्रशंसक बनाने" की गति में भारी गिरावट आ सकती थी।
.
इस बात का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि, आमिर, शाहरुख़ या सलमान खान ने यदि अमेरिका की नागरिकता ले ली होती तो कथित हिन्दूवादियों द्वारा किस दर्जे का बवंडर खड़ा किया जाता। पर अक्षय के कुमार होने से ये सभी खामोश बने हुए है।
.
बहरहाल, जहां तक नागरिकता लेने और छोड़ने की बात है, मैं कहूँगा कि -- आफ्टर आल बिजनेस इज बिजनेस। मतलब, कारोबार की तरफ पहले देखना पड़ता है। और नाना पाटेकर जैसे कुछ अभिनेताओं को छोड़कर लगभग सभी अभिनेता कारोबारी है। अत: इस प्रकरण में भी दोषी प्रशंसक है -- उन्हें इस बात को समझना बहुत जरुरी है कि एक दुनिया फ़िल्मी है और एक वास्तविक। और वास्तविक दुनिया का परदे पर चल रही फ़िल्मी दुनिया से कोई लेना देना नहीं होता। इसीलिए, नाना पाटेकर ने कुछ ही दिन पहले मिडिया कर्मियों से कहा था कि, "आप लोग हम कलाकार द्वारा दिए गए वक्तव्यों को जरुरत से ज्यादा महत्त्व देते हो"।
.
अक्षय कुमार की नागरिकता के इस प्रकरण से हमें सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे ऊँचे कद के नेताओं द्वारा प्रचुर मात्रा में दिए जा रहे भाषणों के बारे में भी पुनर्विचार करने का सबक मिलता है। इसीलिए मेरा सभी कार्यकर्ताओ से यह आग्रह है कि, वे इस बात पर ध्यान दे कि जिस तरह अक्षय कुमार की असली और परदे की जिन्दगी का आपस में कोई लेना देना नहीं है उसी तरह से नेताओं द्वारा दिए जा रहे भाषणों और उनके द्वारा लागू किये जा रहे कानूनों में भी पर्याप्त विरोधाभास है।
.
इसीलिए सतर्क नागरिको को चाहिए कि वे फ़िल्मी दुनिया, भाषणों और वास्तविक दुनिया के बीच अंतर करने में भ्रमित न हो।
.
__________________________