Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब ने मेनका गांधी को जल्लीकट्टू के खिलाफ बोलने के लिए कहा, और उसी समय प्रकाश जावड़ेकर को भी आदेश दिया कि वे जल्लीकट्टू को कानूनी बनाए जाने के लिए सरकारी आदेश जारी करे !!!
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मोदी साहेब जल्लीकट्टू के समर्थक है या जल्लीकट्टू के खिलाफ है ?
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भारतीय राजनीति में अपने रूख में स्पष्टता और निरंतरता बनाये रखना कभी भी नेताओ की पहचान नहीं रही है। मैंने कभी परवाह नहीं कि, जब मोदी साहेब ने वल्लभ भाई पटेल और राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस की प्रशंसा करना शुरू किया, और उसी समय मोदी साहेब नागरिको से यह तथ्य भी छुपा रहे थे कि ये दोनों ही नेता किस तरह एक दूसरे के बिलकुल खिलाफ थे। बिलकुल खिलाफ। सरदार पटेल के बड़े भाई विट्ठल भाई पटेल वल्लभ भाई के साथ ही कांग्रेस के अन्य नेताओ की हरकतों से इतने आजिज आ चुके थे कि, 1933 में अपनी मृत्यु के समय उन्होंने अपनी अकूत सम्पति का वारिस राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस को बना दिया था। मोदी साहेब ने इस तथ्य पर भी जानबूझकर खामोशी बरती कि सरदार पटेल ने संपत्ति पर कब्ज़ा करने के लिए सुभाष बाबू को अदालत में खींचा और जैसा कि होना था, ब्रिटिश जज ने सुभाष बाबू के दावे को खारिज करके सरदार पटेल के पक्ष में फैसला दिया !!
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पटेल, नेहरू, गांधी और ब्रिटिश आदि इस बात पर आश्वस्त थे कि यदि नेताजी के हाथ सम्पति आ जाती है तो उनके लिए ब्रिटिश के खिलाफ फ़ौज खड़ी करना आसान हो जाएगा।
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दूसरे शब्दों में पटेल और बोस की प्रंशंसा करना लेकिन नागरिको से इस तथ्य को छुपाये रखना कि दोनों में किस स्तर के निजी और राजनैतिक मतभेद व्याप्त थे, मोदी साहेब के दोहरे मापदंडो का परिचायक है। लेकिन भारत के सभी शीर्ष नेताओ का यही चरित्र रहा है अत: जैसा कि मैंने कहा, मैने परवाह नही की।
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लेकिन जल्लीकट्टू पर मोदी साहेब की दोगली नीति शर्मनाक है। पांच जनवरी 2016 को मोदी साहेब ने प्रकाश जावड़ेकर को जल्लीकट्टू को वैध करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने के लिए कहा और अगले ही दिन मोदी साहेब ने मेनका गांधी को कहा कि वे जल्लीकट्टू खेल को 'पश्चिम परम्परा' , 'गौरक्षा के खिलाफ' और 'एंटी हिन्दू' के रूप में प्रस्तुत करे।
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निश्चित रूप से , ऐसे समाचार पत्र और पत्रिकाये जो 'मॉडर्न मैकडोनाल्ड हिन्दुओ' द्वारा पढ़ी जाती है, में इस आशय के स्तम्भ प्रकाशित होंगे जिससे यह सन्देश जाए कि मोदी साहेब और मेनका घांडी जल्लीकट्टू का विरोध करते है, जबकि 'वडापाव हिन्दुओ' द्वारा पढ़े जाने वाले अखबारों में मोदी साहेब और प्रकाश जावड़ेकर द्वारा जल्लीकट्टू के समर्थन करने से सम्बंधित सूचनाये साझा की जायेगी !!
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ये दोगली और गन्दी तरकीब काम भी करती है। क्योंकि पेड मिडिया को इसके लिए मोटा पैसा दिया जाता है कि 'उदार मैकडोनाल्ड हिन्दुओ' द्वारा पढ़े जाने वाले अखबारों में यह जानकारी प्रकाशित नहीं की जाए कि मोदी साहेब जल्लीकट्टू का समर्थन करते है, और इसी तरह 'परंपरागत वडापाव हिन्दुओ' द्वारा पढ़े जाने वाले अखबारों से भी यह जानकारी छुपा ली जाती है कि, मोदी साहेब जल्लीकट्टू का विरोध करते है !!
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लेकिन मोदी साहेब की यह उलटबांसी यह साबित करती है कि मोदी साहेब किस तरह पेड़ मिडिया पर बुरी तरह निर्भर हो चुके है, और इसीलिए मोदी साहेब की आर्थिक नीति पेड़ मिडिया के प्रायोजक तय करते है।
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कुल मिलाकर मोदी साहेब की यह दूध-दही को मिलाकर पीने की नीति भारत के लिए बहुत हानिकारक है।
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सार यह है कि, कार्यकर्ताओ को यह बात समझनी चाहिए कि सोनिया-अरविन्द और मोदी साहेब समेत भारत के सभी शीर्ष नेता अपने मुंह में दसियों जबान रखते है। मोदी साहेब एक दिन जल्लीकट्टू का समर्थन करते है और दूसरे दिन विरोध। इसी तरह अरविन्द घांडी मालदा दंगो पर मुँह बंद करके बैठ जाते है। और शूर्पणखां के कलयुगी अवतार सोनिया घांडी के बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है।
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समाधान यह है कि, कार्यकर्ताओ को सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे नेताओ का आँखे मूंदकर अनुसरण करने की जगह क़ानून ड्राफ्ट्स को लागू करवाने पर अपनी शक्ति लगानी चाहिए। वरना ये नेता अपनी दर्जन भर जबानो से दोगले वक्तव्य देकर नागरिको को भ्रमित करते रहेंगे।
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लिंक्स
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1. सरदार पटेल के भाई विट्ठल भाई ने अपनी संपत्ति का वारिस सुभाष बाबू को बनाया था --- http://www.hindustantimes.com/columns/the-forgotten-rivalry-between-patel-and-bose/story-qctC1zkNRCNc6eF024x4EO.html
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2. मोदी साहेब ने जावड़ेकर को आदेश दिया कि जल्लीकट्टू को वैध कराने के लिए आदेश जारी करे --- यह तथ्य सार्वजनिक है, और सभी इससे परिचित है।
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3. मोदी साहेब ने मेनका घांडी से जल्लीकट्टू का विरोध करने को कहा ---- http://www.dnaindia.com/india/report-jallikattu-against-govt-s-ideology-of-saving-cows-maneka-gandhi-led-pfa-2163654
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और उनके लिए, जिनका कहना है कि मोदी साहेब के मंत्री स्वतंत्र रूप से कार्य करते है, मोदी साहेब के निर्देशो पर नहीं --- वे कृपया मोदी साहेब का वह ट्वीट उपलब्ध कराएं जिसमे वे यह कह रहे है कि उनके मंत्री उनके नियंत्रण से बाहर है और मनमानी कर रहे है।
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