Pawan Jury BhilwaraRj
सरकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि
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तकनीकी स्टाफ जैसे मेडिकल/इंजीनियर्स/मैकेनिक/अंकेक्षक आदि को छोड़कर सभी केंद्रीय एवं राज्य सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कम से कम 50 से 75% की कटौती की आवश्यकता है। और यह कटौती पूरी तरह नैतिक और न्यायपूर्ण है।
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सरकारी कर्मचारियों का वेतन उसी पद पर कार्यरत निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन के समान ही रहना चाहिए। निजी क्षेत्र में जब शिक्षक या एकाउंटेंट 7 हजार में उपलब्ध है तो हम इन्ही कर्मचारियों को सरकारी क्षेत्र में 40 हजार क्यों चुका रहे है ? सिर्फ इसीलिए क्योंकि वे सरकारी कर्मचारी है !!!
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देश में लगभग 3 करोड़ सरकारी कर्मचारी है और लेकिन देश के 80 करोड़ नागरिक इनके वेतन में एक तिहाई कटौती करने का समर्थन करेंगे। लेकिन चूंकि राजनैतिक पार्टियों को इनके वोट लेने होते है, अत: वे इनकी गैर वाजिब वेतन वृद्धि जारी रखती है।
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सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार, काम का कम बोझ, शून्य जवाबदेहिता और ऊंचा वेतनमान होना ही करोड़ो नागरिकों को आरक्षण के लिए सड़कों पर धकेलता है।
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समाधान ?
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इस प्रस्ताव पर देश के करोड़ो नागरिकों द्वारा जनमत संग्रह करवाया जाना चाहिए कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कितनी कटौती की जाए।
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इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों को जवाबदेह बनाने के लिए नोडल अधिकारियों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं और विभाग के कर्मचारियों पर ज्यूरी प्रक्रियाएं आने से भी सरकारी कर्मचारियों की उद्दंडता व लापरवाही में कमी आएगी और कार्यकुशलता बढ़ेगी।
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जनमत संग्रह के लिए प्रस्तावित प्रक्रिया :
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========राजपत्र अधिसूचना का प्रारम्भ ========
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पारदर्शी शिकायत प्रणाली - टीसीपी के लिए प्रस्तावित अधिसूचना
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1. [ जिला कलेक्टर या उसके क्लर्क के लिए निर्देश ]
कोई भी नागरिक मतदाता यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित कोई शिकायत या प्रस्ताव शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करता है, तो कलेक्टर उस शपथपत्र को 20 रूपये प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर दर्ज करेगा और सीरियल नंबर के साथ एक रसीद जारी करेगा। तथा कलेक्टर इस शपथपत्र को स्कैन करके शपथपत्र प्रस्तुतकर्ता की मतदाता संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर रखेगा, ताकि कोई भी नागरिक इस अर्जी को बिना लॉग इन के देख सके।
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2. [ पटवारी या तलाटी के लिए निर्देश ]
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(2.1) कोई भी नागरिक मतदाता यदि धारा-1 के तहत प्रस्तुत किये गए किसी शपथपत्र पर आपनी 'हाँ' या 'ना' दर्ज कराने के लिए मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में आता है, तो पटवारी 3 रुपये का शुल्क लेकर कंप्यूटर में मतदाता की हाँ/ना को उसकी मतदाता पहचान संख्या के साथ दर्ज करेगा, तथा मतदाता को इसकी एक रसीद देगा। पटवारी नागरिक की हाँ/ना को उसकी मतदाता संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर भी रखेगा।
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(2.2) नागरिक पटवारी के दफ्तर जाकर किसी भी दिन अपनी 'हाँ' या 'ना' तीन रुपये का शुल्क देकर बदल सकेगा।
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(2.3) बीपीएल कार्ड धारक के लिए देय शुल्क 1 रू होगा।
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(2.4) कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकेगा जिससे मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ/ना की पुष्टि का एस.एम.एस उसके रजिस्टर्ड मोबाइल पर भेजा जा सके।
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(2.5) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम बना सकता है, जिससे मतदाता का फोटो तथा अंगुलीयों की छाप को रसीद पर डाला जा सके।
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(2.6) प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकेंगे जिससे मतदाता अपनी हाँ/ना 50 पैसे का शुल्क देकर एटीएम द्वारा दर्ज करवा सके।
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(2.7) प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है, जिससे मतदाता अपनी हाँ/ना 5 पैसे देकर एस.एम.एस. द्वारा दर्ज कर सके।
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3. [ सभी नागरिको, अधिकारियों, मंत्रियों, न्यायधीशों के लिए निर्देश ]
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(3.1) ये प्रक्रिया कोई जनमत-संग्रह या रेफेरेंडम नहीं है। मतदाताओ द्वारा दर्ज की गयी हाँ/ना किसी भी अधिकारी, मंत्री, जज, सांसद, विधायक आदि पर बाध्यकारी नहीं है। यदि भारत के 37 करोड़ नागरिक मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री उस शपथपत्र पर कार्यवाही कर सकते है या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है, या प्रधानमंत्री इस्तीफा दे सकते है, या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। प्रधानमन्त्री का निर्णय ही अंतिम होगा।
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(3.2) कलेक्टर धारा 2 के तहत दर्ज किये जाने वाले हाँ/ना को पंजीकृत करने के लिए एसएमएस आधारित एक सुरक्षित सिस्टम बना सकेगा और इस सिस्टम को प्रधानमंत्री की स्वीकृति से लागू कर सकेगा।
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====राजपत्र अधिसूचना का समाप्ति ===
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नागरिकों को चाहिए कि वे अपने क्षेत्र के सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि इस प्रस्तावित ड्राफ्ट को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
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