Pawan Jury BhilwaraRj
आपातकालीन सामाजिक कार्य बनाम शान्ति कालीन सामाजिक कार्य ---- क्यों आपातकालीन सामाजिक कार्यों का महत्त्व है जबकि शान्ति काल में किये गए सामाजिक कार्य समय और ऊर्जा की बर्बादी है ?
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आपातकालीन सेवाओ से आशय है ---- वे सामाजिक सेवाएं जो अचानक उत्पन्न हुयी प्राकृतिक आपदाओ जैसे बाढ़, भूकम्प, सुनामी आदि के दौरान दी जाती है। ऐसी आपदाओ में श्रम और धन की बड़े पैमाने पर आवश्यकता होती है, और पीड़ितो से इन सेवाओ के एवज में किसी प्रकार के भुगतान की उम्मीद नही की जा सकती। अत: ऐसे हालात में बाजार और प्रशासन वांछित जरूरते मुहैया करवाने में असफल हो सकता है, इसलिए स्वयंसेवी कार्यकर्ताओ की भूमिका महत्त्वपूर्ण और सकारात्मक हो जाती है।
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लेकिन शान्ति कालीन सामाजिक कार्यो में वंचित छात्रों को 'दैनिक' रूप से पढ़ाना आदि शामिल है। उल्लेखनीय है कि गरीब छात्रों को नियमित रूप से पढ़ाने का सेवा कार्य करने की जगह यदि सांसदों पर राइट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी, सात्य प्रणाली आदि क़ानून ड्राफ्ट्स लागू करने का दबाव बनाया जाए तो शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार लाये जा सकते है।
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शान्ति कालीन सामाजिक कार्यो में मुब्तिला ज्यादातर वरिष्ठ कार्यकर्ता 'हमेशा' भारत में भ्रष्टाचार कम करने, प्रशासन को बेहतर बनाने और शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए आवश्यक कानूनो को लागू करवाने के प्रयास कर रहे कार्यकर्ताओ का सक्रीय विरोध करते है। सभी वरिष्ठ कार्यकर्ता जूनियर कार्यकर्ताओ को यह बात समझाने पर जोर देते है कि -- उन्हें बदलाव लाने के लिए उनके संगठन के लिए कार्य करना चाहिए और साथ ही संगठन को मजबूत बनाने के लिए चंदे, अनुदान आदि भी इकट्ठे करने चाहिए।
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शान्ति कालीन सेवाओ में अपने आप को खपाने से कहीं बेहतर विकल्प है कि, कार्यकर्ता अपने सांसद/विधायक पर दबाव बनाकर उन कानूनो को लागू करवाने के लिए कार्य करें , जिससे प्रशासन की अकार्यकुशलता और भ्रष्टाचार को कम किया जा सके। ऐसा होने से प्रशासन कुशलतापूर्वक कार्य करेगा और शान्ति कालीन सामाजिक सेवाओ की आवश्यकता घटती जायेगी। प्रशासन को कुशल बनाने का सबसे बेहतर ज्ञात तरीका यह है कि भारत के नोडल अधिकारियों जैसे पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, जज, लोक अभियोजक आदि को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको को दिया जाए तथा इनके स्टाफ की अनियमितताओं से सम्बन्धी मामलो की सुनवाई का अधिकार नागरिको की ज्यूरी को दिया जाए।
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आखिर क्यों सभी वरिष्ठ कार्यकर्ता अपने जूनियर कार्यकर्ताओ को प्रशासन में सुधार लाने के लिए आवश्यक कानूनो पर काम करने से हतोत्साहित करते है और उन्हें शान्ति कालीन सामाजिक कार्यों को करने की सलाह देते है ?
क्योंकि यदि जूनियर कार्यकर्ताओ को अनुपयोगी कार्यो में उलझा कर नहीं रखा गया तो इस बात की संभावनाएं बढ़ जायेगी कि , मौजूदा कानूनो में सुधार करने की मांग करे। इसलिए मौजूदा कानूनो के समर्थक विशिष्ट वर्ग और राजनैतिक पार्टियां वरिष्ठ कार्यकर्ताओ को भुगतान करती है, ताकि वे जूनियर कार्यकर्ताओ को अनुपयोगी कार्यों में व्यस्त रखें।
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आप ऐसे संघठनो की अंतहीन सूची बना सकते है , जो अपने कार्यकर्ताओ को प्रशासन में सुधार के लिए आवश्यक कानूनो पर कार्य करने के लिए हतोत्साहित और शान्ति कालीन सामाजिक कार्यों में लगे रहने के लिए प्रोत्साहित करते है। मैं आग्रह करूंगा कि, कृपया नए कार्यकर्ताओ को इस संगठनो की सभाओ और कार्यशालाओं में भेजे, ताकि ये जान सके कि किस तरह ये भारी भरकम सामाजिक/सांस्कृतिक/सेवा संगठन देश के कार्यकर्ताओ का समय नष्ट कर रहे है। इससे नए कार्यकर्ताओ को इनकी नीति के बारे में जानकारी होगी और इन संगठनो की समय बर्बाद करने की शक्ति का ह्रास होगा।
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