Pawan Jury BhilwaraRj
वाराणसी के साधु, राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ नागरिक श्री "विनय जी झा" ने राईट टू रिकॉल कानूनो की व्यावहारिकता एवं राईट टू रिकॉल ग्रुप की मंशा पर टिप्पणी की है । प्रस्तुत लेख में उनकी आपत्तियों एवं शंकाओ पर प्रतिक्रिया रखी गयी है ।
( विनय जी झा द्वारा लिखे गए मूल लेख का लिंक इसी स्तम्भ के अंतिम पेरेग्राफ में दर्ज किया गया है )
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उद्धरण
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विनय जी झा का कहना है : "Right to Recall" सभी जनप्रतिनिधियों के लिए होना चाहिए, यह राजीव दीक्षित जी का विचार था"
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स्पष्टिकरण : हाँ । राईट टू रिकॉल की आवश्यकता पर सबसे पहले महर्षि दयानंद सरस्वती ने बल दिया था । राजनैतिक रूप से इन क़ानूनो की माँग सबसे पहले महात्मा भगत सिंह, महात्मा चंद्रशेखर आज़ाद एवं महात्मा सचीन्द्र नाथ सान्याल ने की थी । राजीव भाई दीक्षित भी इन कानूनो के प्रबल समर्थक थे ।
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विनय जी झा का आरोप है : "किन्तु उनका नाम बेचकर कुछ मोदी-विरोधियों ने Right to Recall नाम से एक फर्जी अभियान छेड़ रखा है जिसका उद्देश्य केवल प्रधानमन्त्री को हटाना है"
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स्पष्टिकरण : राईट टू रिकॉल ग्रुप सिर्फ़ मोदी विरोधी नही है । हम केजरीवाल, सोनिया, मुलायम, नीतीश आदि को शामिल करते हुए उन सभी नेताओं, पार्टियों, संगठनो, बुद्धिजीवियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के कट्टर विरोधी है जो देश के आम नागरिकों को अपने जन प्रतिनिधियों को नौकरी से निकालने का अधिकार अर्थात राईट टू रिकॉल नही देना चाहते ।
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हमारा उद्देश्य प्रधानमंत्री को हटाना नही है । हमारा उद्देश्य ऐसी प्रक्रिया को लागू करवाना है जिससे यदि देश के 84 करोड़ मतदाता चाहे तो बहुमत का प्रयोग करके पी एम को नौकरी से निकाल सके । और यह माँग हम पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, जज, सांसद, विधायक, मुख्यमंत्री समेत ६५ पदों के लिए कर रहे है ।
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विनय जी झा का कहना है : "इन "विद्वानों" को इतना भी पता नहीं है कि भारत में प्रधानमन्त्री का चुनाव जनता नहीं करती, अतः Right to Recall लागू भी हो जाए तो जनता के मतदान द्वारा जो चुने जाते हैं केवल उनको ही जनता द्वारा हटाया जा सकेगा | यदि प्रधानमन्त्री को समर्थन देने वाले बहुत से सांसदों को जनता ने वापस बुला लिया (जो कि लगभग असम्भव है) तभी प्रधानमन्त्री हट सकेंगे"
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स्पष्टिकरण : हममें विद्वता नही है । किंतु हमें यह जानकारी है कि भारत में पी एम को सीधे जनता नही चुनती । पी एम को सांसद चुनते है । लेकिन हमने जो प्रक्रिया दी है, उसके गेजेट में आने से देश के मतदाता पी एम उम्मीदवार को सीधे 'अनुमोदित' भी कर सकेंगे और अस्वीकृत भी कर सकेंगे । ख़ूबसूरत पहलू यह है कि, हमने जो ड्राफ़्ट प्रस्तावित किये है उन्हें लागू करने के लिए किसी प्रकार के संविधान संशोधन की आवश्यकता नही है । सिर्फ़ गेजेट में प्रकाशित करने से ही इन्हें देश में लागू किया जा सकता है ।
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विनय जी झा का कहना है : "सिद्धान्ततः मैं RTR का समर्थक हूँ, बशर्ते इसका सही इस्तेमाल हो, ताकि भ्रष्ट और निकम्मे जनप्रतिनिधियों को हटाया जा सके और अच्छे जनप्रतिनिधियों को बेवजह या राजनैतिक कारणों से परेशान नहीं किया जा सके |"
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स्पष्टिकरण : सैद्धांतिक रूप से समर्थन और व्यवहारिक रूप से विरोध करना कुछ ऐसा ही है, जैसे कोई व्यक्ति मौखिक रूप से नशे का विरोध करे किंतु व्यवहार में नशे का सेवन करे । उदाहरण के लिए नीतीश कुमार, प्रशांत भूषण, अन्ना, अरविंद केजरीवाल, वी के सिंह, वरुण गांधी, आदि भी राईट टू रिकॉल के सैद्धांतिक समर्थक है । किंतु ये सभी राईट टू रिकॉल को व्यवहार में लाने यानी कि इन कानूनो को लागू करने का विरोध करते है । यदि किसी विषय को सिर्फ़ सैद्धांतिक समर्थन दिया जाए किंतु व्यवहार में लाने का विरोध किया जाए तो ऐसे समर्थन के कोई मायने नही है । वस्तुतः यह छद्म समर्थन का परिष्कृत रूपांतरण है ।
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विनय जी झा का कहना है : "किन्तु RTR आन्दोलन में जिस किस्म के लोग घुसे हुए हैं उन्हें देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि RTR यदि लागू हो गया तो इसका केवल दुरुपयोग ही होगा, अतः मैं आरम्भ से ही RTR वालों को देखते ही ब्लॉक करता रहा हूँ"
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राईट टू रिकॉल ग्रुप अपंजिकृत समूह है । इसमें जुड़ने जोड़ने या निष्कासित करने की कोई प्रक्रिया मौजूद नही है । अतः कोई भी इसमें ख़ुद ही घुस सकता है व ख़ुद ही निकल भी सकता है । किस क़िस्म के लोग इसमें घुस रहे है, इस पर हमारा कोई अख़्तियार नही । असल में राईट टू रिकॉल ग्रुप सिर्फ़ अच्छे क़ानून ड्राफ़्ट प्रस्तावित करता है । जिन्हें ये क़ानून अच्छे लगते है वे ख़ुद को RTR ग्रुप का सदस्य कहने लगते है । असल में न तो कही ग्रुप मौजूद है, न ही कोई सदस्य है ।
RTR क़ानून यदि लागू होता है तो यह अधिकार देश के ८४ करोड़ नागरिकों को मिलेगा । राईट टू रिकॉल ग्रुप कैसे इसका दुरुपयोग कर सकेगा ? जैसे आज मताधिकार सभी नागरिकों को हासिल है, उसी तरह से रिकॉल का अधिकार भी समान रूप से देश के सभी नागरिकों को मिलेगा । इस सम्बंध में सटीक जानकारी के लिए कृपया हमारे द्वारा प्रस्तावित ड्राफ़्ट पढ़े ।
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विनय जी झा का आरोप है : "ये लोग आस्तीन के सांप है"
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हम माँग कर रहे है कि, भारत की सेना को अमेरिका जितना ताक़तवर बनाने के लिए आवश्यक वेल्थ टेक्स, ज्यूरी सिस्टम, जनमत संग्रह प्रक्रियाएँ, मल्टी इलेक्शन तथा राईट टू रिकॉल क़ानून प्रक्रियाएँ लागू किया जाए । हमने सेना की संख्या १२ लाख से बढ़ाकर ४० लाख करने का प्रस्ताव किया है । हमने आधुनिक स्वदेशी हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा देने एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के नियंत्रण को कम करने के लिए भी लिखित क़ानूनी ड्राफ़्ट दिए है ।
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हमने अयोध्या में राम, मथुरा में कृष्ण व काशी में विश्वनाथ देवालय के निर्माण एवं हिन्दू मंदिरो के प्रशासन को एसजीपीसी की तर्ज़ पर मजबूत बनाने के लिए भी लिखित क़ानूनी ड्राफ़्ट दिए है ।
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हमने २ करोड़ बांग्लादेशियों को देश से बाहर खदेड़ने, गौ हत्या बंद करने, कश्मीर का विलय हिमाचल व उत्तराखंड में कर एक बृहत् राज्य बनाकर इसे भारत का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी क़ानूनी ड्राफ़्ट दिए है ।
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इसके अलावा सरकारी स्कूलों एवं अस्पतालों का स्तर सुधारने, महँगाई, बेरोज़गारी, भुखमरी आदि समस्याओं के समाधान के लिए भी हमने लगभग १२० लिखित क़ानूनी ड्राफ़्ट दिए है । जिन्हें गेजेट में प्रकाशित करके ऊपर दी गयी समस्याओं को हल किया जा सकता है ।
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उपरोक्त सभी कानूनो के प्रस्तावित ड्राफ़्ट इस लिंक पर देखें जा सकते है -- rahulmehta.com/301.h.htm
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विनय जी झा का कहना है : "मैंने कभी व्यवहार में RTR का समर्थन नहीं किया है"।
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स्पष्टिकरण : राजनीति से मायने राज चलाने की नीति है । नीति से आशय क़ानून है । देश को क़ानून चलाते है । अच्छे क़ानून अच्छा देश, और बुरे क़ानून बुरा देश बनाते है । अतः राजनीति सिर्फ़ क़ानून एवं प्रशासन है । यह दर्शन नही है । सैद्धांतिक समर्थन और व्यावहारिक विरोध का व्यावहारिक परिणाम विरोध ही होता है । अतः कोई व्यक्ति या तो किसी कानून प्रक्रिया का समर्थन कर सकता है या विरोध ।
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विनय जी झा का कहना है : "RTR के नाम पर बहुत से बिकाऊ लोग मोदी सरकार के विरुद्ध राजनैतिक विकल्प पार्टी खडा करना चाहते हैं "|
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स्पष्टिकरण : "राजनैतिक विकल्प पार्टी" से राइट टू रिकॉल ग्रुप का कोई सरोकार नही है । देश की कोई भी पार्टी या संगठन हमारे द्वारा प्रस्तावित कानूनो को अपने एजेंडे में शामिल करके, मुक्त रूप से प्रचार कर सकता है ।
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विनय जी झा का कहना है : "भाजपा में लाख खराबी हो, पहली बार इसकी पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी है जिसे एक पूर्ण कार्यकाल भी ये बिकाऊ लोग नहीं देना चाहते"
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स्पष्टिकरण : हमारा न तो उद्देश्य भाजपा को सत्ता से बेदख़ल करना है और न ही हमारे पास ऐसी कोई प्रक्रिया है जिससे हम या देश के करोड़ों नागरिक किसी चुनी हुयी सरकार को ५ साल से पहले सत्ता से च्युत कर सके । इसीलिए ऐसी आशंका निर्मूल है ।
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विनय जी झा का कहना है : "RTR सही तरीके से बने और लागू हो तो अच्छी बात है, किन्तु इस आन्दोलन को राजनैतिक विकल्प पार्टी का रूप देना वैसा ही है जैसा केजरीवाल ने भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन के साथ किया"
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स्पष्टिकरण : हम भी RTR को सही एवं बेहतर तरीक़े से लागू करवाने के लिए प्रयासरत है, तथा अन्य नागरिक कार्यकर्ताओं से भी आग्रह करते है कि वे देश के प्रशासन को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक राइट टू रिकॉल के बेहतर "क़ानून ड्राफ़्ट्स" का समर्थन करे । केजरीवाल राईट टू रिकॉल के मौखिक समर्थक यानी की 'ड्राफ़्ट लेस' समर्थक माने फ़र्ज़ी समर्थक है । अतः हम उनके धुर विरोधी है ।
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विनय जी झा का कहना है : "ऐसे धूर्तों से बचें"
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( कोई टिप्पणी नही )
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संदर्भ :
विनय जी झा द्वारा लिखे गए मूल आलेख का लिंक -- https://www.facebook.com/vinay.jha.906/posts/1303503242994310
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विनय जी झा की प्रोफ़ाइल का लिंक --https://www.facebook.com/vinay.jha.906
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