Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

Pawan Jury BhilwaraRj:

सोनिया घांडी और मनमोहन सिंह दोनों मिलकर भी इतना नहीं गिर पाये थे जितना इस मुद्दे पर मोदी साहेब ने गिर कर दिखाया है।
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मोदी साहेब ने भारतीय चिकित्सीय अनुसंधान संस्थान को आदेश दिया कि वो खेसारी दाल से बेन हटाने की सिफारिश करें।
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इस विषय पर पुनर्विचार करने के लिए तीन सरकारी एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी गयी थी। एक एजेंसी ने बेन हटाने की अनुशंषा की, जबकि अन्य दो ने अब तक इस बारे में सरकार को कोई सलाह नहीं दी है। बावजूद इसके बेन हटा लिया गया।
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खेसारी दाल का सेवन शरीर पर स्थायी दुष्प्रभाव छोड़ता है, अत: यह पशुओ तक के लिए भी हानिकारक है। खेसारी दाल स्वाद और संरचना तुअर (अरहर) की दाल जैसा होता है, और चूंकि अब मोदी साहेब ने इस पर से बेन हटा लिया है अत: ढाबे और रेस्टोरेंट में अब इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा।

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प्रत्येक मोदी अंध भगत मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन कर रहा है, और किसी ने भी अब तक अपने सांसद को यह आदेश नहीं भेजा है कि खेसारी दाल को बेन किया जाए। जबकि मोदी साहेब के कट्टर अंध भगत और भागवत के अंध सेवक नागरिको को यह विश्वास दिलाने में लगे हुए है कि खेसारी की दाल स्वास्थ्य की दृष्टी से बहुत लाभदायक है, और दिन में एक बार हर व्यक्ति को इसका अवश्य सेवन करना चाहिए। नागरिको से आग्रह है कि इन अंध भगतो की बातों में आकर खेसारी दाल का सेवन न करें।
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समाधान
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अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि इस दाल को बेन किया जाए। एसएमएस में #BanKhesariDal लिखे और इसे अपने फेसबुक/ट्विटर स्टेटस पर रखे, तथा कॉमेंट बॉक्स में दर्ज करें कि, 'मैं खेसारी दाल पर बेन का समर्थन करता हूँ ; #BanKhesariDal.
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खबर के लिए यह लिंक देखें --

http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/icmr-panel-clears-unsafe-khesari-dal-banned-in-61/
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