Pawan Jury BhilwaraRj
इस तथ्य के बावजूद कि 75% प्रतिनिधिमंडल और 80% कॉंग्रेसी जवाहर लाल गाजी की जगह वल्लभ भाई पटेल को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे, पटेल ने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया। क्यों ? वजह मशीनों के स्पेयर पार्ट्स पर निर्भरता थी !!
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1940 में कांग्रेस की 13 इकाइयां थी। प्रत्येक इकाई की इस विषय पर बैठक हुयी कि भारत का प्रथम प्रधानमत्री किसे होना चाहिए। कांग्रेस के लगभग 90% कार्यकर्ता वल्लभ भाई पटेल को पीएम बनाने के समर्थन में थे (उस समय तक वल्ल्भ भाई पटेल सरदार पटेल नहीं बने थे। वे सरदार तब बने जब सेना और पुलिस उनके नियंत्रण में आयी )। तब सिर्फ कश्मीर और पाकिस्तान क्षेत्र की दो अन्य इकाइयों ने जवाहर लाल के पीएम बनने का समर्थन किया था। किसी एक व्यक्ति के घूस खाकर पलट जाने की सम्भावना को कम करने के लिए प्रत्येक इकाई ने अपनी और से दो प्रतिनिधि भेजे। इस तरह कुल 26 प्रतिनिधियों में से 20 ने पटेल का जबकि सिर्फ 6 ने जवाहर लाल ग़ाज़ी के पीएम बनने का समर्थन किया। लेकिन बाद में पटेल खुद ही पीछे हट गए और उन्होंने प्रधानमंत्री के पद के लिए जवाहर लाल गाजी का अनुमोदन कर दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया ?
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कई लोगो का इस बारे में कहना है कि महादुरात्मा गांधी ने पटेल को पीछे हटने और गाजी का समर्थन करने को कहा था और पटेल ने उनकी बात मान ली। यह बात ठीक है कि महादुरात्मा गांधी ने जवाहर लाल के पीएम बनने और पटेल को पीछे हटने का आदेश दिया था। लेकिन सवाल यह है कि पटेल ने महादुरात्मा गांधी की आज्ञा का पालन क्यों किया ? क्योंकि महादुरात्मा गांधी के पास उस समय कोई बंदूक तो थी नहीं कि उन्होंने पटेल को गन पॉइंट पर ले लिया हो।
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और ऐसा भी नहीं था कि वल्ल्भ भाई पटेल अपने गुरुजनो का सम्मान करते थे। उदाहरण के लिए, जब वल्लभ भाई पटेल के बड़े भाई श्री विट्ठल भाई पटेल का देहावसान हुआ तो वे यह वसीयत कर गए थे कि, 'उनकी सकल सम्पत्तियों के वारिस राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बॉस होंगे, और वल्ल्भ भाई पटेल को इस सम्पत्ति में से एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी जानी चाहिए' !!! आज के बाजार भाव के अनुसार उन सम्पत्तियों की कीमत लगभग 200 करोड़ रुपये थी !! लेकिन वल्ल्भ भाई पटेल ने अपने बड़े भाई द्वारा ही कमाए गए रूपयों के इस्तेमाल के लिए व्यक्त की गयी उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करने से मना कर दिया !!! पटेल इस वसीयत को रद्द करवाने के लिए अदालत पहुंच गए !!! उन्होंने अदालत में बयान दिया कि मरने से पहले उनके बड़े भाई पगला गए थे, अत: उनकी वसीयत को रद्द किया जाना चाहिए। उस समय भी जज पूरी तरह से ब्रिटिश शासन के नियंत्रण में थे अत: उन्होंने इस वसीयत को रद्द करने का आदेश दिया और सारी सम्पत्ति का हकदार वल्ल्भ भाई पटेल को बना दिया। ( दरअसल विट्ठल भाई पटेल अपनी सारी सम्पत्ति राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस को देना चाहते थे ताकि वे देश को आजाद करवाने के लिए ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सेना खड़ी कर सके। बोस की तुलना में उन्हें वल्ल्भ भाई पटेल से बेहद कम उम्मीद थी।)
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मेरा बिंदु यह है कि -- श्री वल्ल्भ भाई पटेल ने अपने वरिष्ठजनो की इच्छा का कभी सम्मान नहीं किया। तब 90% कोंग्रेसियों के समर्थन के बावजूद उन्हें पीछे क्यों हटना पड़ा ?
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कारण -- मशीनों के स्पेयर पार्ट्स बहुत ही महत्त्वपूर्ण पहलू है।
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1) भारत में उस समय के धनिक पंचो ( FEF = Five elitemen families = टाटा, बिड़ला, डालमिया, साराभाई, बजाज ) के कारखानों की सभी मशीने ब्रिटेन से आयातित थी, तथा इन मशीनों के सभी स्पेयर पार्ट्स भी ब्रिटेन से ही आते थे। यदि ब्रिटेन इन मशीनों के कल पुर्जो के निर्यात को प्रतिबंधित कर देता तो ये पांचो दिवालिये हो जाते।
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2) महादुरात्मा गांधी के सभी ट्रस्टों और आश्रमों का खर्चा भी ये पांचो औद्योगिक घराने ही उठाते थे। महदुरात्मा गांधी का सारा शोशा इन्ही पर टिका हुआ था। महादुरात्मा गांधी के नाम पर चलाए जा रहे किसी भी ट्रस्ट आदि के खातों पर महादुरात्मा गांधी का कोई नियंत्रण नहीं था !!! उदाहरण के लिए महादुरात्मा गांधी द्वारा लिखें गए सभी स्तंभों को पहले सम्पादन के लिए इन उद्योगपतियों द्वारा नियुक्त अधिकारी की नजर से गुजरना होता था, पश्चात ही इन्हे समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाता था !! जैसे, आज महात्मा अरविंद गांधी जो भी कानून ड्राफ्ट बनाते है उन्हें पहले फ्रॉड फाउंडेशन द्वारा सम्पादित किया जाता है, और वांछित बदलावों के बाद ही इन कानूनों को गवर्नर के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है।
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3) ब्रिटिश अधिकारियों ने इन पांचो उद्योगपतियों को आदेश दिया कि वे जवाहर लाल गाजी का पीएम बनना सुनिश्चित करें।
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4) अत: इन उद्योगपतियों ने महादुरात्मा गांधी को आदेश दिया कि वे पीएम पद के लिए वल्ल्भ भाई पटेल का विरोध और जवाहर लाल गाजी का समर्थन करें। और महदुरात्मा गांधी ने ऐसा ही किया।
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5) इन्ही उद्योगपतियों ने वल्ल्भ भाई पटेल को पीछे हटने को कहा !!! और इसीलिए पटेल ने अपने कदम पीछे खींच लिए।
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इसके अलावा जब भारत के प्रधानमंत्री का फैसला हो रहा था तब भारत की सेना ब्रिटिश के नियंत्रण में थी। अत: ब्रिटिश ने कॉंग्रेसी नेताओं को धमकाया कि यदि उन्होंने उनकी शर्ते नहीं मानी तो वे सत्ता भारत की सेना को हस्तांतरित करके चले जाएंगे। हालांकि यह एक खोखली धमकी थी, क्योंकि ब्रिटिश यह बात जानते थे कि सेना के बदले कॉंग्रेसी नेताओं को सत्ता की बागडोर देना उनके कहीं ज्यादा हित में है। लेकिन कांग्रेस के नेता इस तरह का 1% भी जोखिम उठाने को तैयार नहीं थे !!!
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तो उपरोक्त कारणों के चलते वल्लभ भाई पटेल ने 90% कोंग्रेसियों के समर्थन के बावजूद पीएम की अपनी उम्मीदवारी से कदम वापिस खींचे और जवाहर लाल गाजी का समर्थन करने को राजी हुए।
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और अंत में, आखिर क्यों कोंग्रेसियो ने पीएम के पद के लिए वल्ल्भ भाई का समर्थन और जवाहर लाल गाजी का विरोध किया था ? क्योंकि वे जवाहर लाल गाजी की उन सभी हरकतों से वाकिफ थे जिनसे हम आज परिचित है !!!
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हमें यह जानकारी देश के सभी नागरिकों तक पहुंचानी चाहिए।
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कहानी का सबक यह है कि --- 'हमें भारत में ही और अनिवार्य रूप से भारतीयों द्वारा ही सुई से लेकर हवाई जहाज तक सभी उपकरणों का निर्माण करना चाहिए, न कि आयात'। सिर्फ कच्चा माल ही आयात किया जाना चाहिए। और ऐसा तभी संभव है जब हम भारत में निर्माण प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए आवष्यक कानूनों को देश में लागू करें। कौनसे कानूनों से हम ऐसी तकनीक जुटा सकते है ? हमारा प्रस्ताव है कि हमें टीसीपी, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टैक्स, राईट टू रिकॉल आदि कानूनों को गैजेट में प्रकाशित करने के प्रयास करने चाहिए। इन कानूनों के आने से भारत में निर्माण प्रौद्योगिकी का विकास होगा और भारत तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकेगा। अत: हमारा सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि कृपया इन कानूनों को देश में लागू करवाने के लिए प्रयास करें।
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