Pawan Jury BhilwaraRj

गूगल भारत के सभी एंड्रॉयड फोन्स को मिनिट से पहले हमेशा के लिए बंद कर सकता है !! और मामला इतना भर नहीं है, यह इससे कहीं ज्यादा है !!
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यदि अमेरिकी सरकार चाहे, और यदि अमेरिकी सरकार गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट को ऐसा करने का आदेश दे तो वे भारत में काम कर रहे सभी एंड्रॉयड फोन्स, आई फोन्स, और नोकिया के फ़ोन्स को बंद कर सकते है, और साथ ही वे सभी कम्प्यूटर्स और डिवाइस भी जिनमे विंडो प्रोग्राम है जब नेट के संपर्क में आएंगे तो गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट 'किल कमांड' (KILL COMMANDS) का प्रयोग करके कुछ ही घंटो में इन्हे कबाड़ बन सकते है !
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कृपया 'हार्डवेयर ट्रोजन सीरिया रडार इस्राएल' पर गूगल करें --http://goo.gl/l89zii
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यह वेबपेज कहता है :
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पिछले सितम्बर को के इस्राएली जेट ने सीरिया के उत्तर पूर्व इलाके में स्थित परमाण्वीय ठिकाने पर बमबारी की। कई पहेलियों के बीच यह रहस्य भी गहरा रहा है कि यह हमला सीरिया के रडार के फेल हो जाने के कारण सम्भव हुआ। यह रडार अपनी श्रेणी में काफी उन्नत है इसका इस्तेमाल दुश्मन के हमले की पूर्व सूचना प्राप्त करने में किया जाता है। रक्षा विशेषज्ञों को कहना है कि यह घटना सामान्य नहीं है बल्कि सम्बन्ध 'इलेक्ट्रॉनिक वार फेयर' से है।
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इस सम्बन्ध में विशेषज्ञों द्वारा लगातार यह कयास लगाए जाने लगे कि सीरिया के रडार के माइक्रोप्रोसेसर को बैकडोर का इस्तेमाल करके पहले से इंस्टॉल किये गए ट्रोजन की सहायता से नाकाम कर दिया गया। रडार में लगे गए चिप को एक प्रोग्राम्ड कोड के माध्यम से कमांड भेजी गयी और रडार ने कुछ समय के लिए काम करना बंद कर दिया।
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और अब 'फ़ॉकलैंड वॉर फ़्रांस एक्जोसेट मिसाइल' पर भी गूगल करें -- http://goo.gl/0lwssd
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यह वेबपेज कहता है :
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1982 में फ़ॉकलैंड युद्ध के दौरान मार्ग्रेट थेचर ने फ़्रांस के राष्ट्रपति पर दबाव बनाकर उन मिसाइलों के कील स्विच कोड ले लिए थे जिन मिसाइलों की सप्लाई फ़्रांस ने अर्जेंटीना को की थी और इस एक्सोसेट मिसाइलों का इस्तेमाल अर्जेंटीना ब्रिटिश फ़ौज के खिलाफ कर रहा था। ये कोड मिलने के बाद ब्रिटिश द्वारा इन मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया गया। ऐसा जोखिम उठाना भारत के हक़ में बहुत ही खतरनाक है।
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दूसरे शब्दों में हम फ़्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन आदि से जितने में हथियार आयात कर रहे है उन सभी में किल स्विच इंस्टॉल्ड है !! और भारत के दूर संचार क्षेत्र में इस्तेमाल किये जा रहे सभी इलेक्ट्रॉनिक और संचार उपकरण भी आयातित है। कोई गारंटी नहीं कि ये सभी उपकरण भी किल स्विच से लैस नहीं है। इतना ही नहीं सभी जनरेटर और ट्रांसफॉर्मर्स भी आयातित है और हमें नहीं पता कि उनमे भी किल स्विच है या नहीं।
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कुल मिलाकर सोनिया-मोदी-केजरीवाल की एफडीआई, एफडीआई एफडीआई और आयात, आयात, आयात और एफडीआई और आयात की नीति और फिर इसे 'मेक इन इण्डिया' पर मेड बॉय यूएसए-यूके का मतलब है कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था में इतना बड़ा छेद हो गया है कि हमने शेर की सवारी नहीं की है बल्कि शेर को ही खुद पर सवार कर लिया है।
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समाधान यह है कि -- हमें हथियार, दूर संचार उपकरण, मोबाइल फोन्स, ऑपरेटिंग सिस्टम आदि का निर्माण 100% भारत में ही करना चाहिए और अनिवार्य रूप से इनका उत्पादन 'सिर्फ भारतीयों द्वारा' ही किया जाना चाहिए। वरना हम लड़ने की हालत में भी नहीं रहेंगे और बिना लड़े ही समर्पण करते चलेंगे। सिर्फ 'मेड इन इण्डिया, मेड बॉय इन्डियन' की नीति से ही हम आत्मनिर्भर हो सकते है।
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कैसे हम भारत में आधुनिक स्वदेशी हथियारों और उपकरणों के निर्माण की प्रौद्योगिकी जुटा सकते है ? देखिये, भारत की फैक्ट्रियां बुरी हालत में है, गणित-विज्ञान का बुनियादी ढांचा टूटा हुआ है, न्यायलयों में वर्षो तक मुकदमों का फैसला नहीं आ पाता, जटिल कर प्रणाली और भ्र्ष्टाचार ने निर्माण उद्योग का गला दबा के रखा है. और इस कारण कारखानों की उत्पादकता गिरती है और हम बेहतर प्रदर्शन करने में पिछड़ रहे है। समाधान के लिए हमारा प्रस्ताव है कि निर्माण प्रौद्योगिकी में सुधार के लिए वेल्थ टैक्स, ज्यूरी सिस्टम, राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी आदि कानूनों को लागू किया जाए और वैट/जीएसटी/एक्साइज आदि करो को निरस्त किया जाए।
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इन कानूनों के आने से भारत के निर्माण उद्योग की उत्पादकता में सुधार होगा और हम तकनीक के क्षेत्र में अमेरिका की बराबरी पर आ जाएंगे। मेरे विचार में इन कानूनों के अभाव में भारत तबाह हो जाएगा और हमारे पास बचने का कोई रास्ता नहीं रहेगा।
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