Pawan Jury BhilwaraRj
सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भगतो की अनुशासित प्रकृति के आयाम -- I , II
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( लेख सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्तो और कांग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी के कार्यकर्ताओ की फितरत के इस पहलू का खुलासा करता है कि, आखिर क्यों ये लोग राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टैक्स, टीसीपी और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के कानूनों का विरोध करते है। साथ ही यह लेख इस बात को भी उजागर करता है कि :
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सोनिया=मोदी=केजरीवाल तीनो एक ही है, मतलब साथ बैठ कर एक ही थाली से चाटते बांटते है। इन तीनो में अंतर सिर्फ रस्मी है, बुनियादी तौर पर ये एक जैसे है। मिसाल के लिए एफडीआई, सुप्रीम कोर्ट की नागरिकों पर सर्वोच्चता आदि जैसे जरूरी मामलो पर इनकी राय समान है।
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कांग्रेस=बीजेपी=आम पार्टी=संघ=भारत स्वाभिमान ट्रस्ट आदि संगठन भी एक जैसे है और इनके कार्यकर्ताओ के सिर से टोपियाँ निकाल दी जाए तो इनमे भी कोई अंतर् नहीं रह जाएगा।
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यह लेख यह भी बताता है कि चूंकि सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भगत भक्ति की पराकाष्ठा को छू चुके है, इसीलिए वे राईट टू रिकॉल आदि क़ानून ड्राफ्ट्स का विरोध करते है )
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(1) सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्तो का अनुशासन --- I
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एक बार किसी क्षेत्र विशेष में सोनिया-मोदी-केजरीवाल अपने अंधभक्तो को उपदेश देना चाहते थे। लेकिन अमुक जगह के श्रोता न तो हिंदी जानते थे न ही अंग्रेजी, वे केवल स्थानीय भाषा में ही उपदेश ग्रहण कर सकते थे। और सोनिया-मोदी-केजरीवाल स्थानीय भाषा से अनभिज्ञ थे।
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तब सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने अनुवादक की सेवायें लेने का निश्चय किया। तय यह पाया था कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल 2-5 मिनिट की किश्तों में भाषण देंगे और अनुवादक इस भाषण का अनुवाद स्थानीय भाषा में करके अंध भगतो को सुनाएगा।
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भाषण के दौरान सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने एक 2-3 मिनिट का चुटुकला सुनाया। सोनिया-मोदी-केजरीवाल को अंदेशा था कि, 'क्या अनुवादक चुटुकला सुनाने के ढंग और टोन को हूबहू उच्चारित कर पाएगा' ? क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया गया तो चुटुकले का हास्यबोध जाता रहेगा। पर अनुवादक ने आश्चर्यजनक ढंग से 2-3 मिनिट के चुटुकले का अनुवाद सिर्फ कुछ सेकंड में ही सुना दिया और सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभगत हसंते हसंते लोट पोट हो गए। जब सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने अपने अंधभगतो को ठहाको का अट्टहास करते देखा तो उन्हें काफी संतोष हुआ।
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भाषण के बाद सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने अनुवादक से पूछा कि -- 'तुमने इतने जटिल और लम्बे चुटुकले को इतने छोटे में अनुवाद करके कैसे सुनाया' ?
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अनुवादक ने जवाब दिया कि -- 'अरे नहीं। मैंने उन्हें पूरा चुटुकला थोड़े ही सुनाया था। वो तो मुझे भी समझ नहीं आया। मैंने स्थानीय भाषा में उन्हें सिर्फ एक वाक्य कहा और वे जोर से जोर से हंसने लगे'।
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने पूछा, 'और क्या था वो वाक्य' ? अनुवादक ने जवाब दिया -- 'मैंने उनसे कहा कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने एक बड़ा मजेदार चुटुकला सुनाया है। बस फिर क्या था, उन्हें हंसना ही था। और वे खूब जोर जोर से हंसे' !!!
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ये जवाब सुन कर सोनिया-मोदी-केजरीवाल भी बहुत खुश हो गए और जोर जोर से हंसने लगे।
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(2) सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्तो का अनुशासन --- II .
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एक हास्य कलाकर कॉमेडी के पेशे में अपना कैरियर बनाना चाहता था। उसने सोनिया-मोदी-केजरीवाल से अनुरोध किया कि वे भीड़ दिखाने के लिए अपने अंधभगतो को भेजे। सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने अपने अंधभक्तो और कॉग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी-संघ-भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओ को उस कॉमेडियन का कॉमेडी शो "अटेंड" करने के लिए कहा। कॉमेडियन ने सिर्फ सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्तो और कॉग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी-संघ-भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओ के लिए एक विशेष शो का आयोजन किया।
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कॉमेडियन ने शो की शुरुआत निचे दिए गए चुटुकलो से की :
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संता एक पेड़ पर चढ़ रहा था।
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उसे देख बंता ने पूछा -- 'संता, तुम पेड़ पर क्यों चढ़े जा रहे हो' ?
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संता ने कहा, 'मैं नारियल पानी पीना चाहता हूँ'।
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बंता बोला, 'लेकिन यह पेड़ तो खजूर का है'।
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संता ने जवाब दिया, 'मुझे मालूम है। इसीलिए तो मैं नारियल साथ लेकर चढ़ रहा हूँ'।
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कॉमेडियन को लगता था कि यह बहुत ही मजाकिया चुटुकला है। पर इस चुटुकले को सुनकर सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्तो और कॉग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी-संघ-भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओ में से कोई मिनका भी नहीं, हंसना तो दूर की बात है। सब के सब अजीब नजरो से कॉमेडियन को देखते रहे।
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इसी प्रकार कॉमेडियन एक के बाद एक मजेदार जोक सुनाता रहा, लेकिन कोई नहीं हंसा। सभी अंधभगत पूरे शो के दौरान घोड़े जैसा मुंह लटकाकर खड़े रहे।
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अंत में शो ख़त्म होने पर कॉमेडियन ने एक वरिष्ठ और घुटे हुए अंघभगत से पूछा कि, 'आखिर मेरे किसी भी चुटुकले पर कोई भी अंधभगत क्यों नहीं हंसा, क्या मेरे चुटुकले इतने घटिया थे' ?
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वरिष्ठ अंधभगत ने जवाब दिया , 'अरे नहीं वैसी बात नहीं है। चुटुकले तो अच्छे थे। पर सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने हमें सिर्फ शो "अटेंड" करने के निर्देश दिए थे हंसने के लिए तो उन्होंने कुछ कहा ही नहीं। तो इसीलिए हमने शो अटेंड किया पर हंसे नहीं'।
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(3) क्यों सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्त और कॉग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी-संघ-भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल और ज्यूरी सिस्टम कानूनों का विरोध करते है ?
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इसके लिए आपको सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्तो और कॉग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी-संघ-भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओ की फेसबुक वॉल देखनी चाहिए। आप उनकी वॉल पर 200 पोस्ट भी देखेंगे तो आपको राईट टू रिकॉल और ज्यूरी सिस्टम के समर्थन में एक पोस्ट भी ढूंढें नहीं मिलेगी। आप ऐसी एक भी पोस्ट पाएंगे जो मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का समर्थन करती हो। वहां आपको राईट टू रिकॉल कानूनों के पर्चो के वितरण के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलेगी न ही वे आपको हिन्दू धर्म के प्रशासन को मजबूत बनाने के कानूनों का समर्थन करते नजर आएंगे। इन सभी गतिविधियों का अभाव यह स्पष्ट करता है कि वे राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम आदि कानूनों का विरोध करते है।
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तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्त और कॉग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी-संघ-भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल और ज्यूरी सिस्टम कानूनों का विरोध क्यों करते है ?
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जवाब सीधा है -- क्योंकि सोनिया-मोदी-केजरीवाल राईट टू रिकॉल और ज्यूरी सिस्टम कानूनों का विरोध करते है। और सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने अपने अंधभक्तो को ये साफ़ निर्देश दे रखे है कि वे राईट टू रिकॉल कानूनों का विरोध करते है इसीलिए उन्हें भी इन कानूनों का किसी भी कीमत पर समर्थन नहीं करना है।
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तस्दीक करने के लिए आपको सोनिया-मोदी-केजरीवाल का फेसबुक और ट्विटर एकाउंट देखना चाहिए। आप पाएंगे कि वहां पर राईट टू रिकॉल, टीसीपी, वेल्थ टैक्स और ज्यूरी सिस्टम का समर्थन करने वाली और जीएसटी/वैट आदि का विरोध करने वाली कोई पोस्ट नहीं है।
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इसके अलावा यदि यह मान भी ले कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभगत राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम कानूनों का समर्थन करते है तो फिर यहाँ उनके लिए यह प्रश्न खड़ा होता है कि, 'क्या उन्होंने सोनिया-मोदी-केजरीवाल से ट्विटर/फेसबुक पर या एसएमएस भेजकर राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम कानूनों को गैजेट में प्रकाशित करने के लिए कहा है' ? न तो उन्होंने ऐसा कभी किया है और न ही वे ऐसा करेंगे। क्योंकि वे जानते है कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल इन कानूनों को गैजेट में कभी भी प्रकाशित नहीं करेंगे और इसीलिए वे इन कानूनों को गैजेट में छापने की कह कर उनकी इज्जत नहीं गिराना चाहते। तो ऐसे हालात में 'सर्वश्रेष्ठ' रणनीति यही है कि राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम क़ानून ड्राफ्ट्स का विरोध किया जाए !!!
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दूसरे शब्दों में, 'हर हाल में नेता का अनुसरण' छाप "अनुशासन" ने सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्तो और कॉग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी-संघ-भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओ को राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, टीसीपी, वेल्थ टैक्स और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के क़ानून ड्राफ्ट्स का विरोध करने के लिए बाध्य कर दिया है।
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तो यदि आप एक सच्चे कार्यकर्ता है और भारत में राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टैक्स, टीसीपी, एमआरसीएम, आदि कानूनों को देश में लागू करवाना चाहते है और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करना चाहते है तो आपको सोनिया-मोदी-केजरीवाल के पीछे अपनी ऊर्जा नष्ट करने की जगह इन कानूनों को लागू करवाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
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