Pawan Jury BhilwaraRj
श्री श्री रविशंकर ने एनजीटी द्वारा लगाए गए 5 करोड़ के जुर्माने को भरने की सहमति दे दी है। उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व श्री श्री ने अपने बयान में जुर्माना भरने से इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि मैंने कोई गलत कार्य नही किया है, अत: जुर्माना अदा करना दोष को स्वीकारने की तरह होगा।
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राजनाथ, वेंकैया नायडू ने श्री श्री का समर्थन किया है और प्रधानमन्त्री खुद कार्यक्रम में शिरकत करने वाले है। बावजूद इसके नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल श्री श्री रविशंकर और मोदी साहेब को जलील कर रहा है। भारत में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों/मिशनरीज़ की ताकत लगातार बढ़ती जा रही है, और अब वे भारत में भी भारत से ज्यादा शक्तिशाली हो चुके है।
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यह घटना मिशनरीज के सामने हमारे प्रधानमंत्री की हैसियत का पता बताती है। ज्ञातव्य है कि एनजीटी इससे पहले शवो के अंतिम संस्कार और दीपावली पर आतिशबाजी से प्रदुषण फैलने पर चिंता जाहिर कर चुका है।
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समस्या --- एनजीटी लोकपाल नुमा संस्था है। स्वायत और असीमित अधिकार धारण करने वाली संस्था। मिशनरीज़/बहुराष्ट्रीय कंपनियां ऐसी संस्थाएं चाहती है जिनमे 10-12 लोगो के पास असीमित शक्तियां हो, अत: इन दर्जन भर लोगो को खरीद कर या घूस देकर अपने एजेंडे को लागू किया जा सके। रिओ डी जेनेरियो में हुए (1992) संयुक्त राष्ट संघ के पर्यावरण एव विकास सम्मलेन के दौरान भारत ने इस ट्रिब्यूनल की स्थापना करने का वचन दिया था, अत: इसी क्रम में 2010 में भारत में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की स्थापना की गयी। एनजीटी अध्यक्ष की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी करती है। अब न तो भारत के नागरिको के पास सुप्रीम कोर्ट के जज को नौकरी से निकालने का अधिकार है, न ही एनजीटी अध्यक्ष को।
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नागरिको को तो जाने दीजिये, भारत के प्रधानमंत्री के पास भी सुप्रीम कोर्ट के जजो को नियुक्त करने का अधिकार नही है ! सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट जजो की नियुक्ति में निर्णायक भूमिका कॉल्जियम की होती है, तथा कॉलजियम की अध्यक्षता भी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश ही करते है।
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समाधान --- राईट टू रिकॉल-सुप्रीम कोर्ट तथा राईट टू रिकॉल एनजीटी अध्यक्ष के क़ानून को गैजेट में प्रकाशित करके इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। इसके अलावा एनजीटी में सुनवाई का अधिकार नागरिको की ज्यूरी को दिया जाए। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के पास रहने से ट्रिब्यूनल द्वारा इस प्रकार के फैसलों पर स्वत: ही रोक लग जायेगी।
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