Pawan Jury BhilwaraRj

राईट टू एजुकेशन क़ानून में लिखा है कि, प्रत्येक निजी स्कूल को अपनी कुल सीटों की 25% सीटें 'गरीब बच्चों' को आवंटित करनी होगी। और इसी कानून में यह भी लिखा है कि मिशनरीज द्वारा संचालित स्कूलों पर यह नियम लागू नहीं होगा !!!
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कृपया इस बात पर भी ध्यान दें कि -- कांग्रेस, बीजेपी के सांसदों ने 2012 में संसद में मिशनरीज को यह छूट दिए जाने का समर्थन किया था। और आम आदमी पार्टी भी अब इसका समर्थन कर रही है।
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मैं इसे फिर से दोहराता हूँ -- कांग्रेस, बीजेपी के सांसदों ने मिशनरीज को यह छूट देने का संसद में समर्थन किया था और आम आदमी पार्टी भी अब इसका समर्थन कर रही है।
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हद तो यह है कि हिंदूवादी संगठन आरएसएस भी मिशनरीज को यह छूट दिए जाने का समर्थन कर रहा है !!
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राईट टू एजुकेशन क़ानून में दर्ज इस प्रावधान के कारण कई छोटे और मझौले स्तर के स्कूल बंद हो गए है !!! क्योंकि यदि वे कुल सीटों की 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आवंटित करते है तो उन्हें भरपाई के लिए शेष 75% छात्रों की फ़ीस में 33% की बढ़ोत्तरी करनी होती है। और जब वे ऐसा करते है तो अभिभावक स्कूल बदलने का फैसला ले लेते है , जिससे स्कूल प्रबंधन को दोहरी मार झेलनी पड़ती है !!!
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और इस तरह ऐसे कई स्कूलों को मिशनरीज टेक ओवर कर ले रही है।
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दूसरे शब्दों में कांग्रेस, बीजेपी और आप, तीनो ही पार्टियां शिक्षा व्यवस्था में मिशनरीज के नियंत्रण को बढ़ावा दे रही है।
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समाधान ?
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समाधान के लिए हमारा प्रस्ताव है कि राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी, राईट टू रिकॉल राज्य मंत्री, राईट टू रिकॉल केंद्रीय शिक्षा मंत्री, स्कूल स्टाफ पर ज्यूरी प्रक्रियाएं, सात्य प्रणाली आदि कानूनों को गैजेट में प्रकाशित किया जाए। विवरण के लिए कृपया राईट टू रिकॉल पार्टी के घोषणा पत्र में अध्याय 30 देखें --- https://www.facebook.com/groups/righttorecallparty/10152114637883103/
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इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा। इसके अलावा हमारे द्वारा प्रस्तावित क़ानून के अनुसार निजी स्कूलों में फ़ीस निर्धारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा और उनसे निजी कम्पनियों की तरह ही कर वसूले जायंगे। निजी स्कूलों को ठीक करने के लिए ये प्रावधान काफी है। क्योंकि हमारे विचार में निजी स्कूलों को अपना व्यवसाय करने की छूट दी जानी चाहिए और उन पर इसके अलावा अन्य कोई बोझ डालना उचित नहीं।
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सोनिया, मोदी, और केजरीवाल राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी, सात्य सिस्टम आदि प्रस्तावित क़ानूनो का विरोध कर रहे है।
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तो यदि आप भारत में शिक्षा का स्तर सुधारना और शिक्षा व्यवस्था को मिशनरीज के नियंत्रण में जाने से बचाना चाहते है तो आपको सोनिया, मोदी और केजरीवाल को कूड़ेदान के हवाले करके अच्छे कानूनों को देश में लागू करने के प्रयास करने चाहिए।
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