Pawan Jury BhilwaraRj

बहुत पुरानी बात है, जब 1910 से पहले तक अमेरिका में सीनेटरों (राज्य सभा सदस्य) को नागरिकों की जगह सीधे राज्यों के विधायकों द्वारा चुना जाता था, अत: विधायक राज्य सभा सदस्यों के उम्मीदवारों से घूस खाकर उन्हें वोट दे देते थे। अंततोगत्वा अमेरिका के कार्यकर्ताओ ने समाधान के लिए शासन को मजबूर करके ऐसे कानून को लागू करवाया जो कहता था कि , "सीनेटर सीधे नागरिकों द्वारा चुने जाएंगे"।
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भारत में राज्यसभा "चुनावों" का तमाशा 1951 से शुरू हुआ, और 2003 में राज्यसभा के चुनाव तब खुली नीलामी बन गए जब एनरॉन पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी ने वोटिंग को सार्वजनिक बनाने के लिए 'दल बदल व्हिप' कानून लागू किया और इसका दायरा राज्य सभा चुनावों तक विस्तृत कर दिया।
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दूसरे शब्दों में, इस कानून ने यह सुनिश्चित कर दिया कि, राजनैतिक दलों के मुखिया अपनी पार्टी के विधायकों को लिखित में आदेश दे सकेंगे कि उन्हें राज्यसभा के किस उम्मीदवार को वोट करना है, और यदि उन्होंने इस आदेश की अवमानना की तो उन्हें पार्टी से बाहर निकाला जा सकेगा !!!
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इस व्यवस्था के आने से कांग्रेस से लेकर बीजेपी, आम आदमी पार्टी, सीपीएम और अन्य राजनैतिक पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने घूस खाकर राज्य सभा सीटों की खुली नीलामी शुरू कर दी। इसी क्रमिक विकास को जारी रखते हुए अब हमारा मानना है कि राज्यसभा सीटों की नीलामी को सार्वजनिक कर विधिवत रूप दिया दिया जाना चाहिए, तथा इस क्षेत्र के संसदीय विकास के लिए इसमें एफडीआई की अनुमति भी दी जानी चाहिए, ताकि विदेशी धनिक पारदर्शी तरीके से राज्य सभा की सीटें खरीद सके !! क्या इससे भारत सरकार के खजाने में राजस्व की आवक नहीं बढ़ेगी ?
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क्या कोंग्रेस-बीजेपी-सीपीएम और आम आदमी पार्टी के इस खुले भ्रष्टाचार के लिए भारतीय और उनकी संस्कृति जिम्मेदार है ?
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असल में 1790 से 1910 तक अमेरिका में इसी तरह का कानून था, जो कहता था कि -- राज्यों के विधायक राज्यसभा सांसदों (सीनेटर) को चुनेंगे। और अमेरिका भी इसी समस्या का सामना कर रहा था -- ज्यादातर विधायक नोटों के बदले बिक जाते थे !!!
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1910 में अमेरिका के कार्यकर्ताओ ने इस विषय पर आंदोलन चलाया और रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेटर्स (लोकसभा एवं राज्यसभा सदस्य) को ऐसा कानून लाने के लिए बाध्य कर दिया जो यह धारित करता था कि, "राज्य सभा सदस्य सीधे नागरिकों द्वारा चुने जाएंगे"। चूंकि सभी नेता मौजूदा व्यवस्था से पैसा बना रहे थे अत: अमेरिका का कोई नेता इस कानून को लागू नहीं होने देना चाहता था। पर चूंकि कार्यकर्ताओ का प्रचार व्यापक था अत: नेताओं ने श्रेय लेने के लिए इस कानून का समर्थन करना शुरू किया। लेकिन सिर्फ अंतिम चरण में, जबकि शुरुआत में सभी नेता राज्य सभा उम्मीदवारों को सीधे नागरिकों द्वारा चुने जाने के कानून का विरोध कर रहे थे।
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दूसरे शब्दों में, कांग्रेस, बीजेपी, सीपीएम और आम आदमी पार्टी के विधायक राज्य सभा चुनावों में अपना वोट इसीलिए नहीं बेच देते है क्योंकि भारतीय संस्कृति में दोष है, बल्कि इसका कारण यह है कि भारत में एक कंडम और अलोकतांत्रिक कानून लागू है जो कि यह कहता है कि, "राज्य सभा सांसदों को नागरिक नहीं बल्कि विधायक चुनेंगे"। यही कानून विधायकों को बिक जाने का अवसर मुहैया कराता है, किन्तु इन्ही पार्टियों के नेता और पैड मीडिया एक तरफ इस कानून का समर्थन करते है और साथ ही भारत में यह झूठ भी फैलाते है कि भारत में भ्रष्टाचार होने का कारण भारतीय संस्कृति है !! और इसी दुष्प्रचार के चलते कतिपय कार्यकर्ताओ के दिमाग में यह कचरा इतना घर कर गया है कि उन्हें आप बहुधा यह कहते पाएंगे कि, 'भारत में भ्रष्टाचार इसीलिए है क्योंकि भारतीय और उनकी संस्कृति भ्रष्ट है'।
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तो अमेरिका के कार्यकर्ताओ ने अपने देश की इस समस्या को हल कर लिया, लेकिन भारत इसका समाधान क्यों नहीं कर पाया ?
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क्योंकि भारत के कार्यकर्ताओ ने समस्या के समाधान के लिए कानून ड्राफ्ट की धारणा पर बल देने की जगह व्यक्ति पूजा (उदाहरण के लिए सोनिया-मोदी-केजरीवाल की अंधभगती) को तरजीह दी। और फिर उन्होंने इस बात का भी प्रचार किया कि, "देश की किसी भी समस्या का समाधान सिर्फ सोनिया-मोदी-केजरीवाल की अंधभगती से ही किया जा सकता है। ड्राफ्ट्स वगैरह पर चर्चा करना भी समय की बर्बादी है" !!!
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हम राईट टू रिकॉल पार्टी के सदस्यो ने यह प्रस्ताव किया है कि राज्य सभा के सांसद सीधे नागरिकों द्वारा चुनकर आने चाहिए और नागरिकों के पास उन्हें किसी भी समय नौकरी से निकालने की प्रक्रिया भी होनी चाहिए। हमारे द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विवरण नीचे दिए गए राईट टू रिकॉल पार्टी के मेनिफेस्टो के लिंक में देखा जा सकता है। हमने सांसदों के चयन और निष्कासन हेतु लोकसभा और राज्य सभा के लिए समान प्रक्रिया प्रस्तावित की है।
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राइट टू रिकॉल पार्टी का मेनिफेस्टो यहां से डाउनलोड करे -- rahulmehta.com/301.h.htm (see chapter 40, election reforms)
इसी अध्याय का मूल अंग्रेजी संस्करण इस नोट पर देखा जा सकता है --- https://facebook.com/notes/10150425932996922
सांसद के चुनाव व निष्कासन की प्रक्रिया का हिन्दी ड्राफ्ट यहां देखे --- https://web.facebook.com/posts/860633484054889
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल संयुक्त रूप से ऐसी किसी भी प्रक्रिया का खुले आम विरोध कर रहे है जिससे भारत के नागरिकों को अपने राज्य सभा सांसदों को सीधे चुनने का अधिकार मिले। इसीलिए यदि आप चाहते है कि भारत के आम नागरिकों को राज्य सभा सांसदों को सीधे चुनने का अधिकार मिले तो राईट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ताओ के साथ काम करे और अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि उपरोक्त लिंक में दर्ज कानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
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