Pawan Jury BhilwaraRj

सर्जिकल स्ट्राईक के मुद्दे पर कटघरे में पैड मीडिया है, न कि सेना और सरकार । केजरीवाल ने सरकार पर तो सवाल खड़े किए लेकिन पैड मीडिया को "फ़्री एस्क़ेप" दे दिया ।
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केजरीवाल का कहना है कि, "पाकिस्तान और यू एन ओ ने सर्जिकल स्ट्राईक पर सवाल उठाए है, अतः भारत सरकार को सर्जिकल स्ट्राइक्स के सबूत देने चाहिए" ।
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मेरे विचार में हमें किसी विदेशी सत्ता को संतुष्ट करने के लिए सबूत रखने की ज़रूरत नही है । हमने स्ट्राइक करनी थी और कर दी । जिसने मानना है माने जिसने नही मानना है नही माने । हमें किसी विदेशी सत्ता से इस पर मुहर लगवाने की आवश्यकता नही है ।
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फिर भी यदि कोई बाहरी सत्ता सर्जिकल स्ट्राईक पर सवाल खड़े करती है तो यह सरकार को तय करना है कि उन्हें क्या जवाब देना है, या जवाब देना है या नही । यदि कल भारत सबूत जारी भी कर देता है तब भी पाकिस्तान साफ़ मुकर जाएगा । और यू एन ओ किस चिड़िया का नाम है । हमें किसी यू एन ओ की छाप की ज़रूरत नही ।
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जब तक कि बेहद गम्भीर संदेह प्रकट न हो, हमें अपनी सेना के अधिकृत बयान पर ही विश्वास करना चाहिए । सेना ने अधिकृत रूप से कहा है कि, "हमने नियंत्रण रेखा के पार स्थित क़ेम्प्स पर सर्जिकल स्ट्राइक किया, जिसमें क़ेम्प्स को भारी नुक़सान हुआ"

तो हमें विपरीत सबूत नही आने तक इस बयान के साथ खड़े रहना चाहिए । यदि पूरा देश यह माँग करेगा कि, पाकिस्तान और यू एन ओ सबूत माँग रहे है, अतः सेना या सरकार को उन्हें सबूत देने चाहिए तो हमारी ही मिट्टी पलीद होगी ।

इस सम्बंध में फ़ैसला सरकार को करना है कि वे अंतराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए क्या सबूत या जवाब देती है ।
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लेकिन इस पूरे मामले में गड़बड़ी सेना की तरफ़ से नही पैड मीडिया की तरफ़ से है । और हमें सरकार से इस सम्बंध में ही स्पष्टिकरण माँगना चाहिए ।
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पैड मीडिया पिछले ६ दिनो से यह अनधिकृत कहानी चला रहा है कि, भारत के १००-१२५ जवानो ने सीमा पार की । वे हेलीकोप्टर से गए, रेंग कर गए । नियंत्रण रेखा पार करके ३ किमी अंदर तक गए । ५० से ८० आतंकियों को मार गिराया आदि आदि !!
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अब पहला सवाल पैड मीडिया से यह पूछा जाना चाहिए कि, जब सेना या सरकार ने यह बताया ही नही कि, कितने जवान गए, कैसे गए, कितना अंदर गए और कितने आतंकियों को मार गिराया... तो मीडिया ये सब अफ़साने कहाँ से ला रहा है ?
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सेना या सरकार ने तो इस सम्बंध में कोई भी डिटेल अब तक जारी नही की है । तो क्या पैड मीडिया के रिपोर्टर भी स्ट्राईक के दौरान जवानो के साथ गए थे ? या इन सभी रिपोर्टर्स को संजय (महाभारत वाले) की तरह इस ओपरेशन को देखने के लिए दिव्य दृष्टि दी गयी थी !!
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और दूसरा सवाल सरकार से यह पूछा जाना चाहिए कि, पैड मीडिया जो भी पिछले ६ दिनों से देश को दिखा रहा है, क्या सरकार इसकी पुष्टि करती है ?
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जो सेना ने अपने अधिकृत बयान में कहा है सरकार को उसकी पुष्टि करने की ज़रूरत नही । लेकिन पैड मीडिया जो तथ्य दिखा रहा है, उनकी पुष्टि आवश्यक है । क्योंकि सेना ने मारे जाने वाले आतंकियों की संख्या, हेलीकोप्टर, ड्रोन, जवानो की संख्या आदि के बारे में कुछ भी नही कहा है ।
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तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे सेना के अधिकृत बयान में पैड मीडिया द्वारा जोड़े गए तथ्यों कि पुष्टि करती है ?

यहाँ विषय सबूत देने का नही है । सिर्फ़ उन तथ्यों का स्पष्टिकरण या पुष्टि/खंडन करना ज़रूरी है जो तथ्य पैड मीडिया ने अपनी तरफ़ से अतिरिक्त जोड़ दिए है । क्योंकि इस समय स्थिति यह है कि, देश के करोड़ों नागरिक पैड मीडिया द्वारा दिखाए गए वर्जन को सेना या सरकार का वर्जन मान रहे है । जबकि सच्चाई यह है कि यह सेना या सरकार का वर्जन नही बल्कि पैड मीडिया का वर्जन है ।
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और चूँकि पैड मीडिया की इस रिपोर्टिंग से सरकार को वाहवाही मिल रही है, अतः सरकार पैड मीडिया के इस अनाधिकृत वर्जन पर अब तक ख़ामोश है । हालाँकि हेलीकोप्टर के प्रयोग के विषय पर सरकार ने चुप्पी तोड़ी है । मेजर राज्यवर्द्धन ने इसका खंडन कर दिया है कि स्ट्राईक में हेलिकोप्टर्स का प्रयोग किया गया था । मतलब, यह स्पष्ट हो गया है कि हेलीकोप्टर पैड मीडिया की उपज थी !! इसी तरह सरकार को मारे गए आतंकियों की संख्या आदि के बारे में भी स्पष्टिकरण देना चाहिए ।
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बहरहाल, पैड मीडिया का कहना है कि सेना जल्दी ही स्ट्राईक का विडियो जारी करेगी । विडियो के सामने आने आने से ऐसी कई चीज़ें स्वतः ही स्पष्ट हो जाएगी । अतः हमें इस विडियो के जारी होने का इंतज़ार करना चाहिए ।
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तो केजरीवाल ने पैड मीडिया के सर्कस को पूरी तरह से ग़ायब कर दिया और सेना के अधिकृत बयान "सर्जिकल स्ट्राईक" के होने या न होने पर ही सवाल उठा दिए । वे पाकिस्तान के प्रवक्ता की तरह भारत सरकार से स्ट्राइक के सबूत माँग रहे है ।
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कोंग्रेस और आम आदमी पार्टी से यह बात छुपी हुयी नही है कि पैड मीडिया ६ दिनो से देश पूरे देश को अनाधिकृत ख़बरें दिखा रहा है । लेकिन दोनो पार्टियाँ इस विषय पर ख़ामोश है ।
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केजरीवाल जानते है कि उनकी पूरी राजनीति पैड मीडिया के रहमो करम पर है । यदि उन्होंने पूरे देश को अफ़ीम पिलाने वाले पैड मीडिया की ग़लत रिपोर्टिंग पर सवाल खड़े किए तो उन्हें भारी नुक़सान उठाना पड़ेगा । इसीलिए उन्होंने सरकार से सर्जिकल स्ट्राईक के सबूत माँगे लेकिन पैड मीडिया की अनाधिकृत रिपोर्टिंग पर ख़ामोश बने रहे ।
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