Pawan Jury BhilwaraRj
जाट आंदोलन के कारण हरियाणा में सैंकड़ो करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ और 20 लोगो की जान गयी है। इन हत्याओ का दोषी कौन है और ये पैसा कौन चुकाएगा ?
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बीजेपी -- जिसने जाटो को आरक्षण का वादा किया और बाद में मुकर गयी ?
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हुड्डा और राजकुमार सैनी -- हिंसा भड़काने में जिनकी भूमिका संदिग्ध है ?
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जाट -- जिन्होंने आंदोलन के हिंसक और उग्र होने के बावजूद प्रदर्शन जारी रखा ?
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या वे सभी कार्यकर्ता जो ऐसी घटनाओ के घटित होने से रोकने के लिए आवश्यक कानूनो का विरोध कर रहे है ?
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असल में मामला मूल रूप से व्यवस्था बनाये रखने के कानूनो से जुड़ा हुआ है लेकिन सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भगतो ने इस पूरे मामले को एक दूसरी ही दिशा में मोड़ दिया है। वे जाटो को आरक्षण दिए जाने और न दिए जाने पर बहस कर रहे है। जबकि विषय क़ानून व्यवस्था को बनाये रखने अराजकता को टाले रखने से सम्बंधित है।
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ऐसे सभी प्रकरणो के लिए दोषी वे सभी कार्यकर्ता है, जो कि नागरिको को अपनी बात मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री के समक्ष रखने की पारदर्शी, अधिकृत और संगठित प्रक्रिया का विरोध कर रहे है। इनमे बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी और अन्य सभी पार्टियों के कार्यकर्ता शामिल है। यदि हरियाणा में टीसीपी और राईट टू रिकॉल क़ानून प्रक्रियाएं होती थी तो इस हिंसा को टाला जा सकता था।
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समस्या यह है कि, भारत में नागरिको के पास अपने शासको को 5 वर्ष से पहले नौकरी से निकालने की कोई कानूनी प्रक्रिया नही है। इसी का फायदा उठाकर राजनैतिक पार्टियां चुनावो में थोक के भाव में वादे करती है और बाद में पलट जाती है। वे जानते है कि एक बार चुनाव जीत जाने के बाद अगले पांच वर्ष तक जनता उनका कुछ भी उखाड़ने में सक्षम नही है। तो सिद्धांत यह है कि -- 'वादे करो, वोट जुटाओ और भूल जाओ'। अत: सिद्धांत का पालन करते हुए बीजेपी ने जाटो को आरक्षण देने का वादा किया और वोट खींच लिए। यदि राईट टू रिकॉल क़ानून प्रक्रियाएं होने से पार्टियां सिर्फ वही वादे करेगी जिन्हे पूरा करना उसके बस की बात है। क्योंकि हवाई वादे करने से उन्हें अपने पद गँवाना पड़ सकता है।
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नेता उल जलूल बयान देने और उकसाने में सीमा पार कर जाते है, क्योंकि उन्हें पता है कि दोषी होने के बावजूद उनके ऊपर कार्यवाही नही की जा सकेगी। क्योंकि हमारी पुलिस सरकारों के नीचे ही काम करती है और भ्रष्ट अदालतों में फैसले सालो तक नही आते। यदि भारत में सार्वजनिक नार्को टेस्ट और नागरिको की ज्यूरी द्वारा मुकदमो की सुनवाई की प्रक्रियाएं होती तो हुड्डा-सैनी (जिनकी दंगो में संदिग्ध भूमिका है) जैसे नेता अपनी सीमा में रहते।
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यही स्थिति नागरिको की है। उनके पास अपनी संगठित आवाज शासको तक पहुंचाने की कोई प्रक्रिया नही होने के कारण वे पहले अपनी मांग रखते है, फिर फिर झुण्ड बनाकर छोटे-मोटे प्रदर्शन करते है, और बाद में बड़ी तादाद में सड़को पर उतर आते है। और एक बार जब बड़ी संख्या में जमाव सड़को पर उतर आता है तो भीड़तंत्र अपनी मनमर्जी चलाने लगता है। जिसका नतीजा हिंसा मारपीट आदि में निकलता है। वे मानते है कि जब तक वे सबकुछ ठप नही कर देंगे तब तक सरकार उनकी बात नही सुनेगी।
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तो भारत में टीसीपी, राईट टू रिकॉल और ज्यूरी प्रक्रियाए क्यों नही है ? क्योंकि बीजेपी-कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन कानून प्रक्रियाओ का विरोध कर रहा है। बीजेपी-कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में सिर्फ तीन लोग सोनिया-मोदी-केजरीवाल शामिल है। किन्तु इनके अंधभगत अपने नेताओ को खुश करने के लिए इनके इस रूख का समर्थन कर रहे है।
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यदि सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभगत अपने नेताओ से टीसीपी और राईट टू रिकॉल कानूनो क़ानून प्रक्रियाओ को गैजेट में प्रकाशित करवाने की मांग करे तो इन पर पर्याप्त दबाव बनेगा और ये इन क़ानून प्रक्रियाओ को लागू करवाने के लिए बाध्य हो जाएंगे।
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*मेरा मानना है कि ऐसी घटनाओ के लिए संघ के अंध सेवक भी उतने ही दोषी है, क्योंकि वे भी भगवत (भागवत) भक्ति के चलते इन कानूनी प्रक्रियाओ का विरोध कर रहे है। लेकिन ज्यादातर स्वयंसेवको का कहना है कि, 'हमारा मुख्य उद्देश्य साढ़े चार वर्ष तक सुबह शाम शाखा में जाकर व्यायाम करना, साल में चार बार पथ संचलन निकालना, हर छह महीने में चिंतन शिविर आयोजित करना, और समयानुकूल हिन्दूवाद/राष्ट्रवाद के नारे लगाना आदि है। चुनाव आने पर शेष 6 महीने मे हम बीजेपी के लिए वोट इकठ्ठे करने का काम करते है। इतना वर्क लोड होने के कारण हम पहले ही फंसे हुए है, अत: हमें देश की व्यवस्था को सुधारने के लिए आवश्यक क़ानूनो की मांग करने के मामलो में नही घसीटा जाना चाहिए'। मैंने उनकी बात मान ली है।
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देश की समस्याओ के समाधान में रुचि रखने वाले अन्य कार्यकर्ताओ और नागरिको को भी अपने सांसदों को एसएमएस द्वारा आदेश भेज कर इन कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करने की मांग करनी चाहिए। प्रस्तावित कानून ड्राफ्ट्स इस लिंक पर देखे जा सकते है -- https://web.facebook.com/notes/809761655808739
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