Pawan Jury BhilwaraRj
90 के दशक के महान एथलीट और ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता कार्ल लुइस का कहना है कि, वे १००% शाकाहारी थे !!!
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पूरे विश्व में दर्जनो ओलम्पिक चैम्पियन और खुराक विशेषज्ञ चिकन, अंडे आदि के सेवन का विरोध नही करते, लेकिन वे लाल माँस अर्थात सभी प्रकार के बीफ़ समेत गौ माँस का सेवन न करने की सलाह देते है ।
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लेकिन मोदी साहेब ने अपने सांसद उदित राज से कहा कि उन्हें लुइस समेत इन सभी खुराक विशेषज्ञों की अवहेलना करते हुए सिर्फ़ उसेन बोल्ट के इस बयान को ही उछालना चाहिए कि, बोल्ट गौ माँस का सेवन करते है !!!
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पहले मोदी साहेब ने गौ रक्षको को गुण्डे कह कर सम्बोधित किया । और अब मोदी साहेब ने उदित राज को आदेश दिया है कि वे गौ माँस को खिलाड़ियों और ग़रीबों के पोषण के लिए एक सस्ते विकल्प की तरह पेश करें !!! दूसरे शब्दों में, मोदी साहेब साफ़ तौर पर यह संदेश दे रहे है कि --- ये गौ रक्षक है जिनकी गुंडई के चलते ग़रीब व्यक्ति गौ माँस खाकर ख़ुद को पोषित नही कर पा रहा है, और इसीलिए भारत के एथलीट ओलम्पिक में पर्याप्त पदक नही जीत पा रहे है !!!
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इस मामले में कोंग्रेस और आम आदमी पार्टी का रूख संतोषजनक है । क्योंकि वे खुले आम गौ हत्या और गौ माँस के सेवन का समर्थन करते है । वे इस तरह की दोगली नीति नही अपनाते कि, एक और तो वे गौ हत्या का मौखिक समर्थन करे और पीछे से खिलाड़ियों और ग़रीबों को गौ माँस खाने के लिए प्रेरित करे ।
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मेरा सभी गौ रक्षको से आग्रह है कि वे यदि गौ हत्या को रोकना चाहते है तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल को भाड़ में जाने दे और उन क़ानूनो का समर्थन करे जिससे भारत में गौ हत्या में कमी लायी जा सके । ज्यूरी सिस्टम, राइट टू रिकॉल जज और राइट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख के कानूनो को लागू करके गौ हत्या को शून्य के स्तर तक कम किया जा सकता है, अतः कार्यकर्ताओं को इन कानूनो को गेजेट में प्रकाशित करने की माँग करनी चाहिए । यदि इस विषय पर हम मोदी साहेब के भरोसे पर बैठे रहे तो आने वाले वक़्त में हमें और भी ऐसे खुराक विशेषज्ञ देखने को मिलेंगे जो गौ माँस भक्षण के गुणो की वकालत करते है ।
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