Pawan Jury BhilwaraRj

जब अंग्रेज भारत छोड़कर जाने वाले थे 1945 से 1947 के बीच उन्होंने अपने कुछ 200 वफादार घरानों को बहुत सारी जमीने हस्तांतरित की थी !!! इन घरानों ने 1920 से 1947 तक और आजादी के बाद भी कांग्रेस, संघ/बीजेपी/जनसंघ और सीपीएम को अनुदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी !!!
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हम रिकालिस्ट्स यह मांग कर रहे है कि देश के सभी भू स्वामियों के नाम सार्वजनिक किये जाए और साथ ही उन भूखंडों के विवरण भी रखें जाए जिन पर भू स्वामियों ने ट्रस्टों, कम्पनियों एवं पॉवर ऑफ़ एटॉर्नी आदि के माघ्यम से मालिकाना हक़ ग्रहण किया हुआ है। सोनिया, मोदी और केजरीवाल भू स्वामित्व के रिकॉर्ड सार्वजनिक किये जाने के ऐसे क़ानून का विरोध कर रहे है। और इसीलिए इन सभी के अंध भगत और संघ के स्वयसेवक भी इस क़ानून के खिलाफ है। इस क़ानून के लागू होने के बाद जब आप किसी व्यक्ति - जैसे कि 'राहुल मेहता'- का नाम मतदाता संख्या के साथ सरकारी वेबसाइट पर टाइप करेंगे तो आपको वेबसाइट उन सभी भूखंडों, प्लॉट्स, फ्लेट्स आदि का विवरण दिखाएगी, जो कि राहुल मेहता या उनके ट्रस्ट्स, कम्पनियों आदि के स्वामित्व में है।
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हमारा दूसरा प्रस्ताव है कि पिछले 100 साल के दौरान किये गए 'सभी' भूमि हतांस्तरणो के लेखे और उनके विवरण सार्वजनिक किये जाए। जब इन विवरणों को सार्वजनिक किया जाएगा तो यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आएगी कि, 'जो 200 घराने कांग्रेस, संघ/बीजेपी/जनसंघ और सीपीएम को वित्तीय अनुदान दे रहे थे उन्हें अंग्रेजो ने 1945 से 1947 के बीच कितनी बड़ी मात्रा में भूमि हस्तांतरित की थी '!!!
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और यह घराने 1857 से ही अंग्रेजो के बेहद वफादार रहे थे !!!
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तो सवाल यह है कि अंग्रेज उन घरानों को क्यों समृद्ध करेंगे जो कांग्रेस, आरएसएस और सीपीएम को वित्तीय सहायता दे रहे थे ?
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इस सवाल का जवाब हमे तब ही मिल सकेगा जब भारत के सभी भू स्वामियों के रिकॉर्ड्स और 1 जनवरी 1900 से आज तक के सभी भू हस्तन्तरणो के अभिलेख सार्वजनिक कर दिए जाए।
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जब यह होगा तो सभी को मालूम हो जाएगा कि कांग्रेस और संघ दोनों की गोत्र एक ही है !!!
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