Pawan Jury BhilwaraRj

जिन सबूतों के आधार पर सेशन जज से सलमान को सजा सुनाई, उन्ही सबूतो के आधार पर हाई कोर्ट के जज ने सलमान को बरी कर दिया।
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निचोड़ यह है कि, अदालत में सबूत कोई मायने नहीं रखते। मायने यह रखता है कि क्या जज किसी सबूत को सबूत मानने को राजी है या नहीं।
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सारा मामला जजो के 'विवेक' यानी कि उन्हें दी गयी घूस पर टिका हुआ है, न कि जिरह और सबूतों पर।
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ऐसे भ्रष्ट जजो को नौकरी से निकालने और दंड देने की शक्ति जब तक नागरिको के पास नहीं आएगी, जज इसी तरह के काण्ड करते रहेंगे।
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समाधान
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ज्यूरी सिस्टम और राइट टू रिकॉल जज के क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि ऐसे जज को नौकरी से निकाल कर नागरिको की ज्यूरी जज और सलमान का नार्को टेस्ट ले सके, और उस ड्राइवर कमल सिंह का भी जिसे 12 साल बाद याद आया कि गाड़ी तो वो खुद चला रहा था, ताकि इन्हें इनके असली ठिकाने हवालात में पहुंचाया जा सके।
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ज्यूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809746209143617
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