Pawan Jury BhilwaraRj
अक्सर पूछे जाने वाला प्रश्न - राईट टू रिकॉल ग्रुप मोदी साहेब के सभी फैसलों का विरोध क्यों करता है, उनके अच्छे कार्यो की प्रशंसा और नागरिकों में उनका प्रचार क्यों नहीं करता ?
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मेरा जवाब - पहली बात यह है कि, हम मोदी साहेब के 'सभी' फैसलों का विरोध नहीं करते। उनके 2 साला कार्यकाल में किये गए उनके कुछ फैसलों जैसे जन धन योजना, नेताजी की गुप्त फाइलों को सार्वजनिक करना आदि का 'आंशिक' समर्थन करते है। बहरहाल यह बात सही है कि मोदी साहेब का शासन काल कांग्रेस की तुलना में कम बुरा है। लेकिन हमारे विचार में तब भी इतना बुरा है कि यदि यही नीतियां जारी रही तो हम ख़त्म हो जाएंगे।
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दूसरी बात यह है कि, हम देश में 'स्थायी बदलाव' लाने के लिए अच्छे कानूनों और नीतियों का प्रचार करते है। यदि कोई सरकार अच्छी नीति बनाएगी तो हम उस नीति का समर्थन करेंगे, लेकिन यदि बुरी नीति है तो हम उसका विरोध करेंगे। वस्तुस्थिति यह है कि, मोदी साहेब ने अपने 2 साल के कार्यकाल में ऐसा कोई भी 'नीतिगत' फैसला नहीं किया जिसका समर्थन किया जाए। अत: हम उनकी नीतियों का विरोध करते है। लेकिन यह बात भी समझी जानी चाहिए कि अन्य समूहों द्वारा की गयी आलोचना और हमारे द्वारा की गयी आलोचना में फर्क है। अन्य समूह सिर्फ आलोचना करते है जबकि राईट टू रिकॉल ग्रुप सिर्फ आलोचना नहीं करता बल्कि समाधान का कानूनी ड्राफ्ट भी उपलब्ध करवाता है। इसीलिए हमारे द्वारा की गयी आलोचना समाधान मूलक और रचनात्मक है।
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तीसरे, मोदी साहेब के अन्य रूटीन यानि 'अ-नीतिगत' कार्यो के प्रचार के लिए उनके पास करोड़ो समर्पित समर्थक है, करोड़ो संघ/विहिप के कार्यकर्ता है, पेड मिडिया है, सोशल मिडिया पर आई टी सेल्स है, सरकारी मशीनरी आदि है, जो कि 24*7 घंटे उनकी उपलब्धियों का प्रचार करते है। स्वाभाविक रूप से पेड मिडिया तो नागरिकों को वही सूचनाएं देगा जो सूचनाएं उनके प्रायोजक नागरिकों तक पहुंचाना चाहते है। सरकार भी वही सब बताएगी जिससे उनकी छवि सुधरे और उनके वोट बढे। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी कहती है कि उन्हें सत्ता में ले आओ, बस उनके पास यही समाधान है। किन्तु बीजेपी/संघ/सरकार/पेड मिडिया की तुलना में राईट टू रिकॉल ग्रुप बहुत ही छोटा समूह है। यदि हम भी मोदी साहेब की रूटीन गतिविधियों का प्रचार करने लगे तो नागरिकों तक अच्छे कानूनों की जानकारी कौन पहुंचाएगा ? बताइये !!
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हम आम नागरिक है। हमारे पास कोई संगठन नहीं है। चंदे और अनुदान हम लेते नहीं। हमारे पास कोई प्रायोजक भी नहीं है। इन कानूनों का प्रचार करने के लिए हमें कोई भुगतान भी नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति में हमे अपने समय, ऊर्जा और संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल करना होता है। और वही हम कर रहे है।
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