Pawan Jury BhilwaraRj

पेड दैनिक भास्कर में पिछले 20 वर्षो से 'नियमित' स्तम्भ लिख रहे सिने-विश्लेषक जय प्रकाश चौकसे ने राईट टू रिकॉल के मुद्दे पर टिप्पणी की है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में नागरिको में यह भ्रम फैलाने की कोशिश की, कि राइट टू रिकॉल क़ानून प्रक्रियाएं देश में अस्थिरता ले आएगी और लगभग रोज ही चुनाव होंगे !!! हालांकि उन्होंने अपने पाठको को यह नही बताया कि अमेरिका में राइट टू रिकॉल प्रक्रियाएं मौजूद होने के बावजूद वहाँ रोज चुनाव नहीं होते।
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लय में चौकसे यह भी कह गए कि औद्योगिक समूहों द्वारा मिडिया को मोटा पैसा देकर खबरों को दबाया जाता है।
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स्तम्भ इस लिंक पर देखें ---
http://epaper.bhaskar.com/detail/?id=917587&boxid=2102304602&ch=0&map=map&currentTab=tabs-1&pagedate=02/10/2016&editioncode=158&pageno=6&view=image
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जैसे जैसे राईट टू रिकॉल कानूनो का प्रचार बढ़ता जाएगा वैसे वैसे पेड मिडिया के प्रायोजको पर इन मुद्दो पर बोलने का दबाव बढ़ता जाएगा। वे इसका मजाक उड़ाएंगे, इसे कोसेंगे, इसके बारे में भ्रम फैलाएंगे और पूरी कोशिश करेंगे कि नागरिक राईट टू रिकॉल कानूनो को देश के लिए नुकसानदेह समझे।
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चौकसे पिछले 20 वर्ष से भास्कर में लिख रहे है, लेकिन यह पहली बार है जब उन्हें राईट टू रिकॉल पर मुहं खोलने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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