Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
शूर्पणखां गांधी ने प्रस्तुत किये गए अपने शपथपत्र में यह झूठ बोला था कि उसके पास केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की कॉलेज डिग्री है। भारत की सरकार और भारत की किसी अदालत ने केम्ब्रिज से इस सम्बन्ध में कोई पूछताछ नहीं कि और न ही केम्ब्रिज पर कोई दबाव बनाया। फिर भी केम्ब्रिज ने इस बारे में सार्वजनिक रूप से जवाब दिया। केम्ब्रिज ने सिर्फ इसीलिए जवाब दिया ( कि सोनिया गांधी के पास केम्ब्रिज की की डिग्री नहीं है ) क्योंकि केम्ब्रिज प्रशासन का मानना था कि खामोश बने रहने से केम्ब्रिज की छवि को नुकसान होगा।
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और दूसरी तरफ भारत है, जिसकी दिल्ली यूनिवर्सिटी ने मोदी साहेब की डिग्री के बारे में हस्ताक्षरित अधिकृत स्टांप्ड दस्तावेज जारी करने ने साफ़ इंकार कर दिया है !!!
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कहानी का सबक यह है कि -- यदि आप डिग्री होने का फर्जी दावा करना चाहते है तो विदेशी यूनिवर्सिटी के नाम का इस्तेमाल कतई न करे। क्योंकि विदेशी यूनिवर्सिटी आपके फर्जी दावे के सम्बन्ध में चुप्पी नहीं साधने वाली है !!! पर चूंकि भारत की यूनिवर्सिटियों के उप कुलपति बेशर्म है इसीलिए वे खामोश बने रहेंगे।
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वैसे डिग्री पर जारी विवाद अनुपयोगी है। सोनिया-मोदी और केजरीवाल, तीनो ही विदेशी निवेश के समर्थक है और 'एफडीआई आधारित राष्ट्रवाद' के सिद्धांत पर चलते हुए देश को बर्बाद करने में लगे हुए है। और देश को एफडीआई से होने वाले नुकसान और मंदिरों के खजाने को लूटे जाने से नागरिकों का ध्यान हटाने के लिए वे डिग्रियों के विवादों को हवा दे रहे है।
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इस सम्बन्ध में मेरे द्वारा प्रस्तावित समाधान यह है कि -- सभी विश्वविद्यालयों को कहा जाना चाहिए कि वे अपने 'सभी' डिग्रीधारी छात्रों के नाम, उनकी जन्म दिनांक, पिता का नाम आदि विवरण यूजीसी के वेबसाइट पर रखें। इसकी मुख्य सूची टेक्स्ट फ़ाइल व SHA2 हेश के साथ सार्वजनिक की जानी चाहिए, तथा इस विवरण को हर वर्ष 'फ्रिज' कर दिया जाना चाहिए।
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इस तरह से कोई भी व्यक्ति यूजीसी की वेबसाइट पर जाकर किसी भी छात्र या पूर्व छात्र की डिग्री की पुष्टि कर सकेगा।
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*मोदी साहेब ने सभी की डिग्रियों को इस तरह से सार्वजनिक रूप से रखने की व्यवस्था को 'डिजिटल इण्डिया' की योजना से बाहर कर दिया है, और सोनिया व केजरीवाल भी मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन कर रहे है।
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