Pawan Jury BhilwaraRj

अब बाबा रामदेव भी मंदिरों के खिलाफ हो गए है। उनका कहना है कि भव्य मंदिरों के निर्माण की जगह स्कूल कॉलिज खड़े किये जाने चाहिए। लिंक देंखे ---
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http://epaper.bhaskar.com/detail/?id=953330&boxid=41121923296&ch=0&map=map&currentTab=tabs-1&pagedate=04/11/2016&editioncode=158&pageno=4&view=image
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स्कूल बनाना और उनमे समुचित शिक्षा का प्रबंध करना सरकार का काम है, जबकि मंदिरो का निर्माण समाज द्वारा किया जाता है। दोनों चीजे अलग है। लेकिन बाबा रामदेव मिशनरीज और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को खुश करने के लिए इस तरह की उट पटांग बातें कर रहे है। बीजेपी खेमे के सभी नेताओं के यदि हाल है। और इस मुहीम के नेता मोदी साहेब है। सबसे पहले मोदी साहेब ने ही देवालय से पहले शौचालय बनाने की नसीहत दी थी। आनंदी बेन मंदिरों की जगह स्कूलों की भोजन शालाओं को दान देने की बात कह चुकी है। परेश रावल पूरी दुनिया को यह बताते घूम रहे है कि 'हिन्दू मंदिर दुनिया के सबसे गंदे पूजा स्थल है'। परम पूज्य भागवत का मानना है कि, 2050 तक युवाओं को धर्म के बारे में भूल जाना चाहिए और हिन्दू धर्म में कई मान्यताएं अवैज्ञानिक है। हर्षवर्धन को साल में 364 दिन आतिशबाजी करने से कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन दीपावली के दिन फटाके चलाने से जो प्रदूषण होता है उससे उनकी तबियत खराब हो जाती है।
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यदि बाबा रामदेव को शिक्षा व्यवस्था सुधारने में रुचि है तो उन्हें उन कानूनों की मांग करनी चाहिए जिनसे सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को सुधारा जा सके। किन्तु बाबाजी ऐसे सभी कानूनों का विरोध कर रहे है। जिस तरह परम पूज्य मोहन भागवत गौ-हत्या को रोकने के कानूनों का विरोध करते है और गाय पर नारे लगवाकर अपना वोट बैंक बनाते है, कुछ उसी तरह से बाबा रामदेव भी सरकारी स्कूलों और उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के कानूनों का विरोध करते है और शिक्षा के व्यवसाय में 25 हजार करोड़ निवेश करने का एलान कर देते है। यदि सरकारी स्कूल बेहतर हो जाएंगे तो बाबा रामदेव को शिक्षा के क्षेत्र में 25 हजार करोड़ का निवेश करके 1 लाख करोड़ कमाने का अवसर नहीं मिलेगा।
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फार्मूला यह है कि पहले उन कानूनों का विरोध करो जिससे अमुक समस्या का समाधान होता हो। और फिर उस समस्या को उभाड़कर या तो वोट या पैसा बटोरने की जुगत लगाओ।
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