Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब के अंधभगत अब इस तरह का प्रचार अभियान चला रहे है जिससे देश में व्याप्त समस्याओ का दोष 'जनता' के सिर डाल कर अपने प्रभु को बचाया जा सके।
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उदाहरण के लिए :
१. चीनी उत्पादों का बहिष्कार करो लेकिन मोदी साहेब से यह उम्मीद मत करो कि वे चीनी वस्तुओ के आयात पर प्रतिबन्ध लगाए या उन कानूनों को लागू करे जिससे भारत के स्वदेशी कारखानों की कार्यकुशलता में सुधार हो !!!
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२. स्वच्छ भारत अभियान के तहत इस तरह का प्रोपेगेंडा खड़ा करो जिससे अस्वच्छ सड़को के दोषी आम भारतीय नजर आये !!!
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३. मोदी साहेब से ये ना कहो कि, उन्हें पुलिस प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए आवश्यक कानूनों को लागू करना चाहिए। असल में ये जनता है, जो घूस दे देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है !!!
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कुछ 3 वर्ष पहले की बात है। मैंने एक मोदी-अंधभगत द्वारा शेयर किया गया वीडियो देखा था। वीडियो में ट्रेफिक पुलिस का भ्रष्टाचार दर्शाते हुए इसका दोष कोंग्रेस के 60 वर्षीय शासन के माथे रखा गया था। अब मोदी साहेब का वही अंधभक्त जो वीडियो फैला रहा है, वह यह दर्शाता है कि "ट्रेफिक पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार की दोषी जनता है" --- क्योंकि "तुम" गलीज लोगो ने अब तक पुलिस को घूस देना बंद नहीं किया है !!! यदि तुम घूस देना बंद कर दो ट्रेफिक पुलिस का भ्रष्टाचार एक दिन में ही ख़त्म हो जाएगा !!!
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दुसरे शब्दों में, 3 साल पहले भ्रष्टाचार की दोषी कोंग्रेस थी, लेकिन मोदी साहेब के सत्ता में आते ही यह दोष "जनता" के मत्थे आ गया है !!!
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इसी तरह से, तब एक वीडियो जो अस्वछता समेत देश की कई समस्याओं की व्याख्या करते हुए इसका दोषी कोंग्रेस शासन को ठहरा रहा था, अब उस वीडियो द्वारा प्रतिस्थपित हो गया है, जो यह कहता है कि -- तुम (यानि आप, मैं और जनता) लोगो को स्वच्छता का शउर नहीं है। तुमने देश की सभी गलियों, सडको, नालियों और बस, ट्रेन आदि में कूड़ा फेंक फेंक कर देश को कूड़ेदान बना दिया है" !!! अच्छी बात है, लेकिन यदि बसें और ट्रेने बाहर से भी जो गन्दी है, उसका क्या ? क्या मोदी-अन्धभगत अब नागरिको से यह उम्मीद कर रहे है कि --- हम अपने साथ कॉलिन और पोछा साथ लेकर घूमे ताकि बस/ट्रेन से उतरते समय उन्हें बाहर से साफ करते हुए निकले !!!
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और अब ये मदारी अपने झोले में से नया पैंतरा "चीनी उत्पादों का बहिष्कार" निकाल कर लाये है। मोदी भगतो से यह पूछिए कि, भारत में श्रम सस्ता होने के बावजूद क्या कारण है कि, उत्पादन लागत 50% से 100% तक ज्यादा आ रही है ? कारखानों में उत्पादन लागत बढ़ाने में जमीनों की कीमतों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। तो चीन में भूमि व भूमि-किराया बेहद कम है जबकि भारत में इसके दाम आसमान क्यों छु रहे है ? क्यों ? --- क्योंकि सोनिया-मोदी-केजरीवाल भू-माफियाओ पर आश्रित है और इसीलिए उन्होंने जमीनों के लेनदेन में व्याप्त काले धन के इस्तेमाल में कमी लाने के लिए आवश्यक कानूनों को लागू करने से मना कर दिया है। चीन में श्रमिक-स्वामी विवादों का निपटान होने में औसतन 1 महीना जबकि भारत में 3 वर्ष क्यों लगते है ? क्यों ? --- क्योंकि सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने श्रम कानूनों और श्रम अदालतों में सुधार लाने वाले कानूनों को लागू करने से इंकार कर दिया है। और इसके अलावा चीन के श्रम विभाग और औद्योगिक अदालतों में भारत की तुलना में बेहद कम भ्रष्टाचार है (हालांकि तब भी चीन में यह भ्रष्टाचार अमेरिका की तुलना में बेहद ज्यादा है)। क्यों ? कारण वही है -- क्योंकि, सोनिया-मोदी-केजरीवाल इस स्थिति में कोई सुधार नहीं चाहते !! और इसीलिए चीनी उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते है तथा कई वस्तुएं तो ऐसी है जिनका उत्पादन भारत करता ही नहीं। तो इन हालात में मोदी साहेब से यह कहने कि बजाय कि, उन्हें भारत की इकाइयों की कार्यकुशलता सुधारने के लिए आवश्यक कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करना चाहिए, मोदी अंध भगतो ने जनता को कोसना शुरू कर दिया है, "देखो द्रोहियों, ये तुम लोग हो जो चीनी सामान खरीद कर दुश्मन देश को सहायता पहुंचा रहे हो" !! ठीक है। लेकिन हमें श्राप देने की जगह तुम मोदी साहेब को ट्विट करके यह क्यों नहीं पूछते कि, "वे चीनी वस्तुओ के आयात पर प्रतिबन्ध लगाने या चीनी सामान पर आयात शुल्क बढाने का फैसला क्यों नहीं ले रहे है" ? क्यों, ऐसा ट्विट करने से क्या तुम्हारे अंगूठे में सूजन आ जाती है !! ?
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इसका जवाब कोई मुश्किल नहीं है कि, आखिर क्यों मोदी साहेब के अंध भगत अपने प्रभु से सार्वजनिक रूप से यह नहीं कह रहे है कि वे चीनी वस्तुओ के आयात पर प्रतिबन्ध लागू करे। उन्हें पता है कि, बीजेपी के ज्यादातर नेताओ के गठजोड़ उन कम्पनियों से है जो इन चीनी वस्तुओ को भारत में बेचने का कारोबार करती है। इसीलिए मोदी साहेब चीनी वस्तुओ के आयात पर कोई प्रतिबन्ध नहीं लाने वाले। तो ऐसे में यदि वे मोदी साहेब से ऐसी मांग करते है तो इनका व इनके प्रभु दोनों का जनता के सामने पानी उतर जाएगा। निदान, उन्होंने तरीका यह निकाला है कि, "जनता से चीनी वस्तुओ का बहिष्कार करने को कहा जाए। इससे चीनी वस्तुओ की खपत की जिम्मेदारी जनता के सिर आ जायेगी और वे मोदी साहेब को इस झमेले से सुरक्षित निकाल ले जायेंगे"।
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कुल मिलाकर मोदी अंध भगत अब काइयांपंथी पर उतर आये है। वे अपने प्रभु की भक्ति में जितना ही ऊपर उठ रहे है, देश हित की अनदेखी करने में उतना ही निचे गिरते जा रहे है। इन अंध भगतो को अमेरिका का शुक्रिया अदा करना चाहिए, जिन्होंने भारत को सीमा से सटे केम्पस पर कार्यवाही करने की अनुमति दी (इस बात पर यकीन करते हुए कि, "अमेरिका सैन्य हलचल के बारे में अपने सेटेलाईट और भारतीय विभागों में घुसे अपने एजेंटो से प्राप्त की गयी सूचनाये पाकिस्तान से साझा नहीं करेगा)। तो इस वजह से और भारतीय पेड मिडिया द्वारा इस राई को पहाड़ करके दिखाने की वजह से मोदी अंध भगतो के पास अब कुछ है, जिस पर वे अपने गाल बजा सकते है। पर इसके अलावा उनके पास मोदी साहेब का जनाधार बचाए रखने की कोई जुगत नहीं है। उनकी सीधी साधी योजना यही है कि, मोदी साहेब से देश में व्याप्त समस्याओं का समाधान करने के लिए आवश्यक कानूनों को लागू करने के लिए कहने की जगह, इन समस्याओं का ठीकरा जनता के ही सिर पर फोड़ दिया जाये।
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समाधान ?
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पहला काम --- समाधान पर काम करने की जगह उलटे जनता को ही दोष दे देने वाले इन मोदी अंध भगतो से किनारा कर लेना चाहिए। यदि आपने इनसे किनारा नहीं किया तो ये आपसे चिपके रहेंगे और ऐसे ही उट पटांग तरीके सुझा सुझा कर आपकी उर्जा और समय चूसते रहेंगे। इससे आप इस बकवाद में उलझ जायेंगे और अपनी उर्जा समाधान पर नहीं लगा सकेंगे। इनके बेतुके फार्मूलो पर समय नष्ट करने की जगह हमें राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स, टी सी पी आदि जैसे कानूनों को लागू करवाने का प्रयास करना चाहिए, जिससे भारत में स्वदेशी इकाइयों की कार्यकुशलता में सुधार हो।
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