Pawan Jury BhilwaraRj
सत्ता में आने के बाद देश में शांति और क़ानून व्यवस्था बनाये रखने की जिम्मेदारी सरकार की होती है। सत्ता में आने के बाद भी गड़बड़ियों के लिए विपक्ष को कोसना विवशता की स्वीकारोक्ति है।
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मोदी साहेब ने कहा है कि उनकी सरकार को अस्थिर करने/गिराने की साजिश की जा रही है। मोदी साहेब इस आशय की बात पहले भी कई बार कह चुके है कि, उनकी सरकार के खिलाफ साजिश की जा रही है। ये ठीक बात है। लेकिन यह स्वभाविक है और इसमें नयापन नहीं है। क्योंकि सभी इस बात से वाकिफ है कि विपक्ष का काम गड़बड़ियां फैलाना और विरोध करना ही होता है ताकि सरकार को बदनाम करके उनकी लोकप्रियता कम की जा सके। तो क्या मोदी साहेब कांग्रेस , आम पार्टी ,लेफ्ट और अन्य विपक्षी पार्टियों से यह उम्मीद कर रहे है कि वे मोदी साहेब के शासन की सार्वजनिक तारीफ़ करेंगे,उनके काम में रोड़े नही डालेंगे और देश हित में कन्धा से कन्धा मिलाकर काम करेंगे ?
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गुजरात और हरियाणा के आरक्षण आंदोलन में 'विपक्ष का हाथ है' कहा गया। जेएनयू भी विपक्ष की साजिश थी। पठानकोट हमले में पाकिस्तान का हाथ था। आज पम्पोर में फिर आतंकवादी हमला हुआ और 5 जवान शहीद हुए है। सभी वाकिफ है कि इसमें भी पाकिस्तान का ही हाथ है। रोहित वेमुला प्रकरण में भी विपक्ष दोषी है। मालदा भी विपक्ष द्वारा प्रायोजित था। संसद नही चल रही क्योंकि विपक्ष नहीं चलने देना चाहता। असहिष्णुता भी 'विपक्ष फैला रहा है' ऐसा बताया गया। और पेड मिडिया तो खैर सभी विवादों में दोषी है ही।
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तो मेरा कहना है कि -- यह ऊपर कहे और अन्य अनकहे विवादों के दोषी विपक्ष और मिडिया ही है, लेकिन क्या ऐसा कहने से सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाती है ? क्या मोदी साहेब को देश के जनता ने थोक के भाव यह सब सुनने के लिए वोट दिए थे कि 'मैं प्रधानमन्त्री हूँ लेकिन मेरे बस में कुछ नही है' ?
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विपक्ष का काम देश में आग लगाना है और वो लगाएगा। आप में देश चलाने का हौसला होना चाहिए। आज सरकार आपके पास है। आपके पास पुलिस है, सेना है , आईबी और सीबीआई है, रॉ है। दर्जनो मंत्रालय और मंत्री है। आप 125 करोड़ की नुमाइंदगी करते है, और देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के नीति नियंता है। लेकिन आप 2 साल बीत जाने पर भी खुद के नाकारा होने को विपक्ष के खिलाफ मुद्दा बना रहे है। सरकार इकबाल से चलती है, और उसके ख़त्म होने से लॉ एंड आर्डर फ़ैल हो जाएगा। तब इसका दोष विपक्ष के मत्थे मढ़ देना या तो चालाकी है या पलायनवाद है।
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ठीक है। देश जैसे भी चल रहा है चलेगा। लेकिन सरकार में होने के बावजूद लगातार सभी गड़बड़ियों के लिए विपक्ष का आश्रय लेना सरकार की विवशता को दिखाता है। लेकिन सरकार कभी विवश नही होती। न ही आज है। दरअसल या तो मोदी साहेब में उस राजनैतिक इच्छा शक्ति का अभाव है जो क़ानून-व्यवस्था को बनाये रखने में लगती है, या फिर मोदी साहेब कतई उन उम्मीदों पर खरे नहीं है जो उनकी छवि को लेकर प्रचारित किया गया।
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दरअसल कांग्रेस, केजरीवाल, लेफ्ट, मिडिया और पाकिस्तान अपने एजेंडे पर काम करना जारी रखे हुए है, लेकिन मोदी साहेब ने उनके प्रतिरोधो से बचने के लिए कोई कदम नही उठाए। और तब निराशा होती है, जबकि उन्हें सत्ता संभाले पर्याप्त समय हो चुका हो।
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पठानकोट हमला पाकिस्तान की चाल थी लेकिन यदि पाकिस्तान वाजपेयी और मनमोहन सरकार की तर्ज पर ही हमले करता रहे और हमारे सैनिक शहीद होते रहे तो मोदी साहेब और मनमोहन में क्या अंतर है !! मोदी साहेब नवाज शरीफ के साथ जिस तरह की चाहे 'कूटनीति' खेले , और चाहे अजित डोवाल की जगह चिंचपोकली को सलाहकार बना दे, परन्तु हमें नतीजे में अपने सैनिको की शहादत नही चाहिए। यह जिम्मेदारी मोदी साहेब की है कि, भारत में आंतरिक और बाह्य शान्ति बनी रहे। 283 सीटों के साथ बहुमत देने के बावजूद नागरिक यह तावान चुकाने को तैयार नहीं है। हम मनमोहन के शासनकाल में भी चिताए जला रहे थे और आज भी जला रहे है। तो फिर हमने देश में बदला क्या है ? सरकार या पार्टी ? सरकार वही है, लेकिन पार्टी बदल गयी है।
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यदि मिडिया देश में आग लगा रहा है, और मोदी साहेब के पास मिडिया पर लगाम कसने का उपाय नहीं है तो हमें इसके उपाय की उम्मीद किससे रखनी चाहिए ? कांग्रेस से ?? आम आदमी पार्टी से ?? या खुद मिडिया से ?? यदि मतदाताओ को इनसे उम्मीद होती थी तो नागरिक मोदी साहेब की झोली में 283 सीटें कभी नही डालते थे।
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क्या कोई बताएगा कि मोदी साहेब ने देशद्रोही मिडिया चैनल्स को रेगुलेट करने या उनमे सुधार लाने के लिए कितने क़ानून पास किये है ? क्योंकि मेरी जानकारी में भारत में मिडिया आज भी ठीक उन्ही कानूनो पर चल रहा है जिन कानूनो पर मनमोहन सरकार के दौरान काम कर रहा था। और मोदी साहेब के मंत्रियों ने मिडिया को सुधारने का यह अजीब तरीका निकाला है, कि उन्हें 'प्रेस्टी.........' कहा जाए। इससे मिडिया निष्पक्ष/देशभक्त हो जाएगा !!!
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कम से कम मोदी साहेब इतना तो कर ही सकते है कि, दूरदर्शन अध्यक्ष तथा सूचना-प्रसारण मंत्री को नौकरी से निकालने व चुनने की प्रक्रिया भारत के नागरिको को दे। ऐसा क़ानून पास करने में सिर्फ एक सरकारी अधिसूचना की आवश्यकता है। ऐसा होने से सिर्फ 3 महीनो के भीतर भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष मिडिया की स्थापना हो जायेगी। लेकिन चूंकि अपनी पूर्ववर्ती सोनिया घांडी की तरह मोदी साहेब भी नागरिको को ऐसी शक्ति देने का विरोध करते है, अत: उन्होंने इस प्रस्ताव को ही खारिज कर दिया । ठीक है, कोई बात नही। लेकिन यह देखना अजीब है कि मोदी साहेब चाहते है कि सूचना-प्रसारण मंत्री और दूरदर्शन अध्यक्ष के पद पर वे अपना आदमी बिठाएंगे लेकिन देश में मिडिया सुधारो से पल्ला झाड़ लेंगे।
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तो मैं पूछना चाहूंगा कि -- यदि देश का मिडिया बिकाऊ/भांड/राष्ट्रद्रोही और 'प्रेस्टी.........' है तो क्या हमें भारत के मिडिया को सुधारने के लिए बल्गारिया के प्रधानमंत्री को वोट करना चाहिए !! ताकि वे यहाँ आकर मिडिया को सुधारने के आवश्यक कानूनो को पास करे ? या हमें दिन में 72 बार मिडिया को भांड मिडिया, बिकाऊ मिडिया, देशद्रोही मिडिया के नारे लगाने चाहिए ताकी मिडिया के प्रायोजकों की आत्मा जाग जाए और वे देशभक्त हो जाए ?
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राज्यों में क़ानून व्यवस्था बनाये रखना हालांकि राज्यों का विषय है। किन्तु सभी जानते है कि मोदी साहेब की आरक्षण को लेकर नीति लुंजपुंज है, और वे वक्त देखकर क्रमश आरक्षण के समर्थक और विरोधी होने का संकेत देते रहते है। तस्दीक के लिए आप बीजेपी का मेनिफेस्टो देख सकते है। आरक्षण पर उनका कोई पुख्ता स्टेण्ड नहीं है। सब गड्ड मड्ड है। ताकि अवसर के अनुसार उसे बदला जा सके। विधानसभा चुनावो के दौरान मोदी साहेब ने खाप पंचायतो के प्रमुखो को यह संकेत दिया कि वे जाटो को आरक्षण दिए जाने का समर्थन करते है। नतीजा हरियाणा को इतना हिंसक आंदोलन झेलना पड़ा। वहाँ के मुख्यमंत्री खट्टर है, (जो कि मोदी साहेब के प्रसादपर्यन्त कुर्सी पर बने हुए है) और उनकी जिम्मेदारी है कि नागरिको को जान माल की क्षति न उठानी पड़े। लेकिन वे उठा रहे है। ठीक है, यह सब कांग्रेस का करा कराया है, (जैसा की सोशल मिडिया पर बीजेपी की आईटी सेल द्वारा कहा जा रहा है) लेकिन हरियाणा के नागरिको ने कांग्रेस को नहीं बीजेपी को वोट किया है।
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और यदि सत्ता में रहकर भी यदि बीजेपी नागरिको और देश को कांग्रेस के ताप से नहीं बचा सकती तो उन्हें यह स्पष्ट घोषणा करनी चाहिए थी कि 'सत्ता में आने के बावजूद देश कांग्रेस ही चलाएगी' !!!
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और कमोबेश यही हालात सभी क्षेत्रो में है। महंगाई बढ़ रही है, रूपया गिर रहा है, सरकारी स्कूल और अस्पताल जैसे थे वैसे ही है, पीके जैसी फिल्मे अनकट रिलीज हो रही है, छोटे और बड़े दोनों पर्दो पर नग्नता का स्तर बढ़ गया है। धर्मांतरण जारी है, गायें कट रही है। मंदिरो का प्रशासन टूटता जा रहा है। अब ये सभी समस्याएं कांग्रेस के टाइम भी थी और आज भी है। तो मोदी साहेब को वोट इसलिए नही दिया गया था कि वे कांग्रेस के 60 साल के शासन काल में 5 साल और जोड़ दे। भाषण, लफ्फाजी, मन की बातें, उपदेश, सेल्फ़ियाँ, ट्वीट, स्वच्छ्ता अभियान, खादी प्रचार और योग आदि शासनेत्तर गतिविधियाँ है, शासन नही।
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कुल मिलाकर मेरा बिन्दु यह है कि ; देश में जो भी समस्याएं है या विपक्ष द्वारा जो भी गड़बड़ियां फैलाई जा रही है उनके समाधान के लिए ही मोदी साहेब को चुना गया है। उन्हें इन समस्याओ को ख़त्म करने के लिए आवश्यक क़ानून बनाने चाहिए। और हाँ, यहां मैं यह बात भी दर्ज करना चाहूंगा कि आरोप-प्रत्यारोप के लिहाज से राज्य सभा में बहुमत नहीं होने की बातें कहना ठीक है। लेकिन यह भी सच है कि जो भी क़ानून मोदी साहेब पास करना चाहे उन्हें संयुक्त सत्र बुलाकर पास किया जा सकता है। और संयुक्त सत्र में एनडीए के पास बहुमत है। और यदि कांग्रेस के नेता ज्यादा अवरोध पैदा करने का प्रयास करते है तो बकौल मोदी साहेब 'कांग्रेस से देश को 60 सालो तक लूटा है' अत: उनके पुराने चिट्ठो को सीबीआई से खुलवाकर उन्हें जेल में फेंका जा सकता है। और ज्यादा दूर भी जाने की जरूरत नहीं है, राबर्ट बढेरा की जमींदारी किसी से छिपी नही है। हरियाणा और केंद्र, दोनों में बीजेपी की सरकार है। अब ऐसी हालत में भी यदि आप द्रोहियों को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं है तो, फिर दोष जनता का नहीं है। क्योंकि जनता इस देश की प्रधानमंत्री नही है।
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