Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

Pawan Jury BhilwaraRj:

कम्पनी A लगातार आगे बढ़ रही थी, लेकिन कम्पनी B ने बार बार और हर बार उन तरीक़ों को अपनाने से इंकार कर दिया जिन तरीक़ों के कारण कम्पनी A लगातार बढ़त बना रही थी । आजिज़ आए अंश धारकों ने एक बार फिर से कम्पनी B के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को बदल दिया । नया CEO कई मायनो में पुराने CEO से बेहतर था, किंतु उसने भी कई तरह के बहाने बनाकर कम्पनी A की बेहतर नीतियों को लागू करने से इंकार कर दिया । कम्पनी B के लगातार पिछड़ने के कारण कम्पनी A ने इतनी बढ़त बना ली थी कि, कम्पनी B को A द्वारा अधिग्रहीत किए जाने का आसन्न ख़तरा मँडराने लगा ।
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ऊपर दिया गया दृष्टांत भारतीय राजनीति के पिछले ६० वर्ष और पिछले ३ वर्ष की भी संक्षिप्त और सटीक व्याख्या प्रस्तुत करता है ।
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१९५० से ही अमेरिका = कम्पनी A और भारत = कम्पनी B के बीच शक्ति अनुपात लगातार बिगड़ रहा है । इस अनुपात के बिगड़ने का एक मात्र कारण यह था कि --- अमेरिका के पास राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, मल्टी इलेक्शन और जनमत संग्रह प्रक्रियाएँ है, तथा वेट/सेल्स/एक्साइज की जगह वेल्थ टेक्स है । लेकिन भारत के तमाम CEO = प्रधानमंत्रियों और अन्य शीर्ष नेताओं ने इन कानूनो को लागू करने से इनकार कर दिया ।
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और जैसे जैसे भारत की दुर्गति होती चली गयी मतदाता = अंश धारक अपनी कम्पनी B के CEO = प्रधानमंत्री को बदलते रहे । मोदी साहेब नामक नए CEO = प्रधानमंत्री अपने पूर्ववर्तियो से कई मायनो में बेहतर है । लेकिन चूँकि मोदी साहेब ने भी राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, जनमत संग्रह, मल्टी इलेक्शन, वेल्थ टेक्स का विरोध और VAIT/GST का समर्थन करने का फ़ैसला किया है, अतः यह तय है कि भारत = कम्पनी B अपने प्रतिद्वंद्वी अमेरिका = कम्पनी A की तुलना में और भी पिछड़ जाएगी । इसीलिए कम्पनी A = अमेरिका द्वारा कम्पनी B = भारत को अधिग्रहीत किए जाने का ख़तरा आसन्न है ।
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देश के उन सभी कार्यकर्ताओं से - जो भारत और अमेरिका के बीच बिगड़ते शक्ति अनुपात को सुधारना चाहते है - मेरा आग्रह है कि --- वे देश हित में कोंग्रेस-भाजपा-आम पार्टी-संघ और इनके कार्यकर्ताओं व सोनिया-मोदी-केजरीवाल-भागवत और इनके अंध भगतो से जितनी जल्दी हो सके किनारा कर ले, तथा भारत में राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, मल्टी इलेक्शन, जनमत संग्रह, वेल्थ टेक्स के कानूनो को लागू करवाने तथा GST को ख़त्म करवाने के लिए काम करे । देश को ये क़ानून ही बचा सकते है, सोनिया-मोदी-केजरीवाल-रामदेव-भागवत नही । इन कानूनो के अभाव में भारत लगातार कमज़ोर होगा और जल्दी ही अमेरिका भारत को टेकओवर कर लेगा ।
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