Pawan Jury BhilwaraRj

सोने पर एक्साइज ड्यूटी क्यों लगाईं गयी ?
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कांग्रेस के सांसदों ने बड़ी ज्वेलर्स कम्पनियों की लॉबी से घूस* खाकर (लगभग 200 करोड़ रूपये) यह क़ानून 2012 में लगाया था। तब चौतरफा विरोध के चलते इसे वापिस लेना पड़ा। मोदी साहेब ने तब कहा था कि एक्साइज ड्यूटी लगाने से लाखों स्वर्णकार बेरोजगार हो जाएंगे और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए।
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मोदी साहेब के चुनाव प्रचार में हजारो करोड़ का खर्च आया था। तब बीजेपी को चंदे की जरूरत थी। बीजेपी ने ज्वेलर्स लॉबी से कहा कि चंदा दो। ज्वेलर्स लॉबी से उनसे सत्ता में आने पर एक्साइज ड्यूटी लगाने को कहा। मोदी साहेब ने हामी भरी। ज्वेलर्स लॉबी ने उन्हें चन्दा दिया (लगभग 500 करोड़*)। मोदी साहेब ने सर्राफा कारोबारियों से एक्साइज ड्यूटी न लगाने का वादा करके वोट ले लिए और ज्वेलर्स लॉबी से एक्साइज ड्यूटी लगाने के लिए चन्दा ले लिया।
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सत्ता में आकर ज्वेलर्स लॉबी ने एक्साइज ड्यूटी लगाने को कहा। मोदी साहेब को राज्यों में चुनाव के लिए फिर से पैसा चाहिए। अत: उन्होंने और चन्दा देने को कहा। ज्वेलर्स लॉबी ने बीजेपी को और चन्दा दिया (लगभग 200 करोड़*)। और मोदी साहेब ने एक्साइज ड्यूटी लगा दी।
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ज्वेलर्स लॉबी क्यों इतना पैसा खर्च कर रही है ?
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ज्वेलर्स लॉबी में सोने का कारोबार करने वाली बड़ी कम्पनिया शामिल है, और वे छोटे और मझौले स्वर्णकारों को बाजार से बाहर करना चाहते है। इसके लिए वे सरकारों को भारी पैसा चुका रहे है।
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कैसे एक्साइज ड्यूटी छोटे और मझोले कारोबारियों को बाजार से बाहर कर देगी ?
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यदि सरकार को राजस्व उगाहना होता तो वे वैट की दर बढ़ा सकते थे या इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकते थे। लेकिन उन्होंने एक्साइज को ही क्यों चुना ?
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सोने के एक्साइज के दायरे में आने से एक्साइज इन्स्पेक्टर सर्राफ़ो की दूकान पर जा सकेगा, जांच कर सकेगा, दूकान सील कर सकेगा, सामान जब्त कर सकेगा और दुकानदार को जेल में भी डाल सकेगा। तो होगा यह कि उत्पाद शुल्क अधिकारी माप तौल अधिकारी, ड्रग इन्स्पेक्टर और आरटीओ की तरह प्रत्येक दुकानदार से हफ्ता वसूल करेंगे। जिससे छोटे और मझौले कारोबारियों की लागत और उत्पीड़न बढ़ेगा और वे खेल से बाहर होने लगेंगे।
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एक्साइज आने के बाद प्रत्येक स्वर्णकार को अपनी दूकान का फोटो खींचकर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा जिससे उत्पाद अधिकारियों को यह ठीक ठाक पता रहेगा कि किससे कितना हफ्ता वसूलना है। दूसरे दौर में बड़े कारोबारी एक्साइज कमिश्नर को दुकाने बंद करवाने का टारगेट देंगे। मान लीजिए जयपुर शहर में एक्साइज कमिश्नर को 2 करोड़ में 2000 दुकाने बंद करवाने का टारगेट दिया जाता है, तो कमिश्नर हफ्ता वसूलना बंद कर देगा और जब्ती शुरू करेगा। ज्वेलर्स लॉबी मिडिया को पैसा देगी ताकि छापे और गिरफ्तारियों की खबरों को प्रमुखता से छापा जाए। इससे आये दिन अखबार में आएगा कि फलाना सुनार टैक्स की चोरी कर रहा था, ढिकाना से अवैध माल जब्त हुआ है आदि। इससे जनता में भय का संचार होगा और वे सोचेंगे कि छोटे सुनार सभी चोट्टे है और इनसे लेनदेन करने से हम भी कभी फंस जाएंगे। अत: वे सोना खरीदने के लिए बड़ी दुकानों को प्राथमिकता देंगे। जिससे बड़ी कम्पनियों की सेल बढ़ेगी और छोटे/मझौले कारोबारी खेल से बाहर होते चले जाएंगे।

दूसरा तकनिकी पहलू यह है कि बड़ी कम्पनियों के पास टैक्स के पचड़ों से निपटने के लिए प्रोफेशनल स्टाफ होता है, तथा उनके ऊँचे सम्पर्क होते है। अत: उनकी लागत नहीं बढ़ेगी और न ही झंझट होगा। किन्तु छोटे कारोबारी जो कि एक दूकान लेकर बैठे है तबाह हो जाएंगे। नतीजे में हफ्ता देंगे।

(टिपण्णी - यदि सभी एक्साइज कमिश्नर और इन्स्पेक्टर ईमानदार है तो ऐसा कुछ भी नहीं होगा और सुनारों को किसी उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा )
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इस पूरे सर्कस से ध्यान बंटाने के लिए मोदी साहेब की सोशल मिडिया सेल निम्नलिखित झूठ फैला रही है --

१) एक्साइज इंस्पेकटर्स को साफ़ निर्देश दिए गए है कि वे सुनारों की दूकान पर नहीं जाए -- अरुण जेटली
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जेटली साहेब मंत्री है। लेकिन इनकी इस हरकत के बाद मैं कहूंगा कि ये आदमी झूठा और जालसाज है। क्योंकि जेटली ने जो बात मौखिक रूप से कही उसका लिखित ऑर्डर निकालने से साफ़ इंकार कर दिया है। यदि किसी के पास यह ऑर्डर उपलब्ध हो तो बताये। मैं माफीनामे के साथ अपनी टिपण्णी वापिस ले लूंगा।
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२) एक्साइज ड्यूटी सिर्फ 12 करोड़ से ऊपर का कारोबार करने वाले को ही देनी होगी।
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भ्रमित किया जा रहा है। क्योंकि एक्साइज इंस्पेकटर को उन सभी दुकानों पर जाकर जांच करने का अधिकार है जो एक्साइज के अंतर्गत आती है। यह कौन तय करेगा कि कारोबार 12 करोड़ सालाना से ज्यादा है या नहीं। जाहिर है 50 करोड़ का कारोबार करने वाले कारोबारी भी अपना धंधा 5 करोड़ ही दिखाएँगे। निदान -- इंस्पेकटर सभी दुकानों पर जाएगा और जांच करेगा। नतीजे में जो हफ्ता नहीं देगा उसका कारोबार 12 करोड़ से ज्यादा है ऐसा 'संदेह' प्रकट किया जाएगा। वैसे भी जो कोमोडिटी एक्साइज के अंतर्गत आती है उस कमोडिटी का कारोबार करने वाले सभी कारोबारियों को पंजीयन कराना अनिवार्य होता है।
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३) इससे काले धन पर रोकथाम लगेगी।
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सिरे से बकवास तर्क है। जो भी धन बिना बिल की वस्तुओं को खरीदने में खर्च किया जाता है वह काला धन है। एक्साइज आने के बाद भी बिना बिल के जो लेन देन होंगे वे काले धन की श्रेणी में आएंगे। एक्साइज विभाग के पास इसे रोकने का कोई मैकेनिज्म नहीं है। मैकेनिज्म एक ही है -- छापे मारो और हफ्ता वसूलो। इससे काले धन का निवेश सोने में किये जाने पर कोई रोकथाम नहीं होगी। क्योंकि एक्साइज ड्यूटी 'सिर्फ' सोने के आभूषणो पर लगाईं गयी है, सोने के सिक्कों और बिस्कुटों पर नहीं। अत: जिन्हे अपना काला धन निवेश करना है, वे सोने के बिस्किट और सिक्के खरीदकर रख लेंगे। और वैसे भी गहने कोई कितने बनवाएगा ? 2-4 किलो के बिस्किट ही लिए जाते है गहने नहीं बनवाए जाते। अत: एक्साइज आने से काले धन के निवेशकों पर कोई प्रभाव नहीं आएगा किन्तु गहने बनाने वाले स्वर्णकार टूट जाएंगे। जाहिर है मोदी साहेब की आईटी सेल सिर्फ यह अफवाह उड़ा रही है कि इससे काले धन की रोकथाम होगी।
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४) एक्साइज ड्यूटी सिर्फ एक प्रतिशत ही तो है।
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एक हो या पांच हो या दस हो या आधा प्रतिशत हो। यह विषय ही नहीं है। विषय है कि इस कारोबार को एक्साइज विभाग के हवाले किया जा रहा है।
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(*) चंदे के आंकड़े मेरा अनुमान मात्र है, और कोई इससे असहमत हो सकता है। जिस एक्साइज ड्यूटी का मोदी साहेब विरोध करते थे सत्ता में आकर क्यों पलट गए, चंदे के अलावा इसका कोई कारण मुझे नजर नहीं आता। चूंकि मोदी साहेब भी केजरीवाल साहेब की तरह घूस नहीं लेते इसीलिए उन्होंने अवश्य ही चन्दा लिया होगा, ऐसा मेरा अनुमान है। चूंकि कांग्रेस सीधे घूस लेने में विश्वास करती है इसीलिए 2012 के प्रकरणं में शब्द घूस का इस्तेमाल किया गया है। यदि मामले में भी मोदी साहेब के पलटने में कोई कूटनीति हो तो इंकार नहीं किया जा सकता। आप अपना अनुमान लगाने के लिए स्वतंत्र है।)
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समाधान ?
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अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि एक्साइज ड्यूटी को तत्काल रद्द किया जाए। एसएमएस का लिंक --- https://web. facebook. com/ProposedLawsHindi/posts/559768797534652
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