Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

Pawan Jury BhilwaraRj:

मतदाता : "केजरीवाल द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल और आपके द्वारा सुझाए गए राईट टू रिकॉल में क्या भिन्नता है" ?
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राईट टू रिकॉल ग्रुप का कार्यकर्ता : अरविंद केजरीवाल राईट टू रिकॉल क़ानूनो का सिर्फ़ मौखिक समर्थन करते है । उन्होंने किसी भी पद के लिए राईट टू रिकॉल की प्रक्रिया का लिखित ड्राफ़्ट देने से साफ़ इंकार कर दिया है । हमारे द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल-प्रधानमंत्री का ड्राफ़्ट rahulmehta.com/301.h.htm के अध्याय 6.6 में और राईट टू रिकॉल-शिक्षा अधिकारी का ड्राफ़्ट अध्याय 30.2 में देखा जा सकता है । कृपया अन्य पदो के लिए राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएँ देखने के लिए यह पूरा पीडीएफ़ डाउनलोड करे ।
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8 फ़रवरी 2011 को किए गए अनशन के ठीक बाद अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय चेनल पर यह वादा किया था कि वे दो माह के भीतर राईट टू रिकॉल-सांसद एवं राईट टू रिकॉल-लोकपाल का ड्राफ़्ट प्रस्तुत करेंगे । लेकिन उनके इस वादे के 3-4 दिन बाद जब राहुल चिमनभाई मेहता ने उनसे इस बारे में फ़ोन करके पूछा तो उन्होंने कहा कि, "अरे राहुल भाई, ये राईट टू रिकॉल का ड्राफ़्ट मैं दो महीने तो क्या, दो साल तो क्या, दो जनम में भी नही दूँगा । दो चार हफ़्ते में इस बात को पब्लिक की याददाश्त से ही मिटा दूँगा । और फिर भी यदि किसी को याद रहता है तो उसे बुत्ता देने के लिए कह दूँगा कि, इसके लिए मैंने कमेटी बिठा दी है" ।
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यदि आपको इस बात की सत्यता का सबूत चाहिए तो आप "आम आदमी पार्टी" की वेबसाइट चेक कर सकते है । आपको आज भी वहाँ राईट टू रिकॉल-सांसद का कोई ड्राफ़्ट नज़र नही आएगा ।
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दरअसल, राईट टू रिकॉल क़ानूनो को लागू करने की अरविंद भाई की कोई मंशा नही है । क्योंकि उन्हें कवरेज मुहैया करवाने वाले पैड मीडिया के प्रयोजक यह कभी नही चाहते कि, देश में राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएँ लागू हो ।
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