Pawan Jury BhilwaraRj

चिंटू : मास्टर जी, अब भारत में भी टैंक और लड़ाकू हवाई जहाज, युद्धपोत आदि बनेंगे। मोदी साहेब ने अमेरिकी कम्पनियों को बुला लिया है।
मास्टर जी : मालूम है। पर इसमें उछलने की क्या बात है। हमे तो घाटा हो गया। हम अगर खुद हथियार नहीं बनाएंगे तो मर जाएंगे। देश सेना से चलता है, और सेना हथियारों से। आजाद रहना है तो हथियार खुद ही बनाने चाहिए।
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चिंटू : अरे मास्टर जी, ये कचौरी समोसा नहीं, हथियार है। भारत को हथियार बनाने कहां आते है ? इसीलिए तो अमेरिकियों को बुला रहे है।
मास्टर जी : बनाने ही न दोगे तो कहां से बनाएंगे ?
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चिंटू : तो बनाओ न। रोकता कौन है ?
मास्टर जी : रोकती सरकार है।
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चिंटू : सरकार कैसे रोक रही है ?
मास्टर जी : बताता हूँ। अच्छा, तू ये बता भारत को कचौरी बनानी तो आती है न।
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चिंटू : हाँ। कचौरी तो बहुत अच्छी बनानी आती है। भीलवाड़ा में ही 10-15 ठिकाने है जहां बहुत अच्छी कचौरी मिलती है। प्याज की कचौरी, दाल की कचौरी, तेज मसाले की, सादी, दही के साथ। खानी है जैसी मिल जाएगी।
मास्टर जी : अच्छा अगर यह कानून बना दिया जाए कि कचौरी की दुकान करने के लिए सरकार से लाइसेंस लेना पड़ेगा और सरकार एक शहर में सिर्फ एक आदमी को ही लाइसेंस देगी। तो क्या होगा।
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चिंटू : तो शहर में सिर्फ एक ही आदमी कचौरी बनाएगा और कई प्रकार की कचौरियां मिलनी बंद हो जाएगी।
मास्टर जी : अब यदि दूसरा कानून यह लागू कर दिया जाए कि, सभी विभागों में नाश्ते में कर्मचारियों को कचौरी ही मिलेगी और यह सरकार की तरफ से मुफ्त होगी, तो क्या होगा ?
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चिंटू : तो जिस आदमी के पास शहर में कचौरी बनाने का लाइसेंस है, वह ठेका देने वालो से सेटिंग करके 10 रू की कचौरी सरकार को 15 रूपये में बेचेगा और कचौरी की क्वालिटी की ऐसी बैंड बजा देगा कि खायी न जाएगी।
मास्टर जी : और फिर मैं यदि कहूं कि भारत के लोगो को कचौरी बनानी नहीं आती इसीलिए कचौरी में एफडीआई लानी चाहिए तो ?
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चिंटू : तो मैं कहूंगा कि आप मेरी आंखों में धूल झोंक रहे है। लेकिन मास्टर जी, बात तो हथियारों की हो रही थी, आप कचौरी समोसो पर कहाँ आ गए।
मास्टर जी : एक ही बात है। हम हथियार इसीलिए नहीं बना पाते क्योंकि सरकार ने भारतीयों को हथियार न बनाने देने का कानून लागू किया हुआ है।
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चिंटू : अयं। ऐसे कैसे ?
मास्टर जी : हाँ ऐसा ही है। भारत में यदि कोई व्यक्ति बंदूक, तोप, रायफल आदि बनाना चाहता है तो उसे सरकार से लाइसेंस लेना होता है। जबकि अमेरिका में निजी कम्पनियो को लड़ाकू विमान और टैंक तक बनाने के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। बस कुछ निर्देशों का पालन करना होता है, तथा बिक्री को लेकर नियम होते है। इस कारण वहां के उद्योगपति हथियारों की निर्माण इकाइयां आसानी से खोल पाते है और प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए उन्हें लगातार अपनी क्वालिटी में सुधार करना होता है और इसी से प्रौद्योगिकी का विकास होता है।
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चिंटू : मतलब कचौरी बनाने में कम्पीटिशन होने से भारत अमेरिका से अच्छी कचौरी बना रहा है और हथियारों के निर्माण में लाइसेंस राज होने से हम फिसड्डी रह गए, लेकिन अमेरिका में हथियारों में कम्पीटिशन होने से वे अच्छे हथियार बना रहे है।
मास्टर जी : हाँ, यही बात है।
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चिंटू : पर इससे भारत में कम्पीटिशन नहीं बढ़ेगा क्या ?
मास्टर जी : बिल्कुल बढ़ेगा। जैसे अमेरिकी कम्पनियो के आने से भारतीय लिम्का, थम्स अप, गोल्ड्स्पोट आदि कम्पनिया टेकओवर हो गई और शीतल पेय बाजार में आज पेप्सी और कोक में कम्पटीशन है, वैसे ही अमेरिका की बोइंग, जेट और लॉकहीड मार्टिन में आपस में कम्पटीशन होगा।
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चिंटू : बेड़ा गर्क। मैं समझ गया।
मास्टर जी : क्या समझा ?
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चिंटू : ये सभी मक्कार लोग है, और जानबूझकर भारत को यह कह कर पूरी दुनिया में शर्मिंदा कर रहे है कि हमे हथियार बनाने नहीं आते। और फिर भारत के कानूनों को सुधारने की जगह ये लोग विदेशी कम्पनियो से घूस खाकर उन्हें भारत में हथियार बनाने के कारखाने लगाने के लिए बुला रहे है। ताकि हमारी सेना हमेशा के लिए विदेशी हथियारों पर निर्भर बनी रहे।
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चिंटू : अब ? ये तो पूरा गुड ही गोबर हो रहा है। उपाय क्या करने से होगा ?
मास्टर जी : आसान है। एक पेज का कानून है। इसे गैजेट में छाप दो, भारत के कारोबारी भी तेल, साबुन, मिर्ची, शैम्पू के साथ साथ हथियार भी बनाना शुरू कर देंगे।
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भारत में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809740312477540
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चिंटू : हाँ ये कानून तो अच्छा है। इससे हो जाएगा तो।
मास्टर जी : आधा काम होगा इससे। कारखाने लगाने के लिए जमीन सस्ती चाहिये। इसके लिए वेल्थ टैक्स का कानून भी लाना पड़ेगा। और इन फैक्ट्रियों को परेशान करके घूस खाने वाले अधिकारियों से बचाने के लिए ज्यूरी सिस्टम का कानून भी डालना पड़ेगा। तब जाकर भारत में बड़े पैमाने पर निर्माण इकाइयां लग सकेगी, और तकनीकी विकास होगा।
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चिंटू : इनके लिए भी कोई लिखित में कानून है या वैसे ही हवाई सलाह है ?
मास्टर जी : यहां हवाबाजी जीरो है। सब उपाय कानून की शक्ल में है। गैजेट में छापो और देश में लागू।
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ज्यूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809746209143617
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संपत्ति कर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/permalink.php?story_fbid=745231492261756&id=100003247365514&_rdr
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चिंटू : ठीक है। पर प्रधानमंत्री तक ये कानून पहुंचाएंगे कैसे ? उनसे तो मिलने में भी महीनों पहले आवेदन करना पड़ता है।
मास्टर जी : उनको मिलने की जरूरत नहीं है। जो आदमी उनके साथ संसद में बैठता है उससे कह दो। वह पीएम को बता देगा।
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चिंटू : कौन है वो आदमी ?
मास्टर जी : सांसद। सांसद को इन कानूनों के एसएमएस भेज दो। वे पीएम को बता देंगे कि अपने मालिक ने इन कानूनों को लागू करने का हुकुम भेजा है।
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