Pawan Jury BhilwaraRj
400 साल पहले विदेशी कंपनी को मुगल बादशाह जहांगीर ने व्यापार करने की अनुमति दी थी. 1991 में भारत के प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने भी अमेरिका की कई विदेशी कम्पनियों को भारत में व्यापार करने की अनुमति दी.
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तब ईस्ट इण्डिया कंपनी को भारत में व्यापार करने पर कर नही चुकाने होते थे, और आज भी विदेशी कंपनियो को कर नही चुकाने होते. तब भारत कई रियासतों में बंटा हुआ था, और राजाओ की मुख्य चिंता यह थी कि पडौसी राजा उसे गद्दी से बेदखल न कर दे. आज भी भारत कई राज्यों में विभाजित है और सभी नेता इस भय से ग्रस्त रहते है कि प्रतिद्वंदी नेता उन्हें कुर्सी से हटाकर खुद मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री न बन जाए.
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अंग्रेजो के पास तब भारत की तुलना में अधिक आधुनिक हथियारों से लेस मजबूत सेना थी, अत: अंग्रेजो ने अपनी सेना को भारत में रखने और भारत के राजाओं को उनकी ‘गद्दी’ की रक्षा करने का आश्वासन दिया. राजा जानते थे कि, ‘यदि अंग्रेजो की सेना उनकी रियासत में रहेगी तो अन्य राजा उन पर हमला नही करेंगे, पर साथ ही यह भय भी था कि यदि अंग्रेज अपनी सेना की तैनाती हमारी रियासत में कर देंगे तो रियासत पर असली कब्ज़ा तो अंग्रेजो का हो जाएगा’. पर अपनी गद्दी बचाने के लिए राजा ये जोखिम उठाने को तैयार थे.
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राजाओं ने अंग्रेजो से यह आश्वासन लिया कि वे उनके आंतरिक शासन में हस्तक्षेप नही करेंगे. अंगेजो ने कहा कि , ‘बाय गॉड, कभी हस्तक्षेप नही करेंगे’
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1991 से 2016 तक भारत के सभी प्रधानमंत्रियो और सभी राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों ने सभी अमेरिकी/विदेशी कम्पनियों को भिन्न भिन्न अभियानों के नाम पर भारत में आकर व्यापार करने की अनुमति दी. इन विदेशी कम्पनियों के पास अकूत डॉलर है, आधुनिक हथियार है तथा भारत के मिडिया समूहों पर नियंत्रण है. तब दौर और था, पर अब गद्दी पर बने रहने के लिए चुन कर आना होता है. अत: भारत के नेता चाहते है कि अमेरिकी/विदेशी कम्पनियां उन्हें चुनाव में लड़ने के लिए चंदा मुहैया कराएं और मिडिया में सकारात्मक प्रसारण द्वारा जनता में उनकी तथा उनकी पार्टी की छवि अच्छी तरह से पेश करें. इससे जनता उनकी छवि से प्रभावित होकर वोट करेगी और वे कुर्सी पर टिके रहेंगे.
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भारत के नेताओं का कहना था/है कि, ‘आपको जो भी कानूनों से भारत में धंधा करने में सुविधा हो, हम उन्हें लागू कर देंगे, लेकिन बदले में आप हमें सत्ता में आने और सत्ता बनाए रखने में मदद करें’. विदेशी सहमत है.
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अब अमेरिका चाहता है कि, व्यापार के साथ साथ अमेरिकी सेना को भी भारत में रखने की इजाजत दी जाए. मुगलों, सिंधियाओ, नेहरुओ और मनमोहनो की परम्परा को कायम रखते हुए मोदी साहेब भी अमेरिकी फौजों को भारत में अपनी सेना रखने की अनुमति दे रहे है.
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http://timesofindia.indiatimes.com/india/No-foreign-power-be-allowed-to-set-up-military-base-on-Indian-soil-Govt/articleshow/21984387.cms
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http://www.reuters.com/article/us-india-usa-shipping-idUSKCN0X90NO
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