Pawan Jury BhilwaraRj
हिन्दू राष्ट्र की स्थापना को लेकर दो अवधारणाएं है। आपको कौनसी चाहिए ?
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संघ की अवधारणा है कि --
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भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए संविधान की प्रस्तावना में दर्ज शब्द 'धर्म निरपेक्ष' को संशोधित करके वहाँ 'हिन्दू राष्ट्र' अंकित किया जाना चाहिए। इससे भारत विधीवत रूप से हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा, और सारी समस्याएं ख़त्म हो जायेगी। और इस संशोधन के लिए संघ को लोकसभा में बीजेपी की 400 सीटें और राज्य सभा में 150 सीटें चाहिए।
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१) संघ के हिन्दू राष्ट्र में कत्लखानों को सब्सिडी दी जाती है, कटवाई की मशीनों का आयात शुल्क घटाया जाता है, मांस के निर्यात को साल भर में डेढ़ गुना कर दिया जाता है और राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी अदालत पर छोड़ दी जाती है। (काशी विश्वनाथ और मथुरा देवालय को तो भूल ही जाइए)
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२) संघ की हिन्दू राष्ट्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ने की भी कोई योजना नहीं है, बल्कि वे चाहते है कि ऐसा कोई क़ानून भी नहीं बनाया जाना चाहिए जिससे मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपैठियों की आवक को रोका जा सके।
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३) संघ के हिन्दू राष्ट्र में जनसँख्या के बिगड़ते धार्मिक संतुलन को रोकने के लिए भी किसी 'टू चाइल्ड पालिसी' क़ानून का स्थान नहीं है।
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४) संघ इस बात पर भी सहमत है कि हिन्दू मंदिरो को सरकारी नियंत्रण में ले लिया जाना चाहिए और उनके स्वर्ण कोष के बदले उन्हें गोल्ड बांड थमा देने चाहिए। इसलिए संघ हिन्दू मंदिरो को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के क़ानून का विरोध कर रहा है।
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५) संघ के हिन्दू राष्ट्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किये जा रहे विदेशी निवेश का स्वागत है। जबकि संघ इस बात से वाकिफ है कि जितना ही विदेशी निवेश आएगा उतना ही मिशनरीज मजबूत होगी और भारत में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण होंगे।
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६) संघ के हिन्दू राष्ट्र में सेना को मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी आधुनिक हथियारों के उत्पादन के लिए आवश्यक कानूनो की भी कोई योजना नहीं है, बल्कि संघ ऐसे सभी कानूनो के सख्त खिलाफ है जिससे भारत अपने हथियारों का उत्पादन स्वयं कर सके। अत: संघ के हिन्दू राष्ट्र में हिन्दुस्तान ईसाईयों के देशो से हथियार आयात करता है।
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आपको यदि संघ द्वारा प्रस्तावित हिन्दू राष्ट्र के इस ढाँचे में कोई दिक्कत है तो संघ के कार्यकर्ताओ से संपर्क करके उनसे पूछे कि हिन्दू राष्ट्र तो ठीक है, लेकिन उपरोक्त समस्याओ को हल करने के लिए आवश्यक कानूनो का वे विरोध क्यों कर रहे है।
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पहले चरण में वे आपके सामने यही बाजा बजायेंगे कि संघ हिन्दू वादी संगठन है और हिन्दू हितो के सरंक्षण के लिए कार्य कर रहा है। तब उनसे यह पूछे कि हिन्दू राष्ट्र तो ठीक है लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठ, गौ-हत्या, टू चाइल्ड पॉलिसी, मंदिरो को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करना, स्वदेशी हथियारों का उत्पादन आदि मुद्दो को हल करने के लिए आवश्यक कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करने मात्र से ही देश में लागू किया जा सकता है, फिर भी वे राज्य सभा में बहुमत नही होने का झूठ क्यों फैला रहे है। उनसे यह भी पूछे कि यदि उन्हें संसद से ही क़ानून पास करने की जिद है तो कौनसी ताकत मोदी साहेब को संयुक्त अधिवेशन बुला कर उनके पसंदीदा क़ानून पास करने से रोक रही है।
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तब वे थोड़ा रुको, इंतजार करो, अभी देखो आगे आगे क्या होता है टाइप के डॉयलॉग बोलकर आपको चकमा देने की कोशिश करेंगे। तब आप उनसे कहें कि, 'ठीक है हम रूकने को तैयार है, लेकिन रूकने के लिए हमें आपके हिन्दू राष्ट्र का ड्राफ्ट देवें, ताकि हम यह जान कर रूक सके कि आपके हिन्दू राष्ट्र का ढांचा क्या है, और आप किन क़ानून ड्राफ्ट् के भरोसे हमें रूकने का उपदेश दे रहे है' ?
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हमारी अवधारणा है कि ---
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हमें बांग्लादेशी घुसपैठीयों को खदेड़ने, मंदिरो को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने, स्वदेशी हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा देने, रेल-मिडिया-संचार-रक्षा आदि क्षेत्रो में विदेशी निवेश को रोकने, टू चाइल्ड पॉलिसी को लागू किये जाने, गौ-हत्या को रोकने, अयोध्या-काशी और विश्वनाथ देवालय के निर्माण के लिए आवश्यक कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करवाने की जरुरत है।
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फर्क यह है कि संघ का हिन्दू राष्ट्रवाद हवाबाजी है, और इसका इस्तेमाल वे वोट दुहने के लिए करते है, जबकि हमारे प्रस्ताव देश में लागू करवाने के लिए हमने इनके क़ानून ड्राफ्ट दिये है, और इन्हें आज की तारीख में लागू किया जा सकता है।
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प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट यहां देखें ---
https://web.facebook.com/notes/pawan-kumar-jury/809761655808739
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