Pawan Jury BhilwaraRj
नेताजी से सम्बंधित गुप्त फाइलों को सार्वजनिक किये जाने की प्रक्रिया 'शुरू' होने पर बधाई।
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उन सभी कार्यकर्ताओ तथा नागरिको को बधाई, जो लम्बे समय से अहिंसा मूर्ती राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस की गुप्त फाइलों को सार्वजनिक किये जाने की मांग कर रहे थे। वे सभी नागरिक भी बधाई के पात्र है, जिन्होंने अपने सांसदों को दस्तावेज सार्वजनिक करने के लिए एसएमएस द्वारा आदेश भेजे।
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अहिंसा मूर्ती राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस के भतीजे श्री चन्द्र कुमार बोस भी विशेष रूप से बधाई के पात्र है, जिन्होंने दस्तावेजो को सार्वजनिक करवाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया।
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पिछले 70 वर्षो से नेताजी के सम्बन्ध में लगातार सच्चाई छुपाई गयी। कांग्रेस के साथ साथ वाम दलों और बीजेपी का भी इस जानकारी को छिपाने में पूरा योगदान रहा। वाजपेयी ने अपने 6 वर्षीय शासनकाल में इन दस्तावेजो को सार्वजनिक नहीं किया, और बंगाल में दशको तक सत्ता में रहने के बावजूद वाम दलों ने भी इस जानकारी को नागरिको से छुपाया।
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संघ ने भी पिछले 70 वर्षो में नेताजी से सम्बंधित गुप्त दस्तावेजो को सार्वजनिक करने की कभी मांग नहीं की, और हमेशा इन्हें सार्वजनिक किये जाने का विरोध किया।
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सुब्रह्मनियम स्वामी भी इन दस्तावेजो को सार्वजनिक करने का पिछले 45 वर्षो से विरोध कर रहे थे।
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लेकिन स्वतंत्र कार्यकर्ताओ ने दस्तावेजो को सार्वजनिक करने के लिए लगातार अभियान चलाया और ये सभी दिग्गज नेता न चाहते हुए भी दस्तावेजो को सार्वजनिक करने का समर्थन करने को बाध्य हुए।
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गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इन दस्तावेजो को सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया था, लेकिन कार्यकर्ताओ द्वारा लगातार मांग किये जाने और बंगाल सरकार द्वारा दस्तावेजो को सार्वजनिक किये जाने के कारण मोदी साहेब पर दबाव बना, और उन्हें बंगाल चुनावो के मद्देनजर इन दस्तावेजो को सार्वजनिक करने का फैसला लेना पड़ा।
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3 महीने बाद बंगाल में चुनाव है, और फाइलों को सार्वजनिक न करने का फैसला मोदी साहेब के लिए वोटो के लिहाज से काफी महंगा पड़ सकता था, लेकिन जिस क्रमिक तरीके से दस्तावेजो को सार्वजनिक किया जा रहा है, वह अब कांग्रेस को महंगा पड़ेगा। और ऐसा करने में कोई गलत बात भी नहीं है, क्योंकि राजनीति में फैसले वोटो के आधार पर ही किये जाते है।
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बहरहाल, अहिंसा मूर्ती राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस से सम्बंधित गुप्त दस्तावेजो को सार्वजनिक करने का फैसला लेने के लिए मोदी साहेब का धन्यवाद।
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उम्मीद की जानी चाहिए कि बंगाल चुनाव ख़त्म हो जाने के बावजूद मोदी साहेब नेताजी से जुडी "सभी" फाइलों को क्रमिक रूप से सार्वजनिक करना जारी रखेंगे।
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