Pawan Jury BhilwaraRj
किस तरह डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने मुझे "पथभ्र्ष्ट" होने से बचा लिया था !
.
"जब हम कॉलेज में पढ़ रहे थे तो भगत सिंह जी के क्रांतिकारी विचारों से बहुत प्रभावित थे। हमारे दिमाग में अक्सर बार बार यह ख्याल आता कि हमे भी भगत सिंह जी की तरह या ऐसा ही कुछ बहादुरी का काम करना चाहिए। चूंकि संघ में राजनीति और क्रांतिकारी विचारों पर विमर्श नहीं किया जाता था इसीलिए हम और अन्य हमारे जैसे युवा संघ के कार्यकलापों में कम रुचि लेते थे। जब भगत सिंह जी और उनके साथियों को फांसी की सजा दी गयी तो हमारा दिल साहस से भर उठा और हमने भी कुछ इसी तरह की कार्यवाही करने की शपथ ली। हम इतने उत्तेजित थे कि हमने घर छोड़ने का भी फैसला कर लिया था। लेकिन 'डॉक्टर साहेब' को सूचित किये बिना ऐसा कुछ भी करना दृष्टता होती इसीलिए हमने अपनी योजना के बारे में 'डॉक्टर साहेब' को बताने का निर्णय किया। इस सम्बन्ध में जब हमने उन्हें सूचित किया तो 'डॉक्टर साहेब' ने मुझे और मेरे साथियों को बुलाया।
.
हम साहस और उत्साह से भरे हुए 'डॉक्टर साहेब' से मिलने गए और उन्हें अपनी योजना के बारे में बताया। हमारी योजना सुनकर 'डॉक्टर साहेब' ने हमें समझाया कि यह बहुत ही बेवकूफी भरा फैसला है, और ऐसा करके तुम संघ के ऊँचे और महान लक्ष्य की उपेक्षा कर रहे हो। 'डॉक्टर साहेब' हमें 7 दिनों तक संघ के महान लक्ष्यों के बारे समझाते रहे। हमारी सभा रात को भी 10 बजे से 3 बजे तक चलती थी, जिसमें 'डॉक्टर साहेब' बराबर हमें इस बारे में उपदेश करते थे। 'डॉक्टर साहेब' द्वारा दिए गए "ब्रिलिएन्ट आइडियाज़" और उनके चमत्कारिक नेतृत्व ने जीवन के बारे में मेरी और हमारे अन्य साथियों की विचारधारा को पूरी तरह से बदलकर रख दिया था। बस उसी दिन से मैंने अपने दिमाग से इस तरह के "फितूर" को निकाल फेंका और मैं संघ के लक्ष्यों के लिए पूरी तरह समर्पित हो गया"।
------- बालासाहेब देवरस, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीसरे सरसंघ संचालक, (1973 - 1994)
सन्दर्भ -- पृष्ठ संख्या : 137, https://books.google.co.in/books?id=ioyHAwAAQBAJ&pg=PA135&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false,
.
मूल उद्वरण -- स्मृति कण : परम पूज्य डॉ हेडगेवार जी के जीवन की विभिन्न घटनाओं का संकलन, सम्पादक : एच वी पिंगले, प्रकाशक : आरएसएस प्रकाशक विभाग, संस्करण : 1962.
.
=====
.
तो इस तरह संघ ने 1947 तक भारत के 8 लाख युवाओं को 'बचा' लिया था। नियति ने महात्मा भगत सिंह, महात्मा चन्द्र शेखर आजाद, महात्मा उधम सिंह जी आदि क्रांतिकारियों को हेडगेवार जी से मिलने का अवसर नहीं दिया। वरना वे इन्हें भी बचा लेते !!
.
=====
.
राईट टू रिकॉल के कार्यकर्ता यह बात सालों से कह रहे है कि संघ की स्थापना ब्रिटिश ने करवाई थी ताकि हिन्दू महासभा को तोडा जा सके और उन युवाओं को क्रांतिकारीयो के रास्ते पर चलने से रोका जा सके जो महादुरात्मा गांधी की चपेट में नहीं आ रहे थे। कुल मिलाकर तब संघ का उद्देश्य कार्यकर्ताओ को अनुत्पादक कार्यों में उलझाकर उनका टाइम पास करना था, और आज भी संघ ने 60 लाख कार्यकर्ताओ को उलझा कर रखा हुआ है जिससे वे देश को मजबूत करने के लिए आवश्यक कानूनों की मांग नहीं कर पा रहे है।
.
_____________