Pawan Jury BhilwaraRj
राईट टू रिकॉल सांसद के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट
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भारत के नागरिको,
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अगर आप चाहते है कि नागरिकों के पास ऐसी प्रक्रिया हो कि वे अपने सांसद को किसी भी दिन नौकरी से निकाल सकें, तो अपने सांसद को एस.एम.एस. द्वारा ये आदेश भेजे :
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माननीय सांसद,
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अगर आपको एस.एम.एस. द्वारा ये यू.आर.एल मिला है तो इसे उस वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है, न कि जिसने ये लेख लिखा है।
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========ड्राफ्ट का प्रारम्भ========
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1. (1.1) शब्द `नागरिक` का मतलब रजिस्टर्ड मतदाता है |
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(1.2) शब्द “कर सकता है“ का मतलब कोई भी नैतिक-कानूनी बंधन नहीं है | इस का मतलब “ कर सकता है“ या “करने की आवश्यकता नहीं है“ है |
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2. (जिला कलेक्टर के लिए निर्देश)
यदि भारत का कोई मतदाता सांसद के चुनाव में उम्मीदवार बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर के दफ्तर में सांसद-चुनाव के लिए तय राशि जमा कर सकेगा। जिला कलेक्टर उस व्यक्ति को आने वाले चुनाव में उम्मीदवार घोषित करके एक सीरियल नंबर जारी करेगा तथा उसका नाम प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर डालेगा।
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3. (तलाटी या पटवारी के लिए निर्देश)
(3.1) यदि कोई मतदाता पटवारी के दफ्तर आकर 3 रू शुल्क देकर सांसद के पद के लिए कम से कम पांच व्यक्तियों को अनुमोदित करता है तो पटवारी उसके अनुमोदन को कंप्यूटर में दर्ज करके उसको एक रसीद देगा। पटवारी मतदाता की पहचान पत्र संख्या, तारीख, समय और अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम भी रसीद में दर्ज करेगा।
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(3.2) यदि पटवारी के पास कंप्यूटर आदि नहीं है तो जब तक जब तक पटवारी को कंप्यूटर उपलब्ध नही होता, जिला कलेक्टर यह कार्य तहसीलदार के दफ्तर को देगा।
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(3.3) जिला कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम बना सकता है जो मतदाता को उसके अनुमोदनों के बारे में एस.एम.एस द्वारा सम्बंधित जानकारी देगा।
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(3.4) जिला कलेक्टर मतदाता की फोटो और अंगुलीयों की छाप लेकर रसीद देने के लिए आवश्यक उपकरण पटवारी को उपलब्ध करवाएगा।
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4.(तलाटी या पटवारी के लिए निर्देश)
पटवारी मतदाताओ के वोटर आई.डी. नंबर तथा उन उम्मीदवारों के नाम जिनको उसने अनुमोदित किया है, को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा |
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5. (तलाटी या पटवारी के लिए निर्देश)
यदि वोटर अपने अनुमोदन रद्द करने आता है तो तलाटी एक या अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए रद्द कर देगा |
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6. (संसद के लिए निर्देश)
यदि किसी वैकल्पिक उम्मीदवार को इतने अनुमोदन मिल जाते हैं जो कि --
(6.1) क्षेत्र के कुल मतदाताओ का 10% तथा वर्तमान सांसद के वोटों की गिनती से अधिक हो, या
(6.2) उस चुनाव-क्षेत्र के कुल मतदाताओं के 50% से ज्यादा हो।
तो वर्तमान सांसद अपना इस्तीफा 7 दिन में दे सकता है या उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं है।
7. (लोकसभा अध्यक्ष के लिए निर्देश)
यदि वर्तमान सांसद 7 दिनों में इस्तीफा नहीं देता है तो लोकसभा अध्यक्ष उस सांसद को निकालने के लिए संसद में प्रस्ताव रख सकता है या उसके लिए ऐसा करना जरूरी नही है। लोकसभा अध्यक्ष का फैसला अंतिम होगा।
8.(सांसदो के लिए निर्देश)
अन्य सांसद उस सांसद को निकालने के लिए प्रस्ताव स्वीकृत कर सकते हैं या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है।
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9. (चुनाव आयोग के लिए निर्देश)
यदि सांसद इस्तीफा देता है या निकाला जाता है तो चुनाव आयोग नियमानुसार नया चुनाव करवायेगा। जो सांसद निकाला गया है, अगले चुनाव में वो चुनाव लड़ सकता है।
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10. धारा-6 के प्रयोजन के लिए उन मतदाताओं के अनुमोदन जिन्होनें उम्मीदवार के रूप में अपना नाम दर्ज किया है, नहीं गिने जाएँगे। हर चुनाव-क्षेत्र के मतदाताओ की सही संख्या चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित की जायेगी और चुनाव-आयोग का फैसला अंतिम होगा |
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11. प्रधानमंत्री इस सरकारी आदेश के धारा-6 में दिए गयी सीमाएं बदल सकता है। ये सीमाएं पूरे देश के लिए एक होगी।
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12. चुनाव के समय उम्मीदवार चुनाव-आयोग में एक शपथपत्र दे सकता है कि वो 'राईट टू रिकाल-सांसद' क़ानून का समर्थन करता है कि नहीं।
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13. [जनता की आवाज़-1] (जिला कलेक्टर के लिए निर्देश)
कोई भी गरीब मतदाता, दलित मतदाता, महिला मतदाता या कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून में बदलाव चाहता हो तो वह जिला कलेक्टर के कार्यालय में जाकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस ऐफिडेविट को 20 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा और स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
14. [जनता की आवाज़-2] (तलाटी अथवा पटवारी के लिए निर्देश)
कोई भी गरीब मतदाता, दलित मतदाता, महिला मतदाता, वरिष्ठ नागरिक मतदाता या कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा उपर दिए खण्ड एक में प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचानपत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का शुल्क जमा कराएगा। तलाटी मतदाता की हां/नहीं दर्ज कर लेगा और उसे इसकी रसीद देगा। इस हां/नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल दिया जाएगा।
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=======ड्राफ्ट की समाप्ति=======
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स्पष्टीकरण
(क) मान लीजिए एक चुनाव-क्षेत्र में 15 लाख मतदाता है, जिनमे से 8 लाख ने मतदान किया। मान लीजिए जीतने वाले उम्मीदवार को 3 लाख 60 हज़ार वोट मिले। अब यदि किसी वैकल्पिक उम्मीदवार को 3,60,000 + 1,50,000 (15 लाख का 10% = 1.5 लाख) = 5,10,000 या इससे अधिक अनुमोदन मिलते है तो वो अगला सांसद बन सकता है।
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(ख) मान लीजिए एक चुनाव-क्षेत्र में 15 लाख मतदाता है। मान लीजिए उनमें से 9 लाख ने वोट किये तथा जीतने वाले उम्मीदवार को 8 लाख वोट मिले। अब यदि वैकल्पिक मतदाता को सभी मतदाताओं की संख्या के 50% यानी 7,50,000 अनुमोदन मिलते है तथा यदि यह अनुमोदन वर्तमान सांसद को मिले अनुमोदनों से 1% ज्यादा है तो नया उम्मीदवार अगला सांसद बन सकता है।
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(ग) मतदाताओं को धमकी देना संभव नहीं है क्योंकि कोई भी लाखों मतदाताओ को रोज-रोज धमकी नहीं दे सकता |
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(घ) अनुमोदन को खरीदना संभव नहीं है – नागरिक किसी भी दिन अपना अनुमोदन रद्द कर सकते है। इसीलिए यदि कोई उम्मीदवार 5,10,000 वोटरों को 100 रु देकर अनुमोदन लेता है तो नागरिक अगले दिन ही अपना अनुमोदन रद्द कर सकते है।
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(च) अनुमोदन / पसंद / स्वीकृति दर्ज करना बैंक के लेन-देन से ज्यादा सुरक्षित है -- व्यक्ति को दर्ज कराए गए अनुमोदनो की जानकारी एस.एम.एस द्वारा मिलती रहेगी, तथा मशीन उसका फोटो और अंगुली का छाप ले लेगी। ये जरूर है, कि पहले दिन से ये सभी सुविधाएं नहीं होंगी, लेकिन कलेक्टर इन प्रक्रियाओं को 3-6 महीनों में लागू कर सकता है या फिर नागरिक उसको निकालने की मांग कर सकते हैं। फोटो, अंगुली की छाप और एस.एम.एस की जानकारी के साथ ये सिस्टम बैंक के लेन-देन से ज्यादा सुरक्षित है। यदि इसको कोई हैक कर सकता है, तो उसके लिए कोई बैंक हैक करना अधिक उपयोगी होगा।
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