Pawan Jury BhilwaraRj
राजनाथ सिंह जी ने यूपी में बामियान से भी ऊँची बुद्ध प्रतिमा बनाने का वादा किया है, और बौद्धों को रिझाने के लिए 'धम्म चेतना यात्रा' भी प्रायोजित कर रहे है। एकाएक यूपी में बौद्ध इतने महत्त्वपूर्ण क्यों हो गए है ?
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धम्म चेतना यात्रा -- http://goo.gl/MfpQPq
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पेड इंडिया टुडे में छपी खबर के अनुसार :
"धर्म के आधार पर सबसे धमाकेदार वृद्धि बौद्ध धर्म में दर्ज की गयी है। 2001 से 2011 के बीच "दलित बौद्धों" की जनसंख्या वृद्धि दर 38% रही। महाराष्ट्र में "दलित बौद्धों" की आबादी में 60% की वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र में सत्यशोधक परिषद के संयोजक संतोष उपरे का कहना है कि हम इस साल कम से कम 30 से 40 हजार लोगो को बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलवाएंगे। डॉ भीमराव अम्बेडकर के पोते और दलित एक्टिविस्ट प्रकाश अम्बेडकर कहते है कि '1990 में संशोधन के जरिए बनने वाले दलितों को आरक्षण का हक मिल गया था। इस वजह से भी 1990 के बाद दलितों के बौद्ध बनने में अच्छी खासी वृद्धि हुई है'।
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आंकड़ों में उत्तर प्रदेश में बौद्ध आबादी में गिरावट दर्ज की गई है। किन्तु वर्धा में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग के अध्यक्ष सुरजीत कुमार सिंह इसकी अलग वजह बताते है। उनका कहना है कि, 'यूपी जैसे राज्य में दलित बौद्ध इतने सशक्त नही है कि उनका जनगणना अधिकारियो पर कोई दबाव हो। अमूमन वे उनकी नयी पहचान दर्ज नही करते। दरअसल महाराष्ट्र में जनगणना से पहले बौद्ध कार्यकर्ताओ ने घूम घूम कर लोगो को जागरूक किया था कि धर्म के कोलम में बौद्ध ही लिखवायें, क्योंकि जनगणना करने वाले दलित बौद्धों को हिन्दू ही लिख देते थे'। यूपी के बुलंदशहर के दलित बौद्ध मगन लाल गौतम इस पर मुहर लगाते है, 'आंकड़े इकट्ठा कर रहे कर्मचारी ने मुझसे मेरा धर्म पूछा ही नही, और मैं उनकी तिकड़म समझ गया'।
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सुरजीत बताते है कि, हालिया नव बौद्ध आन्दोलन की खासियत यह है कि यह बिना किसी बड़े नाम के चुपचाप जमीनी स्तर पर चल रहा है"।
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(अंक : 15 जून, 2016, शीर्षक -- देश में बौद्ध बढ़े, चुनावी चर्चो में बढ़े )
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समाधान ?
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हिन्दू धर्मावलम्बियों को धार्मिक रूप से सशक्त बनाने और उनके अन्य धर्मो में धर्मान्तरण को हतोत्साहित करने के लिए समाधान :
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किसी धर्म का कमजोर प्रशासन धर्म को कमजोर तथा मजबूत प्रशासन धर्म को मजबूत बनाता है और धर्म का प्रशासन ही किसी धर्म के धर्मावलम्बियों को धर्म को छोड़ने या उसका अनुसरण करने के लिए प्रेरित करने में मुख्य भूमिका निभाता है। हिन्दू धर्म का प्रशासन बेहद कमजोर है। मंदिर प्रमुखों और ट्रस्टियों पर समुदाय के नागरिकों का कोई नियंत्रण नहीं है, जिससे वे धन का संग्रह कर रहे है और इस सामुदायिक खजाने को परोपकार के कार्यों में खर्च करने की जगह सरकार के खजाने में जमा करवा रहे है। आज भी कई मंदिरों में दलितों के प्रवेश को लेकर अघोषित प्रतिबन्ध लगे हुए है, जिससे जातिगत भेदभाव को बढ़ावा मिलता है। समाधान के लिए हमें ऐसे कानून की जरूरत है जिससे हिँदू नागरिकों का मंदिर के ट्रस्टों और अन्य धार्मिक निकायों पर नियंत्रण रहे। इससे धर्म का प्रशासन सुगठित होगा और धर्मांतरण में कमी आएगी।
'राष्ट्रिय देवालय ट्रस्ट अधिनियम' के लिए क़ानून ड्राफ्ट -- https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/570764579768407
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लेकिन बीजेपी ने हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने के कानून को लागू करने कि जगह हिन्दू धर्म से बौद्ध में धर्मान्तरित हुए बौद्धों का तुष्टिकरण शुरू कर दिया है। विगत 25 वर्षो से बीजेपी के नेता अयोघ्या में राम, मथुरा में कृष्ण और काशी में विश्वनाथ मंदिर बनाने के एलान चला रहे थे, और अब उन्होंने पहलु बदलकर बुद्ध की विशाल प्रतिमा स्थापित करने कि घोषणा कर दी। मोदी साहेब के साथ साथ सोनिया और केजरीवाल भी हिंदू मंदिरों के प्रशासन को मजबूत बनाने के इस क़ानून का विरोध कर रहे है। उनका कहना है कि भारत भले ही एक धर्म निरपेक्ष देश हो, लेकिन मंदिरों की संपत्ति और प्रंबंधन पर सरकारों का नियंत्रण रहना चाहिए। सोनिया-मोदी और केजरीवाल के अंध भगत भी इनकी इस निति समर्थन कर रहे है।
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समाधान के लिए नागरिकों को अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजने चाहिए कि उपरोक्त वर्णित क़ानून ड्राफ्ट्स को गैजेट में प्रकाशित किया जाए। जब करोडो नागरिक अपने सांसदों को आदेश भेजकर ऐसी मांग करेंगे तो जनमत का सम्मान करते हुए प्रधानमंत्री इन कानूनों को गैजेट में प्रकाशित कर देंगे। यदि कार्यकर्ता सोनिया-मोदी-केजरीवाल और भागवत के भरोसे बैठे रहेंगे तो यह तय है कि मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आ सकेगा।
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इसके अलावा 2001 से 2011 के बीच मुस्लिम धर्मावलम्बियों की तुलना में हिन्दुओ की आबादी भी घटी है।
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2001 से 2011 के बीच कुल जनसंख्या वृद्धि दर = 17.7%
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हिन्दुओ की वृद्धि दर 16.8 रही। अत: हिन्दू 80.45% से घटकर 79.8% रह गए।
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मुस्लिम समुदाय में वृद्धि दर 24.6% होने से उनका जनसंख्या प्रतिशत 13.4% से बढ़कर 14.2% हो गया।
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लेकिन मोदी साहेब ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कोई भी कानून लागू करने से साफ मना कर दिया है और 'टू चाइल्ड पॉलिसी' का भी विरोध किया है। सोनिया और केजरीवाल भी मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन कर रहे है। भागवत और संघ के सभी अंधसेवक भी इस मुद्दे पर मोदी साहेब के समर्थन में है।
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राईट टू रिकॉल पार्टी ने बिगड़ते धार्मिक संतुलन को रोकने के लिए प्रस्तावित एमआरसीएम कानून में प्रावधान दिए है। प्रस्तावित ड्राफ्ट नीचे दिए गए लिंक पर देखा जा सकता है।
खनिज रॉयल्टी सीधे नागरिको के खाते में भेजे जाने के लिए प्रस्तावित कानून ड्राफ्ट -- www.facebook.com/pawan.jury/posts/811075642344007
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समाधान के लिए नागरिकों को अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजने चाहिए कि उपरोक्त वर्णित क़ानून ड्राफ्ट्स को गैजेट में प्रकाशित किया जाए। जब करोडो नागरिक अपने सांसदों को आदेश भेजकर ऐसी मांग करेंगे तो जनमत का सम्मान करते हुए प्रधानमंत्री इन कानूनों को गैजेट में प्रकाशित कर देंगे। यदि कार्यकर्ता सोनिया-मोदी-केजरीवाल और भागवत के भरोसे बैठे रहेंगे तो यह तय है कि मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आ सकेगा।
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