Pawan Jury BhilwaraRj
जो ज्वेलरी के कारोबार में है, कृपया इसे स्पष्ट करें --
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मान लीजिए कि A, B और C नामक तीन जौहरी(जो कि अब उत्पादक है) ज्वेलरी का कारोबार करते है। मान लीजिए कि A 1 करोड़ का सोना खरीदता है और उस पर कुछ जड़ाई या नक्काशी वगैरह करता है। अब ये अर्धनिर्मित सोने के जेवरात वह B को बेचता है, तथा B इसे C को बेच देता है। C इन जेवरातों पर कुछ और नक्काशी/घड़ाई करता है और इसे एक खुदरा व्यापारी को बेच देता है।
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मान लीजिए कि प्रत्येक कारोबारी द्वारा की गयी घड़ाई में एक लाख का अतिरिक्त खर्च आता है। यानी सोने की लागत में यह राशि जुड़ जाती है। आम तौर पर सोने की घड़ाई/नक्काशी वगैरह से सोने की लागत में बहुत मामूली प्रतिशत का इजाफा होता है।
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अब लीजिए कि प्रत्येक कारोबारी 12.5% सेनवेट क्रेडिट की जगह 1% एक्साइज कर का भुगतान करता है। तो क्या एक्साइज ड्यूटी की देय राशि 3 लाख रूपये होगी ?
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अब मान लीजिए कि A, B और C तीनो सेनवेट इनपुट क्रेडिट लेने का निर्णय करते है।
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तब A को मूल राशि में जोड़े गए अतिरिक्त 1 लाख रूपये पर 12.5% की दर से उत्पाद शुल्क चुकाना होगा या मूल राशि + अतिरिक्त मूल्य यानी कि सकल मूल्य 1.01 करोड़ पर 12.5% की दर से कर चुकाना होगा !!?
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इस प्रश्न के अलग अलग उत्तर मिल रहे है !!! कुछ का कहना है कि A को सिर्फ अतिरिक्त मूल्य (1 लाख) पर ही 12.5% की दर से एक्साइज ड्यूटी चुकानी होगी !!! मतलब 1 लाख पर 12.5% की दर से यह राशि 12500 रूपये होगी। जबकि कुछ का कहना है कि A को 1.01 करोड़ पर 12.5% की दर से टैक्स देना होगा !!! और यहाँ A को कोई इनपुट क्रेडिट की छूट नहीं मिलेगी, क्योंकि A ने जेवरात नहीं बल्कि अनिर्मित सोना ख़रीदा है !!
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एक और गम्भीर समस्या, जो जेवरातों पर एक्साइज ड्यूटी लगाने से उत्पन्न होगी।
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ज्यादातर ज्वेलर्स दूसरे ज्वेलर्स को या दुकानदार को बिना बिल के सोना बेचते है। मान लीजिए कि एक जौहरी 100 ग्राम शुद्ध सोना खरीदता है और उसमे ताम्बा मिलाकर उससे आभूषण बनाता है। दुकानदार उसे 102 से 104 ग्राम की बीच शुद्ध सोना देता है , जो कि सीजन, रेट, घड़ाई की क्वालिटी, मात्रा और प्रत्येक नग के वजन के आधार पर निर्भर करता है !!! (शुद्ध सोना = 99.99% शुद्ध) ये पूरा वस्तु विनिमय व्यवहार है, भुगतान के लिए किसी चेक या नकद का प्रयोग नहीं होता।
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इसके अलावा एक और नियम जिसका उन्हें पालन करना होगा -- यदि A, B को सोना या ज्वेलरी बेचता है और एक्साइज विभाग B के यहाँ छापा मारता है और B, A का नाम लेता है तो A यही कहेगा कि -- 'मैं B को नहीं जानता'
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इस तरह अब से अगर किसी जौहरी दुकानदार के पास 10 करोड़ के सोने के जेवरात है, जो कि इस व्यवसाय में आम बात है, तो ऐसे दुकानदार को उत्पादक माना जाएगा !!! और यदि वह कहता है कि वह उत्पादक नहीं है तो उसे उत्पादक का नाम बताने को कहा जाएगा। कि वह नहीं बता सकता। अत: चूंकि अब वह उत्पादक है, इसीलिए उस पर उत्पाद शुल्क चोरी का मुकदमा कायम किया जा सकेगा !!!
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कुल मिलाकर, उत्पाद शुल्क का क़ानून जेवरात के कारोबार को बुरी तरह से प्रभावित करने वाला है।
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