Pawan Jury BhilwaraRj
काम पसंद न आये तो लात मारकर बाहर कर देना -- मोदी साहेब
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http://goo.gl/4NPR3Z
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मोदी साहेब ने यूपी की चुनावी रैली में नागरिकों से कहा है कि, यदि हम उम्मीदों पर खरे न उतरे तो 5 साल बाद हमें लात मार कर बाहर कर देना !!
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मैं मोदी साहेब से मांग कर रहा हूँ कि मुझे अपने प्रतिनिधियों को लात मारकर नौकरी से बाहर निकालने का अधिकार दिया जाए।
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मोदी साहेब की नीति में कपट है। क्योंकि वे जनता को लात मारने के लिए तो कह रहे है लेकिन लात मारने का अधिकार देने का विरोध कर रहे है।
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पहली बात तो यह कि नेता को लात मारकर सत्ता से बाहर निकालने के अधिकार को 'राईट टू रिकॉल' कहते है। निजी क्षेत्र में मालिक के पास अपने कर्मचारियों को किसी भी समय लात मारने का अधिकार होता है। लात खाने के इसी भय से निजी क्षेत्र में कर्मचारी मनोयोग से काम करते है, वरना लातें खाते है। अमेरिका के नागरिकों के पास अपने नेताओ को किसी भी समय लात मारकर बाहर निकालने का अधिकार है, इसीलिए वहां के नेता लात खाने के भय से ग्रस्त होकर अपेक्षाकृत ईमानदारी से काम करते है, वर्ना लातें खाते है। भारत के नेता वोट लेने के बाद अगले 5 साल तक जनता के लातें इसीलिए लगाते है, क्योंकि वे जानते है कि भारत के मतदाता चाह कर भी उन्हें लात नहीं मार सकेंगे। यदि मारना भी चाहेंगे तो उनकी लातें उन तक पहुंचेगी नहीं।
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मोदी साहेब का कहना है कि यदि उनका काम पसंद नहीं आये तो नागरिक उन्हें 5 साल बाद लात मारकर बाहर निकाल सकते है। लेकिन मोदी साहेब भारत के मतदाताओं को 5 साल से पहले अपने नेताओ को किसी भी समय नौकरी से निकालने का अधिकार देने का विरोध कर रहे है। 5 साल बाद नेता को लात मारने की जरूरत ही नहीं होती। भारत के संविधान के अनुसार सरकार स्वत: ही भंग हो जाती है, और उम्मीदवारों को फिर से चुनाव में जीतकर आना होता है।
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तो इस प्रकार मोदी साहेब नागरिकों को उकसा तो रहे है कि वे उन्हें लात मारकर बाहर निकाल सकते है, लेकिन साथ ही वे नागरिकों को लात मारने के अधिकार यानी 'राइट टू रिकॉल' की प्रक्रिया देने का विरोध कर रहे है !!
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यदि आप भी मोदी साहेब के इस बयान से सहमत है कि भारत के मतदाताओं को अपने नेताओ को लात मारकर बाहर निकालने का अधिकार होना चाहिए तो राईट टू रिकॉल मुख्य्मंत्री के इस कानूनी ड्राफ्ट का समर्थन करें। इस क़ानून के आने से किसी राज्य के मतदाताओं को 5 साल तक इन्तजार नहीं करना पड़ेगा। वे जब भी चाहे अपने मुख्य्मंत्री के लात मारकर नौकरी से निकाल बाहर कर सकेंगे।
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मुख्य्मंत्री को लात मारकर बाहर निकालने के अधिकार की प्रक्रिया का लिंक -- https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/811071415677763
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मैं भाषा के इस प्रयोग से असहमत हूँ। पीएम को शिष्टता से पेश आना चाहिए। ध्वनित कुछ यूँ हो रहा है कि वाजपेयी को नागरिकों ने 2004 में लात मारकर बाहर कर दिया था। चुनाव में हार जीत लगी रहती है, किन्तु इसे लात खाने से जोड़ देना सभ्य मिसाल नहीं है। बहरहाल हमने हमेशा राईट टू रिकॉल को नौकरी से निकालने का अधिकार कह के पुकारा है, लेकिन मोदी साहेब ने इसकी व्याख्या को 'लात मारकर बाहर निकालने का अधिकार' तक विस्तृत कर दिया।
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