Pawan Jury BhilwaraRj
निम्बू-मिर्ची बाँधने की खिल्ली उड़ाने के बाद अब इरफान खान ने हॉलीवुड/बॉलीवुड को संचालित करने वाली मिशनरीज को खुश करने के लिए इस्लाम और मुस्लिम धर्मावलम्बियों का अपमान किया है -- ऐसे छद्म सुधारवादियों से दूरी बना कर रखें, जो अपने कैरियर को बढ़ाने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते है।
.
लगभग 2002 के साल में प्रधानमंत्री रहते हुए वाजपेयी ने भारत के फिल्म उद्योग में एफडीआई की अनुमति दी थी। तब से भारतीय फिल्म उद्योग में बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के स्वामियों का नियंत्रण लगातार बढ़ना शुरू हो गया। बहुराष्ट्रीय कम्पनियां उन अभिनेताओं को तरजीह देती है जो एंटी-हिन्दू, एंटी-मुस्लिम तथा मिशनरीज की तरफ झुके हुए हो। अत: ज्यादातर अभिनेता बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को खुश करने के लिए एंटी-हिन्दू, एंटी-मुस्लिम होकर मिशनरीज की तरफ झुकने लगे। हिन्दू-मुस्लिम धार्मिक परम्पराओ की खिल्ली उड़ाने के इस पेशे में ये चार अभिनेता सबसे ज्यादा बढ़े हुए है -- अक्षय कुमार, सांसद परेश रावल, आमिर खान और अजय देवगन। इरफान खान इसी क्रम में नया संस्करण है।
.
मुझे तब भी संदेह हुआ था जब इरफान खान ने अपने नाम के हिज्जों में अंक शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार बदलाव किया था। इस्लाम इस तरह के बेवकूफाना अंक फलित के खिलाफ है। दूसरे शब्दों में इरफान ने ऐसा करके इस तरह की घोषणा की थी कि वे इस्लामिक मूल्यों की अवहेलना कर सकते है।
.
और इस्लाम की खिलाफत दर्शाने के लिए ही अब इरफान ने बकरीद पर बकरो को न काटने का बयान दिया है।
.
इरफान इस्लाम को अपमानित सिर्फ इसीलिए कर रहे है ताकि मिशनरीज को खुश करके अच्छी भूमिकाएं हासिल की जा सके। ऐसे लोगो का एकनिष्ठ उद्देश्य अपना कैरियर बनाना होता है। समाज में सुधार लाने की इनकी कोई मंशा नहीं होती।
.
शाकाहार अलग विषय है, और इसके अपने परिमाणात्मक लाभ है। लेकिन जो समूह शाकाहार को प्रोत्साहित करते है वे किसी धर्म विशेष या उनके त्योहारों को निशाना नहीं बनाते। वे सीधे शब्दों में लोगो को मांस कम खाने या न खाने के लिए ही कहते है। लेकिन इरफान की धारा यह नहीं है। उनका लक्ष्य इस्लामिक मूल्यों पर प्रहार करना है।
.
आज सऊदी अरब, पाकिस्तान, बांग्लादेश, के साथ साथ चीन व अमेरिका-ब्रिटेन भी हमारे दुश्मन है, और हमे इनके विरूद्ध अपनी सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए। लेकिन हमे अपने प्रतिरोध को भारतीय मुस्लिम, अन्य सामान्य मुस्लिम, इस्लाम, ईसाई, ईसाइयत, बौद्ध आदि तक विस्तारित नहीं करना चाहिए। सऊदी अरब, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अमेरिका-ब्रिटेन आदि के खिलाफ लड़ाई में इरफान खान का बयान हमें मामूली बढ़त देता है, लेकिन असल में ऐसे लोग जरूरत पड़ने पर मिशनरीज और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के इशारे पर किसी भी समय भारत के खिलाफ जा सकते है।
.
कुल मिलाकर ऐसे व्यक्तियों के बयानों का मूल्य नहीं है, अत: ऐसे कैरियर लोलुप लोगो की अवहेलना करें।
.
' राईट टू रिकॉल पार्टी '
.
_________________________