Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
सड़कों पर भटकती गायों के कारण वडोदरा में एक मोटर साइकिल सवार को जान गँवानी पड़ी - गाय के सींग ने व्यक्ति की छाती को भेद दिया --- किस तरह से मोदी साहेब, भाजपा नेता और पेड मीडिया गौ रक्षको को खलनायक की छवि में रंग रहे है ।
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गौ रक्षको और गौ भक्तों को समाज कंटको की तरह पेश करने के लिए पूरी योजना को बहुत ही बारीकी से बुना गया है ।
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पहले मोदी साहेब ने पूरे देश को यह समझाने का प्रयास किया कि, "गौ रक्षक गुंडे है" ।
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इसके बाद, मोदी साहेब ने अपने सबसे पसंदीदा सांसद उदित राज को कहा कि, वे ग़रीबों और खिलाड़ियों को गौ माँस खाने के लिए प्रेरित करे । और इस तरह मोदी साहेब ने ग़रीबो और खिलाड़ियों के दिमाग़ में यह बात डालने की कोशिश की कि, गौ रक्षक गौ माँस खाने से रोक कर उनको कुपोषित करने के दोषी है ।
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और फिर, मोदी साहेब ने भाजपा शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों को आदेश दिए कि वे सड़कों पर भटकते गौ वंश के आवास आदि का प्रबंधन न करें, ताकि असंख्य गौ झुंड सड़कों को अपनी रिहाईश बना ले और नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़े ।
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और इस तरह से अब मोदी साहेब के अंध भगत नागरिकों को यह समझाने में लगे है कि, "गौ रक्षको के कारण सड़कें गौ वंश से पटी पड़ी है अतः गायों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के लिए गौ रक्षक ज़िम्मेदार है !!
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पिछले महीने भर से अचानक से सड़कों पर भटकती गायों की संख्या में विस्फोटक उछाल आया है । और इससे नागरिकों को यातायात में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है तथा सड़क दुर्घटनाएँ भी हो रही है । सिर्फ़ वडोदरा में ही गौ वंश के चलते दो व्यक्तियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है ।
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आख़िर नगर पालिकाओ ने अचानक से गौ वंश को अधिग्रहीत करके उन्हें आश्रय देना क्यों बंद कर दिया है ? अचानक से लवारिश मवेशियों को पकड़ने वाले वाहनों ने काम करना बंद कर दिया है, इस विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी अन्य विभागों में लगा दी गयी है, पालिकाओ द्वारा संचालित कोईंन हाउसेस ने गायों को आश्रय देना बन्द ही नही कर दिया बल्कि उलटे उन्हें बाज़ार में छोड़ दिया है तथा गौ शालाओं को दिए जा रहे अनुदानों को लम्बित कर दिया गया है । और नतीजे में गौ वंश के झुंडो ने सड़कों पर अपना जमाव बना लिया है ।
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ख़बर का लिंक --http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/man-dies-after-cattle-attack-in-vadodara-3014074/
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"वडोदरा में मवेशी के हमले से युवक की मृत्यु"
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२७ वर्षीय सोहेल ठाकुर के सीने में गाय का सींग घुस जाने से उसकी मृत्यु हो गयी । सोहेल जब मोटर साइकिल से जा रहा था तब यह हादसा हुआ । हादसे से युवक ने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया ।
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"बुधवार की रात को एक श्रमिक की तब मौत हो गयी जब वह सड़क पर मवेशियों की लड़ाई के चपेट में आ गया" ।
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कुल मिलाकर यह साफ़ नज़र आ रहा है कि, यह पूरा सुनियोजित षड्यंत्र गौ रक्षको पर हमला करने के लिए रचा गया है । क्यों ? क्योंकि कई गौ रक्षको ने मई २०१६ में भाजपा के नेताओं से कहा था कि वे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपने अलग से प्रत्याशी उतारेंगे । और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उन्हें मतदाताओं का समर्थन न मिले, उनका नाम ख़राब करना आवश्यक है । इसीलिए, पहले उन्हें गुंडा कहा गया, फिर ग़रीबों व खिलाड़ियों को यह संदेश दिया गया कि उन्हें कुपोषण से बचने और शारीरिक शौष्ठव प्राप्त करने के लिए गौ माँस का भक्षण करना चाहिए जबकि गौ भक्त उन्हें गौ माँस खाने से वंचित कर रहे है, और अगले चरण में नगर पालिकाओ को आदेश दिया गया कि वे सड़कों को गौ वंश से पाट दें । और अब जब सड़के गायों से अटी पड़ी है और नागरिक इनके कारण जान गवाँ रहे है, तो मोदी अंध भगत इन सबका दोषी गौ भक्तों को ठहरा रहे है !!
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समाधान ?
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लावारिस भटकती गायों की समस्या के लिए हमारा प्रस्ताव है कि --- राइट टू रिकॉल सभापति के क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए तथा गायों को सड़कों पर भटकने के लिए छोड़ देने वाले गौ स्वामियों पर नागरिकों की ज्यूरी आर्थिक दंड तय करे । साथ ही मवेशियों को पकड़ने वाले कर्मचारियों के स्टाफ़ पर भी ज्यूरी सिस्टम लागू किया जाए ।
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साथ ही गौ रक्षको को अब इस बात को भी समझ लेना चाहिए कि, यदि वे गौ हत्या पर रोक लगाना चाहते है तो मोदी साहेब का समर्थन करने की जगह इन क़ानूनो को गेजेट में प्रकाशित करवाने का प्रयास करें ।
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( दिया गया विडियो किस शहर का है इस बारे मे जानकारी उपलब्ध नही है । यदि किसी कार्यकर्ता को इस बारे में मालूमात हो तो कमेंट बॉक्स में स्त्रोत दर्ज कर सकते है । )
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