Pawan Jury BhilwaraRj
इसे सरल तरीके से लीजिये।
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चिंटू - भारत में भ्रष्टाचार क्यों है ?
मास्टर जी - तुम बताओ।
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चिंटू - मुझे मालूम नही। लेकिन कहा जाता है की, भारत के लोग भ्रष्ट है।
मास्टर जी - अच्छा ! अगर ऐसा है तो निजी क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार होना चाहिए था। लेकिन भ्रष्टाचार सरकारी क्षेत्र में है निजी क्षेत्र में नही। ऐसा क्यों है ?
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चिंटू - ये तो मुश्किल सवाल है ?
मास्टर जी - मुश्किल नही है, सीधा सवाल है। लेकिन तुम 'सवाल' को कठिन मान रहे हो, और इसीलिए उत्तर भी कठिन ही ढूंढ रहे हो।
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चिंटू - आप बताओ।
मास्टर जी - निजी क्षेत्र में यदि अधिकारी भ्रष्टाचार करता है, तो मालिक को नुकसान होता है। कोई भी मालिक अपना नुकसान बर्दाश्त नही करता, अत: उन्हें नौकरी से निकाल देता है। नौकरी खोने के इस भय से निजी क्षेत्र में अधिकारी भ्रष्ट आचरण नही करते। जबकि सरकारी अधिकारियों को उनके मालिक नौकरी से नही निकाल सकते। तो फिर वे भ्रष्टाचार क्यों न करें ? सिम्पल है।
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चिंटू - सरकारी नौकरी में भी तो उच्च अधिकारी और नेता वगेरह कर्मचारियों को नौकरी से निकाल सकते है। थानेदार को एसपी, और एसपी को गृह मंत्री आदि नौकरी से निकाल सकते है। फिर आप ऐसा क्यों कह रहे हो कि सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से नही निकाला जा सकता ?
मास्टर जी - थानेदार नौकर है, एसपी भी नौकर है, डीआईजी भी नौकर है, और विधायक, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री भी जनता के नौकर ही है। असली मालिक तो जनता है, पर जनता के पास अपने नौकरो को पद से हटाने की कोई प्रक्रिया नही है। इसीलिए ये सभी नौकर आपस में मिली भगत कर लेते है, और लूट चलाते है।
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चिंटू - करोड़ो नागरिक कैसे किसी को नौकरी से निकालेंगे ? कोई कहेगा कि इसे नौकरी से निकाल दो कोई कहेगा कि मत निकालो ?
मास्टर जी - जैसे भारत के करोडो मतदाता अलग अलग उम्मीदवारों/पार्टियों को वोट करते है, और जिसे बहुमत मिलता है उसे सांसद और विधायक की नौकरी मिलती है, वैसे ही बहुमत से ही यह तय होगा कि किसकी नौकरी जायेगी और किसकी रहेगी।
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चिंटू - ऐसा कैसे होगा ? समझ नही आया। प्रक्रिया क्या होगी ?
मास्टर जी - बहुत आसान है। जैसे तय प्रक्रिया से तुम किसी को चुनने के लिए वोट करते हो, वैसे ही उन्हें पद से निकालने के लिए भी वोट करने की प्रक्रिया हो सकती है। जैसे बैंक में पैसे जमा कराने के साथ निकालने की भी प्रक्रिया होती है। जैसे बहुमत से प्रतिनिधियों को चुना जाता है, वैसे ही बहुमत द्वारा निकाले जाएंगे।
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चिंटू - अगर लोग रोज ही अपने नेताओ और अधिकारियों को बदलने लगे तो इससे अस्थिरता नही आ जाएगी ?
मास्टर जी - तुम अपनी चड्डी कब बदलते हो ?
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चिंटू - गन्दी हो जाती है, तब ही बदल देता हूँ।
मास्टर जी - क्यों ? घंटे में चार बार क्यों नही बदलते ? क्योंकि तुम्हारे पास अपनी चड्डी बदलने की प्रक्रिया है अत: तुम्हे हर 10 मिनिट में अपनी चड्डी बदलनी चाहिए।
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चिंटू - मास्टर जी , मैं गंभीर चर्चा कर रहा हूँ, और आप मजाक कर रहे है। चड्डी बदलना और चुने हुए प्रतिनिधि को बदलना एक ही बात है क्या ?
मास्टर जी - वही मैं कह रहा हूँ। तुम व्यर्थ में जब चड्डी बदलने को राजी नही हो तो क्या लोग इतने बेवकूफ और फुरसतिये है, जो रोज सुबह उठकर यही प्रोग्राम बनाएंगे कि आज किस नेता या अधिकारी को बदलना है और किस को नही। जरा सोचो, तुम्हारे पास भी अपना स्कूल और मास्टर बदलने का अधिकार है, अत: रोज नए स्कूल में एडमिशन क्यों नही ले ले रहे हो ? बताओ ?
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चिंटू - ठीक है। मेरे समझ में आ गया है। बदलने का अधिकार होने से होता नही कुछ। नागरिक अपने नौकरो को तभी बदलेंगे जब उन्हें बदलना आवश्यक होगा। और अभी देश के मालिको के पास अपने नौकरो को बदलने की प्रक्रिया ही नही है, इसीलिए उन्हें अपना पद खोने का कोई भय नही है। और इसीलिए ये लोग खुले आम भ्रष्टाचार चला रहे है।
मास्टर जी - हाँ यही बात है।
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मास्टर जी - ठीक है। अब मैं टेस्ट लेता हूँ तुम्हारा। बताओ लोकपाल के आने से भी भ्रष्टाचार दूर क्यों नही हुआ ?
चिंटू - तो आप पहले मुझे यह बताओ कि लोकपाल को नौकरी से निकालने का अधिकार किसके पास है ?
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मास्टर जी - मुख्यमंत्री, नेता विपक्ष, और दो स्वतंत्र न्यायधीश के कमिटी बनाएंगे जिसमें सदस्यों की संख्या ....
चिंटू - मास्टर जी उलझाओ मत। काम की बात बताओ। लोकपाल को नियुक्त करने और नौकरी से निकालने का अधिकार मालिको के पास है या नौकरो के पास ?
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मास्टर जी - नौकरो के पास।
चिंटू - तो बस। लोकपाल एक नौकर है, अत: यह अन्य नौकरो जैसे मुख्यमंत्री, न्यायधीशों आदि के साथ मिली भगत बना लेगा, और उन लोगो को विशेष रूप से पकड़ेगा जो लोकपास को भ्रष्टाचार नही करने देंगे। बल्कि यहां तो उल्टा असर होगा। क्योंकि लोकपाल सभी भ्रष्ट कर्मचारियों से हफ्ता वसूलेगा और यदि वे हफ्ता नही देंगे तो उन्हें गिरफ्तार कर लेगा। इससे घूस की रेट और भी बढ़ जायेगी, अत: आम नागरिको को रिश्वत के ज्यादा पैसे चुकाने होंगे।
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मास्टर जी - बहुत अच्छे। मतलब तुम्हें समझ आ गया है। यदि अन्य कोई शंका हो तो कॉमेंट बॉक्स में अपना प्रश्न रखने से समाधान कर दिया जाएगा।
चिंटू - लेकिन ये अधिकार नागरिको को मिलेंगे कैसे ?
मास्टर- जब नागरिक अपने प्रतिनिधियों से मांग करेंगे कि 'हम आम नागरिको को अपने प्रतिनिधियों को बदलने का अधिकार दिया जाए'
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चिंटू - तो भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता ऐसी मांग क्यों नही कर रहे है ?
मास्टर जी - क्योंकि उन्हें यह तो समझ आ गया है कि भारत में भ्रष्टाचार है, लेकिन यह समझ नही आ रहा है कि भ्रष्ट अधिकारियों/नेताओ को पद से निष्काषित करने का अधिकार नागरिको को देने की प्रक्रियाएं लागू करवाकर भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है ?
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चिंटू - वो इस बात को क्यों नही समझ पा रहे है ?
मास्टर जी - क्योंकि जटिल चीजो को तो ज्यादातर बुद्धिमान लोग समझ लेते है, लेकिन सीधी चीजो को समझने में वे अक्सर चूक जाते है। दरअसल आसान चीजो को समझना ज्यादा मुश्किल काम है। क्योंकि वे इतनी सीधी और आसान होती है कि व्यक्ति इतने सीधे तरीके से सोचने का अभ्यस्त नही होता।
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