Pawan Jury BhilwaraRj
Proposed law drafts - Hindi:
[ ज्यूरी सिस्टम ]
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भारत के सभी नागरिकों,
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यह स्तम्भ भारत की अदालतों में नागरिको की ज्यूरी द्वारा सुनवाई किये जाने की प्रस्तावित प्रक्रिया का विवरण प्रस्तुत करता है।
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यदि आप इस कानूनी ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा इस पोस्ट का लिंक भेजें। तथा इस कानूनी ड्राफ्ट की जानकारी देश के नागरिको तक पहुंचाने के लिए इसे लाइक करें, शेयर करें, समाचार पत्रो में विज्ञापन दें, इस मुद्दे पर चुनाव लड़ें तथा इस पोस्ट के पहले कमेंट में सुझायी गयी अन्य गतिविधियों में भाग लें। यदि आप इस पोस्ट के पहले तथा दूसरे कमेंट को नहीं देख पा रहे है तो, इस पेज के विवरण खंड (डिस्क्रिप्शन कॉलम) को देखें। वहाँ इस पेज के सभी पोस्ट्स तथा शेष पांच कमेंट्स के लिंक की सूची दी गयी है।
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यदि करोड़ो नागरिक अपने सांसदो को अपने मोबाईल फोन से एसएमएस द्वारा आदेश भेजते है तो देश की वर्तमान व्यवस्था में क्या परिवर्तन आयेंगे ? इस प्रश्न तथा ऐसे ही अक्सर पूछे जाने वाले अन्य प्रश्नो के जवाब इस पोस्ट के दूसरे कमेंट में देखें जा सकते है। अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस समुदाय का विवरण खंड देखें।
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टिप्पणी -- इस क़ानून ड्राफ्ट की विश्वसनीयता बनाएं रखने के लिए, इस पोस्ट को एक बार लिखे जाने के बाद संपादित नही किया गया है। वर्तनी या व्याकरण आदि की अशुद्धियों के सम्बन्ध में कृपया इस पोस्ट का छठा कमेंट देखें।
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सांसद को भेजे जाने वाले SMS का प्रारूप --
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"Hon MP, I order you to -- https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/548841788627353, voter ID : ####"
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माननीय सांसद,
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यदि आपको इस पोस्ट का लिंक एसएमएस द्वारा प्राप्त होता है तो, ऐसा एसएमएस आपके लिए मतदाता द्वारा भेजा गया आदेश है। इस पोस्ट के लेखक का भेजे गए ऐसे आदेश या एसएमएस से कोई लेना देना नहीं है। आपको भेजा गया ऐसा आदेश इस कानूनी ड्राफ्ट को भारत के राजपत्र में प्रकाशित करने के लिए दिया गया है।
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(टिप्पणी -- इस कानूनी ड्राफ्ट के मूल अंग्रेजी संस्करण का लिंक इसी पोस्ट के दसवें कमेंट में दर्ज किया गया है।)
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भारत में ज्यूरी सिस्टम लागू करने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
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====== ड्राफ्ट का प्रारम्भ======
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सैक्शन – 1 : जूरी प्रशासक की नियुक्ति और उन्हें बदलने की प्रक्रिया
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1. [मुख्यमंत्री ; जिला कलेक्टर]
इस कानून के पारित किए जाने के 2 दिनों के भीतर, सभी मुख्यमंत्री अपने-अपने पूरे राज्य के लिए एक रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेंगे, और हर जिले के लिए एक जूरी प्रशासक की भी नियुक्ति करेंगे। कोई भी भारत का नागरिक जो 30 साल या अधिक का हो, जिला कलेक्टर के दफ्तर में जा कर, सांसद के जितना शुल्क जमा कर के अपने को जूरी प्रशाशक के लिए प्रत्याशी दर्ज करा सकता है, और जिला कलेक्टर प्रत्याशी का नाम मुख्यमंत्री वेबसाईट पर रखेगा।
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2. [तलाटी/पटवारी/लेखपाल या तलाटी का क्लर्क]
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किसी जिले में रहने वाला कोई नागरिक अपना मतदाता पहचान-पत्र दिखा कर अपने जिले में जूरी प्रशासक के पद के लिए ज्यादा से ज्यादा पांच उम्मीदवारों के क्रमांक नंबर बताएगा जिन्हें वो अनुमोदित करना चाहता है। क्लर्क उनके अनुमोदनों को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ कंप्यूटर और मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा और उस नागरिक को रसीद देगा। नागरिक अपनी पसंद को किसी भी दिन बदल सकता है। क्लर्क तीन रूपए का शुल्क लेगा।
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3. [मुख्यमंत्री]
यदि किसी उम्मीदवार को सबसे अधिक नागरिक-मतदाताओं द्वारा और जिले के सभी नागरिक-मतदाताओं के 50 प्रतिशत से अधिक लोगों द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है तो मुख्यमंत्री उसे दो दिनों के भीतर उस जिले के नए जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्त कर देंगे। यदि किसी उम्मीदवार को सभी नागरिक-मतदाताओं के 25 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है और उसके अनुमोदनों की गिनती वर्तमान जूरी प्रशासक की गिनती से 5 प्रतिशत अधिक हो तो मुख्यमंत्री उसे दो दिनों के भीतर नए जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्त कर देंगे।
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4. [मुख्यमंत्री]
उस राज्य में सभी नागरिक-मतदाताओं के 51 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं के अनुमोदन से मुख्यमंत्री धारा 2 और धारा 3 को रद्द कर सकते है और पांच वर्षों के लिए अपनी ओर से जूरी प्रशासक नियुक्त कर सकते है।
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5. [प्रधानमंत्री]
भारत के सभी नागरिक-मतदाताओं के 51 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के अनुमोदन से प्रधानमंत्री धारा 2, धारा 3 और ऊपर लिखित धारा 4 को पूरे राज्य के लिए या कुछ जिलों के लिए रद्द कर सकते है और पांच वर्षों के लिए अपनी ओर से जूरी प्रशासक नियुक्त कर सकते है।
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सैक्शन – 2 : महा-जूरीमंडल का गठन
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6. [जूरी प्रशासक]
मतदाता-सूची का उपयोग करके जूरी प्रशासक किसी आम बैठक में क्रमरहित तरीके से उस जिले की मतदाता-सूची में से 40 नागरिकों का चयन महा-जूरीमंडल के सदस्य के रूप में करेगा, जिसमें से वह साक्षात्कार के बाद किन्हीं 10 नागरिकों को उस सूची से हटा देगा और शेष 30 नागरिक महा-जूरीमंडल के सदस्य होंगे। यदि जूरीमंडल की नियुक्ति मुख्यमंत्री अथवा प्रधानमंत्री द्वारा धारा 4 अथवा धारा 5 के तहत की गई है तो वे 60 नागरिकों तक को चुन सकते है और उनमें से तीस तक को हटाकर महा-जूरीमंडल बना सकते है।
(स्पष्टीकरण- ये पूर्व चयनित महा-जूरी के लिए नागरिकों की संख्या बढ़ाने का आशय मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री, जो राज्य और राष्ट्र के प्रतिनिधि है, उनके अधिकार स्थानीय लोगों की तुलना में बढ़ाने के लिए है)
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7. [जूरी प्रशासक]
महा-जूरीमंडल के पहले समूह में से जूरी प्रशासक हर 10 दिनों में महा-जूरीमंडल के किन्हीं 10 सदस्यों को सेवा-निवृत्ति दे देगा और क्रमरहित तरीके से उस जिले की मतदाता-सूची में से 10 नागरिकों का चयन कर लेगा।
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8. [जूरी प्रशासक]
जूरी प्रशासक किसी संख्या को क्रमरहित तरीके से चुनने के लिए किसी यांत्रिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा। वह मुख्यमंत्री द्वारा विस्तार से बताए गए तरीके से प्रक्रिया का प्रयोग करेगा। यदि मुख्यमंत्री ने किसी विशिष्ट प्रक्रिया के बारे में नहीं बताया तो वह निम्नलिखित तरीके से चयन करेगा ; मान लीजिए, जूरी प्रशासक को 1 और चार अंकों वाली किसी संख्या 'क ख ग घ' के बीच की कोई संख्या चुननी है।
तब जूरी प्रशासक को हर अंक के लिए चार राउन्ड में गोटी/पांसा फेंकनी होगी। किसी राउन्ड में यदि अंक, 0-5 के बीच की संख्या से चुना जाना है तो वह केवल एक ही डायस का प्रयोग करेगा और यदि अंक, 0-9 के बीच की संख्या से चुना जाना है तो वह दो डायसों का प्रयोग करेगा। चुनी गई संख्या उस संख्या से 1 कम होगी, जो एक अकेले डायस के फेंके जाने पर आएगी और दो डायसों के फेंके जाने की स्थिति में यह 2 कम होगी। यदि डायसों के फेंके जाने से आयी संख्या उसके जरूरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह डायस को दोबारा फेंकेगा। उदाहरण – मान लीजिए, जूरी प्रशासक को किसी किताब में से एक पेज का चुनाव करना है, जिस किताब में 3693 पृष्ठ है। तब जूरी प्रशासक चार राउन्ड चलेगा। पहले राउन्ड में वह एक ही पांसा का प्रयोग करेगा क्योंकि उसे 0-3 के बीच की एक संख्या का चयन करना है।
यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता है तो वह पांसा फिर से फेंकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी गई संख्यां 3-1 = 2 होगी और जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जाएगा। दूसरे दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुनने की जरूरत होगी। इसलिए वह दो पांसे फेंकेगा। यदि उनका योग 8 से अधिक हो जाता है तो वह दोबारा डायसों/पांसों को फेंकेगा। यदि योग मान लीजिए, 6 आता है तो चुनी गई दूसरी संख्या 6-2 = 4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिए चार राउन्ड्स में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है तो जूरी प्रशासक (3-1), (5-2), (10-2) और (2-1) अर्थात पृष्ठ संख्या 2381 चुनेगा। जूरी प्रशासक को चाहिए कि वह अलग-अलग नागरिकों को पांसा फेंकने के लिए दे। मान लीजिए, मतदाता-सूची में ख किताबें हैं, और सबसे बड़ी किताब में पृष्ठों की संख्या 'प' है और सभी पृष्ठों में प्रविष्ठियों की संख्या 'त' है तो उपर लिखित तरीके या मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए तरीके का प्रयोग करके जूरी प्रशासक 1-ख, 1-प और 1-त के बीच की तीन संख्याओं को क्रमरहित/रैंडम तरीके से चुनेगा। अब मान लीजिए, चुनी गई किताब में उतने अधिक पृष्ठ नहीं है, अथवा चुने गए पृष्ठ में बहुत ही कम प्रविष्टियां है, तो वह 1-ख, 1-प और 1-त के बीच एक संख्या फिर से चुनेगा।
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9. [जूरी प्रशासक]
महा–जूरीमंडल प्रत्येक शनिवार और रविवार को बैठक करेंगे। यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्यादा सदस्य अनुमोदन करें तो वे अन्य दिनों में भी मिल सकते है। यह संख्या '15 से ज्यादा' उस स्थिति में भी होनी चाहिए जब महा-जूरीमंडल के 30 से भी कम सदस्य मौजूद हो। यदि बैठक होती है तो यह 11 बजे सुबह अवश्य शुरू हो जानी चाहिए और कम से कम 5 बजे शाम तक चलनी चाहिए। महा-जूरीमंडल के सदस्य जिस दिन बैठक में उपस्थति रहेंगे, उस दिन उन्हें 200 रूपए प्रति दिन की दर से वेतन मिलेगा। महा-जूरीमंडल का एक सदस्य एक महीने के अपने कार्यकाल में अधिकतम 2000 रूपए वेतन पा सकता है।
जूरी प्रशासक महा-जूरीमंडल के किसी सदस्य के कार्यकाल पूरा कर लेने के 2 महीने के बाद उसे चेक जारी करेगा (स्पष्टीकरण - आंकने के लिए इतने समय की जरुरत है) । यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्य जिले से बाहर जाता है तो उसे वहां रहने का हर दिन 400 रूपए की दर से पैसा मिलेगा और यदि वह राज्य से बाहर जाता है तो उसे 800 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान मिलेगा। इसके अतिरिक्त, उन्हें अपने घर और कोर्ट के बीच की दूरी का 5 रूपए प्रति किलोमीटर की दर से पैसा मिलेगा।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री महंगाई की दर के अनुसार क्षतिपूर्ति की इस रकम में परिवर्तन कर सकते है। इस कानून में सभी राशियाँ जनवरी, 2008 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए 'थोक मूल्य सूचकांक' के अनुसार रखी गयी है। जूरी प्रशासक नवीनतम थोक मूल्य सूचकांक का प्रयोग करके प्रत्येक छह महीनों में धनराशि को बदल सकता है।
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10. [जूरी प्रशासक]
यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्य किसी बैठक से अनुपस्थित रहता है तो उसे उस दिन का 100 रूपया नहीं मिलेगा और उसे अपनी भुगतान की जाने वाली राशि से तिगुनी राशि की हानि भी हो सकती है। जो व्यक्ति 30 दिनों के बाद महा-जूरीमंडल के सदस्य होंगे, वे ही जुर्माने के संबंध में निर्णय लेंगे।
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11. [जूरी प्रशासक]
जूरी प्रशासक बैठक 11 बजे सुबह शुरू कर देगा। जूरी प्रशासक बैठक के कमरे में सुबह 10.30 बजे से पहले आ जाएगा। यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्य सुबह 10.30 बजे से पहले आने में असफल रहता है तो जूरी प्रशासक उसे बैठक में भाग लेने की अनुमति नहीं देगा और उसकी अनुपस्थिति दर्ज कर देगा।
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सैक्शन – 3 : किसी नागरिक पर आरोप तय करना
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12. [जूरी प्रशासक]
कोई व्यक्ति , चाहे वह आम नागरिक हो या जिला दण्डाधिकारी , यदि वह किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कोई शिकायत करना चाहता है तो वह महा-जूरीमंडल के सभी सदस्यों, या कुछ सदस्यों को शिकायती पत्र लिखेगा। शिकायतकर्ता को यह भी अवश्य बताना होगा कि वह क्या समाधान चाहता है। ये समाधान इस प्रकार के हो सकते है –
किसी सम्पत्ति पर कब्जा/स्वामित्व प्राप्त करना
आरोपी व्यक्ति से आर्थिक क्षतिपूर्ति या मुआवजा प्राप्त करना
आरोपी व्यक्ति को कुछ महीने/साल के लिए कैद की सजा दिलवाना
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13. [जूरी प्रशासक]
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यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्यादा सदस्य किसी बैठक में आने के लिए बुलावा भेजते है तो वह नागरिक उपस्थित होगा। महा-जूरीमंडल आरोपी और शिकायतकर्ता को बुला भी सकते है या नहीं भी बुला सकते है।
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14. [जूरी प्रशासक]
यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्यादा सदस्य यह स्पष्ट कर देते है कि शिकायत में कुछ दम है, तो जूरी प्रशासक शिकायत की जांच कराने के लिए एक जूरी बुलाएगा जिसमें उस जिले के 12 नागरिक होंगे। जूरी प्रशासक 12 से अधिक नागरिकों का क्रमरहित/रैंडम तरीके से चयन करेगा (खंड-8 में महा-जूरीमंडल के चुनाव के समान ही जूरीमंडल का चयन होगा) और उन्हें बुलावा भेजेगा। आने वालों में से जूरी प्रशासक क्रमरहित तरीके से 12 लोगों का चयन कर लेगा।
[मान लीजिए एक जिले में सौ मामले दर्ज हुए है। तो कोई 3000 या अधिक लोगों को बुलावा भेजा जायेगा जब तक उनमें से 2600 लोग आ सकेंगे, क्योंकि उनमें कुछ मर गए होंगे, कुछ शहर से बहार गए होंगे। ये 2600 लोग क्रमरहित तरीके से 26-26 के 100 समूहों में क्रमरहित तरीके से बांटे जाएँगे , एक मामले के लिए एक समूह। दोंनो पक्ष के वकील उन 26 लोगों में से हरेक व्यक्ति का 20 मिनट इंटरव्यू लेगा और हर पक्ष का वकील 4 लोगों को बाहर निकाल देगा (इस तरह किसी भी पक्ष को पूर्वाग्रह/पक्षपात का बहाना नहीं मिलेगा ) इस तरह 18 लोगों का जूरी-मंडल होगा जो 12 मुख्य जूरी सदस्य और 6 विकल्प जूरी सदस्य में क्रमरहित तरीके से बांटे जाएँगे ]
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15. [जूरी प्रशासक]
जूरी प्रशासक मुख्य जिला प्रशासक से कहेगा कि वह मुकदमे की अध्यक्षता करने के लिए एक या एक से अधिक जजों की नियुक्ति कर दे। यदि विवादित संपत्ति का मूल्य लगभग 25 लाख से अधिक है अथवा दावा किए गए मुआवजे की राशि एक लाख रूपए से अधिक है अथवा अधिकतम कारावास का दण्ड 12 महीने से अधिक है तो जूरी प्रशासक 24 जूरी-मंडल सदस्य का चुनाव करेगा और उस मुकदमे के लिए मुख्य जज से 3 जजों की नियुक्ति करने का अनुरोध करेगा, नहीं तो वह मुख्य जज से 1 जज की नियुक्ति करने का अनुरोध करेगा। विवादित संपत्ति का मूल्य 50 करोड़ से अधिक होने पर 50-100 जूरी सदस्य और 5 जज होंगे।
यदि मुलजिम के खिलाफ 10 से कम मामले है तो, जूरी-सदस्य 12, 10-25 मामले हों तो 24 जूरी सदस्य चुने जाएँगे और 25 से अधिक मामले होने पर 50-100 जूरी सदस्य होंगे। यदि मुलजिम श्रेणी 4 का अफसर है तो 12 जूरी सदस्य, श्रेणी 2 या 3 का होगा तो , 24 जूरी सदस्य होंगे और श्रेणी 4 या अधिक होने पर 50-100 जूरी सदस्य होंगे | इस मामले में नियुक्त किए जाने वाले जजों की संख्याँ के संबंध में मुख्य न्यायाधीश का फैसला ही अंतिम होगा।
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सैक्शन – 4 : सुनवाई/फैसला करना
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16. [अध्यक्षता करने वाला जज]
सुनवाई 11 बजे सुबह से लेकर 4 बजे शाम तक चलेगी। सभी 12 जूरी-मंडल सदस्य और शिकायतकर्ता के आ जाने के बाद ही सुनवाई शुरू की जाएगी। यदि कोई पक्ष उपस्थित नहीं होता है तो जो पक्ष उपस्थित है उसे 3 से 4 बजे शाम तक इंतजार करना होगा और तभी वे घर जा सकते है। यदि तीन दिन बिना कारण दिए, कोई पक्ष उपस्थित नहीं होता है तो उपस्थित पक्ष अपनी दलीलें देगा और जूरी अनुपस्थित पक्ष को बुलावा देने के पश्चात तीन दिन और इंतजार करेगी। यदि फिर भी अनुपस्थित पक्ष बिना कारण दिए उपस्थित नहीं होता है तो जूरी अपना फैसला सुनाएगी।
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17. [अध्यक्षता करने वाला जज]
जज शिकायतकर्ता को 1 घंटे बोलने की अनुमति देगा जिसके दौरान कोई अन्य बीच में नहीं बोलेगा। जज प्रतिवादी (वह जिस पर मुकदम्मा चलाया जा रहा है) को भी 1 घंटे बोलने की अनुमति देगा, तथा इस दौरान कोई अन्य व्यक्ति बोलने में बाधा पैदा नहीं करेगा। इसी तरह बारी-बारी से दोनों पक्षों को बोलने देगा। मुकदमा हर दिन इसी प्रकार चलता रहेगा।
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18. [अध्यक्षता करने वाला जज]
मुकदमा कम से कम 2 दिनों तक चलेगा। तीसरे दिन या उसके बाद यदि 7 से अधिक जूरी सदस्य यह घोषित कर देते है कि उन्होंने काफी सुन लिया है, तो वह मुकदमा एक और दिन चलेगा। यदि अगले दिन 12 जूरी सदस्यों में से 7 से ज्यादा सदस्य यह घोषित कर देते है कि वे और दलीलें सुनना चाहेंगे तो यह मुकदमा तब तक चलता रहेगा जब तक 7 से ज्यादा जूरी सदस्य यह नहीं कह देते कि अब मुकदमा समाप्त किया जाना चाहिए।
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19. [अध्यक्षता करने वाला जज]
अंतिम दिन जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलील 1 घंटे रख देंगे तो जूरी-मंडल कम से कम 2 घंटे तक विचार-विमर्श करेंगे। यदि 2 घंटे के बाद 7 से ज्यादा जूरी-मंडल कहते है कि और विचार-विमर्श की जरूरत नहीं है, तो जज जूरी-मंडल के प्रत्येक सदस्य से अपना-अपना फैसला बताने के लिए कहेगा।
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20. [महा-जूरीमंडल]
यदि कोई जूरी सदस्य अथवा कोई एक पक्ष उपस्थित नहीं होता है या देर से उपस्थित होता है तो महा-जूरीमंडल 3 महीने के बाद जुर्माने पर फैसला करेंगे जो अधिकतम 5000 रूपए अथवा अनुपस्थित व्यक्ति की सम्पत्ति का 5 प्रतिशत में से जो भी ज्यादा हो, तक हो सकता है।
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21. [अध्यक्षता करने वाला जज]
जुर्माने के मामले में हर जूरी सदस्य अर्थ दण्ड की वह राशि बताएगा जो वह उपयुक्त समझता है। और यह राशि कानूनी सीमा से कम ही होनी चाहिए। यदि यह राशि कानूनी सीमा से ज्यादा है तो जज उस राशि या दंड को कानूनी सीमा जितनी ही मानेगा। वह जज दण्ड की राशियों को बढ़ते क्रम में सजाएगा और चौथी सबसे छोटी दण्ड राशि को चुनेगा अर्थात उस राशि को जूरी मंडल द्वारा सामूहिक रूप से लगाया गया जुर्माना माना जाएगा जो 12 जूरी सदस्यों में से 8 से ज्यादा सदस्यों ने (उतना या उससे अधिक) अनुमोदित किया हो।
उदहारण - जैसे जूरी-मंडल द्वारा लगायी हुई दण्ड-राशि यदि बदते क्रम में 400,400,500,600,700,700,800,1000,1000,1200,1200 रुपये है तो चौथी सबसे छोटी दण्ड-राशि 600 है और बाकी 8 जूरी-मंडल के लोगों ने इससे अधिक दण्ड-राशि का अनुमोदन किया है।
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22. [अध्यक्षता करने वाला जज]
कारावास की सजा के मामले में जज, जूरी-मंडल द्वारा दी गई सजा की अवधि को बढ़ते क्रम में सजाएगा जो उस कानून में लिखित सजा से कम होगा, जिस कानून को तोड़ने का वह आरोपी है। और जज चौथी सबसे छोटी सजा-अवधि को चुनेगा यानि कारावास की वह सजा जो 12 जूरी-मंडल में से 8 से ज्यादा जूरी सदस्यों द्वारा अनुमोदित हो, को 'कारावास की सजा जूरी-मंडल द्वारा मिलकर तय किया गया' घोषित करेगा।
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सैक्शन – 5 : फैसले का अमल और अपील
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23. [जिला पुलिस प्रमुख]
जिला पुलिस प्रमुख या उसके द्वारा निर्देशित पुलिस अधिकारी जुर्माना अथवा कारावास की सजा जो जज द्वारा सुनाई गई है और जूरी-मंडल द्वारा दी गई है, पर अमल करवाएगा।
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24. [जिला पुलिस प्रमुख]
यदि 4 या इससे अधिक जूरी सदस्य किसी कुर्की अथवा जुर्माने अथवा कारावास की सजा की मांग नहीं करते तो जज आरोपी को निर्दोष घोषित कर देगा और जिला पुलिस प्रमुख उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा।
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25. [आरोपी, शिकायतकर्ता]
दोनो ही पक्षों को राज्य के उच्च न्यायलय अथवा भारत के उच्चतम न्यायलय में फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिनों का समय होगा।
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सैक्शन – 6 : नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा
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26. [सभी सरकारी कर्मचारी]
निचली अदालतों के 12 जूरी सदस्यों में से 8 से अधिक की सहमति के बिना किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा तब तक कोई अर्थ दण्ड अथवा कारावास की सजा नहीं दी जाएगी जब तक कि हाई-कोर्ट अथवा सुप्रीम-कोर्ट के जूरी-मंडल इसका अनुमोदन नहीं कर देते। कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी नागरिक को जिला अथवा राज्य के महा-जूरीमंडल के 30 में से 15 से ज्यादा सदस्यों की अनुमति के बिना 24 घंटे से अधिक से लिए जेल में नहीं डालेगा।
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27. [सभी के लिए]
जूरी सदस्य तथ्यों के साथ-साथ इरादे के बारे में भी निर्णय करेंगे और कानूनों के साथ-साथ संविधान की भी व्याख्या कर सकेंगे।
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28. [सभी के लिए]
यह सरकारी अधिसूचना तभी लागू होगी जब भारत के सभी नागरिकों में से 51 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने इस पर हां दर्ज किया हो और उच्चतम न्यायलय के सभी न्यायधीशों ने इस सरकारी अधिसूचना का अनुमोदन कर दिया हो।
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29. [जिला कलेक्टर]
यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन का प्रस्ताव करता है तो वह नागरिक जिला कलेक्टर अथवा उसके क्लर्क से परिवर्तन की मांग करते हुए एक एफिडेविट जमा करवा सकता है। जिला कलेक्टर अथवा उसका क्लर्क इसे 20 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके डाल देगा ताकि कोई भी उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन के पढ़ सके।
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30. [तलाटी अर्थात पटवारी अथवा लेखपाल]
यदि कोई नागरिक इस कानून या इस कानून के किसी धारा पर अपना विरोध दर्ज कराना चाहता है अथवा ऊपर बतायी धारा के अनुसार दिए किए गए ऐफिडेविट पर कोई समर्थन दर्ज कराना चाहता है तो वह पटवारी के कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क जमा करके अपना हां/नहीं दर्ज कर सकता है। पटवारी नागरिकों के हां/नहीं को दर्ज करेगा और नागरिकों के हां/नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर डाल देगा।
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======= ड्राफ्ट की समाप्ति======