Pawan Jury BhilwaraRj

राईट टू रिकॉल कानूनो के प्रचार के तरीको के बारे में मेरा रूख
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प्रचार के तरीको को लेकर मेरा मानना है कि हमें सभी तरीको का या जिसके लिए जो संभव हो उन तरीको का इस्तेमाल करना चाहिए। जब हम इस्तेमाल करेंगे तो सबसे बेहतर तरीका अपने आप निकालकर आ जाएगा। उसके लिए हमें किसी को कन्विंस नही करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए भीलवाड़ा में कार्यकर्ताओ ने अब तक प्रचार के निम्न लिखित तरीको का इस्तेमाल किया है --
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१. 1000 बुकलेट बांटी गयी
२. 1300 पेंफ्लेट बाँटें गए
३. दो मुख्य समाचार पत्रो में विज्ञापन दिए गए।
४. 5 से 15 लोगो की लगभग 40 से अधिक गार्डेन मीटिंग की गयी।
५. 50 लोगो से ज्यादा की 5 सभाएं की गयी।
६. नागरिक प्रामाणिक सिस्टम के लिए bhilwarasms .in वेबसाइट शुरू की गयी ( ऋषि महाराज के सहयोग से)
७. SDCP को भी प्रमोट किया गया ( शिवा जी की प्रेरणा से)
८. दो रूफ टॉप और 15 छोटे बैनर लगाए गए।
९. चुनाव में भाग लेने का प्रयास किया। प्रयास इसीलिए, क्योंकि फॉर्म रिजेक्ट हो गया। (अशोक जी ने उम्मीदवारी की थी)

हम ये सब कर रहे है, क्योंकि हमें नही पता कि कौनसा तरीका ज्यादा अच्छा काम करेगा। ये सब ऑफ़ लाइन गतिविधियाँ करने के बाद भी आज मैं यह नही कह सकता कि कौनसा तरीका ज्यादा बेहतर नतीजे देता है, या देगा। यह जानने का तरीका यही है कि सभी गतिविधियाँ की जाए और नए तरीके भी खोजे जाएँ। और अपने आप बेहतर तरीका निकल कर सामने आ जाएगा। इसीलिए हम सभी तरीको का इस्तेमाल कर रहे है। पर अब तक नतीजे अपेक्षित नही है।
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विज्ञापन देने के अनुभव से मैं यह जरूर कह सकता हूँ कि विज्ञापन देना प्रचार का सबसे बेहतर तरीका है। लेकिन विज्ञापन सिर्फ बड़े अखबार में सिर्फ मुख्य पेज पर और सिर्फ बड़ा ही दिया जाना चाहिए। छोटे विज्ञापन वेस्ट है। इसीलिए हमें ऐसे तरीके खोजने की जरूरत है जिससे हम बड़े अखबारों में बड़े पैमाने पर बड़े आकार में ढेर सारे विज्ञापन दे सके।
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जहां तक ऑनलाइन प्रचार की बात है, सभी अपने अपने तरीके से यथा संभव प्रयास करते रहते है। वैसे भी मेरे हिसाब से हमारा ऑनलाइन प्रचार अच्छी हालत में है लेकिन ऑफ़लाइन प्रचार में हम पिछड़े हुए है।

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