Pawan Jury BhilwaraRj
फेसबुक के संचालक मंडल में शामिल मार्क एंडरसन ने कहा है कि "यदि भारत ब्रिटिश का गुलाम बना रहता तो हालात ज्यादा बेहतर होते" !! उनका यह भी कहना है कि "भारत इसीलिए पिछड़ गया क्योंकि भारत औपनिवेशिक साम्राज्य के खिलाफ है" !!!
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http://www.ibtimes.co.uk/marc-andreessen-stokes-controversy-tweet-ban-free-basics-india-1543160
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हालांकि विवाद बढ़ता देख उन्होंने बाद में ट्वीट करके इसके लिए खेद व्यक्त किया है। लेकिन यह गंभीरता से सोचने का विषय है कि अगर वे माफ़ी नही मांगते तो इस बयान से आहत नागरिक क्या कर लेते ? क्योंकि बहिष्कार ब्रिगेड में से किसी ने भी अब तक 'फेसबुक का बहिष्कार' करने की चूं तक नहीं की है। बहिष्कार ब्रिगेड जानती है कि फेसबुक से ही बाहर हो जाएंगे तो बहिष्कार कहाँ करेंगे ? क्या कोई भारतीय कम्पनी है जो फेसबुक का विकल्प हो ???
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हम जानते है कि हम परजीवी है और भारत का सोशल मिडिया पूरी तरह से फेसबुक के कब्जे में है। और यह निर्भरता बढ़ती जायेगी। चीन ने फेसबुक को प्रतिबंधित कर रखा है अत: वहाँ की स्थानीय कम्पनियाँ इतनी शक्तिशाली हो चुकी है कि उन्हें जुकेरबर्ग की जरुरत नहीं। हम और हमारे शासक फेसबुक की डोरी पकड़ के लटके हुए है और डिजिटल इण्डिया के एलान चला रहे है। आने वाले 5 साल में फेसबुक यूजर्स की संख्या दोगुनी या लगभग तिगुनी हो जायेगी, अत: हम फेसबुक पर और भी निर्भर हो जाएंगे। तब एंडरसन ऐसा ट्वीट करने पर खेद भी व्यक्त नहीं करेंगे। वे कहेंगे कि, जो उखाड़ना है उखाड़ लो।
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युद्ध या आपातकाल में यदि फेसबुक अपना सर्वर स्लो कर देता है या कुछ समय के लिए फेसबुक को ही बंद कर देता है तो डिजिटल इण्डिया एक ही दिन में पाषाणयुग में पहुँच जाएगा। फोन विदेशी, शोसल नेटवर्क विदेशी, कंप्यूटर विदेशी, मोबाइल कनेक्शन विदेशी, मिडिया चैनल्स विदेशी, हथियार विदेशी, ट्रेने विदेशी और नूडल्स, बिस्कुट, तेल, साबुन, मंजन स्वदेशी !!
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समाधान ?
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मेक इन इण्डिया भारत के लिए शाप है। हमें 'मेड इन इण्डिया मेड बाय इंडियंस' की नीति का ही आश्रय लेना चाहिए। वरना आदमियो के अलावा भारत में सबकुछ विदेशी होगा।
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रेल, रक्षा, संचार, मिडिया, हथियार जैसे महत्त्वपूर्ण और मारक क्षेत्रो में विदेशी निवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, तथा भारत की स्थानीय इकाइयों में तकनिकी विकास और उन्हें सरंक्षण देने के लिए सात्य प्रणाली, ज्यूरी सिस्टम आदि कानूनो को गैजेट में प्रकाशित किया जाना चाहिए। दो चार साल तकलीफ देखनी पड़ेगी लेकिन भविष्य के लिए भारत सुरक्षित हो जाएगा। ऋण लेकर घी पीना अस्वास्थ्यवर्धक है, जबकि सोनिया-मोदी-केजरीवाल भारत को इस घी से नहला रहे है।
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प्रस्तावित कानूनो के ड्राफ्ट्स यहां देखें :
1. सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) के लिए कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809743912477180
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2. भारत में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809740312477540
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3. ज्यूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809746209143617
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4. राईट टू रिकाल जिला शिक्षा अधिकारी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/810067079111530
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