Pawan Jury BhilwaraRj
चीन में लगातार भ्रष्टाचार क्यों बढ़ रहा है ? और इसका समाधान ?
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अमेरिका के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए चीन ने अपने निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने का फैसला किया। निर्माण उद्योग/व्यवसायिक इकाइयों को कारोबार करने के लिए प्रोत्साहन देने की नीति के चलते चीन के पास उद्योगों को दी जाने वाली नियमित अनुमतियाँ देने का अधिकार कनिष्ठ अधिकारियों के विवेकाधीन कर देने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा था।
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और ठीक इसी समय चीन के शीर्ष नेता कनिष्ठ अधिकारियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम और जनमत संग्रह प्रक्रियाओं का विरोध कर रहे थे। अंकुश न होने की वजह से कनिष्ठ अधिकारी बेलगाम होकर भ्रष्टाचार करने लगे। भ्रष्टाचार के कारण वे ज्यादातर फैसले उद्योग मालिकों के पक्ष में और श्रमिकों-कर्मचारियों के खिलाफ लेने लगे। कार्य घंटे बढ़ने और वेतन घटने से श्रमिकों-कर्मचारियों के शोषण में वृद्धि होगी और उनकी अतिरिक्त आय में कमी आएगी। नतीजतन उनके हुनर में सुधार के अवसर घटेंगे और अपने खुद के व्यवसाय शुरू करने की उनकी क्षमता घट जायेगी।
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इसके अलावा सामान्य रूप से देखा गया है कि जब कोई पूर्व कर्मचारी अपना स्वयं का कारोबार/कारखाना शुरू करता है तो उसके पूर्व नियोक्ता द्वारा अमुक कर्मचारी पर कॉपीराइट ट्रेड मार्क का उलंघन करने, ग्राहक सूची चुराने, स्टाफ तोड़ने आदि के आरोप लगाए जाते है। ऐसी स्थिति में यदि मुकदमा जज के पास जाता है तो अधिकतर मामलो में जज घूस खाकर पूर्व नियोक्ता के पक्ष में ही फैसले देता है जिससे नए कारोबारियों के बाजार में आने की सम्भावनाऐं घट जाती है !!! साथ ही इससे कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और नए आविष्कारों के अवसर भी सिकुड़ जाते है। क्योंकि वेतन वृद्धि और आविष्कार 'नए कर्मचारियों' पर निर्भर करते है अधिकारियों पर नहीं। अधिकारी भी वेतन वृद्धि और आविष्कार में योगदान देते है लेकिन ऐसा सिर्फ नए प्रतिस्पर्धियो के बाजार में आने से होता है।
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( अतिरिक्त - इस सन्दर्भ में कुछ सामान्य सिद्धांत है, जो कि चीन ही नहीं बल्कि सभी देशो पर समान रूप से लागू होते है )
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निर्माण इकाइयों और कारोबारियों को अधिनियमित करने के लिए कनिष्ठ अधिकारियों को कुछ 'विवेकाधिकारो' की जरुरत होती है, ताकि व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को त्वरित और आसान बनाया जा सके। ऐसी स्थिति में यह कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है कि कनिष्ठ अधिकारी इन विवेकाधिकारो का इस्तेमाल घूस खाने में नहीं करेंगे ? इसके लिए उपलब्ध विकल्प इस प्रकार है -- शीर्ष अधिकारियों द्वारा इन पर नजर रखी जाए, नियुक्तियाँ सिर्फ लिखित परीक्षाओं द्वारा हो, स्थानांतरण, ज्यूरी सिस्टम, राईट टू रिकॉल आदि। लेकिन कार्पोरेटर के पद को छोड़कर चीन के शीर्ष अधिकारियों ने अन्य पदों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं, ज्यूरी सिस्टम, जनमत संग्रह आदि का विरोध किया, और वे शीर्ष अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण, लिखित परीक्षाओं द्वारा नियुक्ति एवं स्थानांतरण के तरीकों का इस्तेमाल करते रहे।
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शीर्ष अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण किये जाने से अनुमोदन के लिए लम्बा इन्तजार करना होता है, जिससे मझौले और निचले स्तर पर कार्यों की गति धीमी हो जाती है और उत्पादकता गिरती है।
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जब चीन के नेताओ ने देखा कि अमेरिका से मुकाबला करने के लिए निर्माण उद्योग की गति बढ़ाना आवश्यक है तो उन्होंने सन् 2000 में व्यवसायिक अनुमोदनों के अधिकार कनिष्ठ और निचले क्रम के अधिकारियों को देने शुरू किये, लेकिन उन पर अंकुश रखने के लिए आवश्यक राईट टू रिकॉल ज्यूरी सिस्टम, जनमत संग्रह आदि कानूनों का विरोध किया !! अधिकारों में वृद्धि से कनिष्ठ अधिकारीयों की शक्ति बढ़ी और नियंत्रण के अभाव में वे भ्रष्ट हो गए।
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अमेरिका ने भी निर्माण उद्योग को गति देने के लिए अपने कनिष्ठ और निम्न अधिकारियों को व्यापक अधिकार दिए, किन्तु राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, मल्टी इलेक्शन और जमनत संग्रह प्रक्रियाओं ने उन्हें भ्रष्ट आचरण करने से रोका। तो इस प्रकार अमेरिका के कनिष्ठ अधिकारीयों के पास चीन के कनिष्ठ अधिकारियों की तुलना में अधिक शक्तियां होने के बावजूद उनमे बेहद कम भ्रष्टाचार पनपा।
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कृपया ऊपर लिखे गए लेख को आद्योपांत पुन: पढ़ें।
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( अब फिर से हम चीन के विषय पर लौट आते है )
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तो इस प्रकार जब चीन में श्रमिकों की आय और उनकी तरक्की के अवसर गिरेंगे तो उनमे कुंठा व निराश बढ़ेगी, और इससे मिशनरीज को सबसे ज्यादा फायदा होगा !!! परिणामस्वरूप हमें जल्दी ही चीन में मिशनरीज के गतिविधियों में सरगर्मी देखने को मिलेगी और धर्मांतरण में तेजी आएगी।
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कुल मिलाकर अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने के लिए चीन ने अपने मझौले और निम्न अधिकारीयों के अधिकारों में वृद्धि की लेकिन उन पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक राईट टू रिकॉल. ज्यूरी सिस्टम, जनमत संग्रह आदि क़ानून प्रक्रियाओं का विरोध किया, जिससे कनिष्ठ अधिकारी अमीर वर्ग से घूस खाकर अमीरों के पक्ष में और गरीबो के खिलाफ अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करने लगे।
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और इस प्रकार जल्दी ही अमेरिका चीन को पराजित कर देगा।
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समाधान ?
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देखिये, चीन हर मामले में भारत की तुलना में बहुत अच्छी हालत में है। जब मैं चीन के भ्रष्टाचार के बारे में लिख रहा हूँ तो मैंने चीन की तुलना अमेरिका से की है, भारत से नहीं !! भारत के मुकाबले चीन में भ्र्ष्टाचार बेहद कम है।
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तो मेरे विचार में हमें भारत में फैली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि भारत की हालत चीन की तुलना में ज्यादा खराब है। यदि इतनी बदहाल हालत में होने के बाद भी हम चीन को सलाह देंगे तो दुनिया हम पर हँसेगी।
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